ऑनलाइन बैठक

मेन्‍यू

मत्ती 1

1अब्राहम की सन्तान, दाऊद की सन्तान, यीशु मसीह* की वंशावली*।

2अब्राहम से इसहाक उत्‍पन्‍न हुआ, इसहाक से याकूब उत्‍पन्‍न हुआ, और याकूब से यहूदा और उसके भाई उत्‍पन्‍न हुए।

3यहूदा और तामार से पेरेस व जेरह उत्‍पन्‍न हुए, और पेरेस से हेस्रोन उत्‍पन्‍न हुआ, और हेस्रोन से एराम उत्‍पन्‍न हुआ।

4एराम से अम्मीनादाब उत्‍पन्‍न हुआ, और अम्मीनादाब से नहशोन, और नहशोन से सलमोन उत्‍पन्‍न हुआ। (रूत 4:19-20)

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5सलमोन और राहाब से बोआज उत्‍पन्‍न हुआ, और बोआज और रूत से ओबेद उत्‍पन्‍न हुआ, और ओबेद से यिशै उत्‍पन्‍न हुआ।

6और यिशै से दाऊद राजा उत्‍पन्‍न हुआ। और दाऊद से सुलैमान उस स्त्री से उत्‍पन्‍न हुआ जो पहले ऊरिय्याह की पत्‍नी थी। (2 शमू. 12:24)

7सुलैमान से रहबाम उत्‍पन्‍न हुआ, और रहबाम से अबिय्याह उत्‍पन्‍न हुआ, और अबिय्याह से आसा उत्‍पन्‍न हुआ।

8आसा से यहोशाफात उत्‍पन्‍न हुआ, और यहोशाफात से योराम उत्‍पन्‍न हुआ, और योराम से उज्जियाह उत्‍पन्‍न हुआ।

9उज्जियाह से योताम उत्‍पन्‍न हुआ, योताम से आहाज उत्‍पन्‍न हुआ, और आहाज से हिजकिय्याह उत्‍पन्‍न हुआ।

10हिजकिय्याह से मनश्शे उत्‍पन्‍न हुआ, मनश्शे से आमोन उत्‍पन्‍न हुआ, और आमोन से योशिय्याह उत्‍पन्‍न हुआ।

11और बन्दी होकर बाबेल जाने के समय में योशिय्याह से यकुन्याह*, और उसके भाई उत्‍पन्‍न हुए। (यिर्म. 27:20)

12बन्दी होकर बाबेल पहुँचाए जाने के बाद यकुन्याह से शालतियेल उत्‍पन्‍न हुआ, और शालतियेल से जरुब्बाबेल उत्‍पन्‍न हुआ।

13जरुब्बाबेल से अबीहूद उत्‍पन्‍न हुआ, अबीहूद से एलयाकीम उत्‍पन्‍न हुआ, और एलयाकीम से अजोर उत्‍पन्‍न हुआ।

14अजोर से सादोक उत्‍पन्‍न हुआ, सादोक से अखीम उत्‍पन्‍न हुआ, और अखीम से एलीहूद उत्‍पन्‍न हुआ।

15एलीहूद से एलीआजर उत्‍पन्‍न हुआ, एलीआजर से मत्तान उत्‍पन्‍न हुआ, और मत्तान से याकूब उत्‍पन्‍न हुआ।

16याकूब से यूसुफ उत्‍पन्‍न हुआ, जो मरियम का पति था, और मरियम से* यीशु उत्‍पन्‍न हुआ जो मसीह कहलाता है।

17अब्राहम से दाऊद तक सब चौदह पीढ़ी हुई, और दाऊद से बाबेल को बन्दी होकर पहुँचाए जाने तक चौदह पीढ़ी, और बन्दी होकर बाबेल को पहुँचाए जाने के समय से लेकर मसीह तक चौदह पीढ़ी हुई।

18अब यीशु मसीह का जन्म इस प्रकार से हुआ, कि जब उसकी माता मरियम की मंगनी यूसुफ के साथ हो गई, तो उनके इकट्ठे होने के पहले से वह पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती पाई गई।

19अतः उसके पति यूसुफ ने जो धर्मी था और उसे बदनाम करना नहीं चाहता था, उसे चुपके से त्याग देने की मनसा की।

20जब वह इन बातों की सोच ही में था तो परमेश्‍वर का स्वर्गदूत उसे स्वप्न में दिखाई देकर कहने लगा, “हे यूसुफ! दाऊद की सन्तान, तू अपनी पत्‍नी मरियम को अपने यहाँ ले आने से मत डर, क्योंकि जो उसके गर्भ में है, वह पवित्र आत्मा की ओर से है।

21वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु* रखना, क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा।”

22यह सब कुछ इसलिए हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था, वह पूरा हो (यशा. 7:14)

23“देखो, एक कुँवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा,” जिसका अर्थ है - परमेश्‍वर हमारे साथ।

24तब यूसुफ नींद से जागकर परमेश्‍वर के दूत की आज्ञा अनुसार अपनी पत्‍नी को अपने यहाँ ले आया।

25और जब तक वह पुत्र न जनी तब तक वह उसके पास न गया: और उसने उसका नाम यीशु रखा।

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