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परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है III" | अंश 136

493 31/08/2020

जो परमेश्वर के अधिकार के अधीन होने की इच्छा रखता है उसके लिए उचित मनोवृत्ति एवं अभ्यास

किस मनोवृत्ति के साथ अब मनुष्य को परमेश्वर के अधिकार, और मानव की नियति के ऊपर परमेश्वर की संप्रभुता के तथ्य (सच्चाई) को जानना एवं मानना चाहिए? यह एक वास्तविक समस्या है जो प्रत्येक व्यक्ति के सामने खड़ी होती है। जब वास्तविक जीवन की समस्याओं का सामना किया जाता है, तब तुम्हें किस प्रकार परमेश्वर के अधिकार और उसकी संप्रभुता को जानना एवं समझना चाहिए? जब तुम नहीं जानते हो कि किस प्रकार इन समस्याओं को समझना, सम्भालना और अनुभव करना है, तो तुम्हारे इरादे, तुम्हारी इच्छा, और परमेश्वर की संप्रभुता एवं इंतज़ामों के अधीन होने की अपनी वास्तविकता को दिखाने के लिए तुम्हें किस प्रकार की मनोवृत्ति अपनानी चाहिए? पहले तुम्हें इंतज़ार करना सीखना होगा; फिर तुम्हें खोजना सीखना होगा; तब तुम्हें अधीन होना सीखना होगा। "इंतज़ार" का अर्थ है परमेश्वर के समय का इंतज़ार करना, तथा उन लोगों, घटनाओं एवं चीज़ों का इंतज़ार करना जिन्हें उसने तुम्हारे लिए व्यवस्थित किया है, और उसकी इच्छा के लिए इंतज़ार करना कि वह आहिस्ता आहिस्ता अपनी इच्छा को आप पर प्रकट करे। "खोजने" का अर्थ है उन लोगों, घटना और चीज़ों के माध्यम से तुम्हारे लिए परमेश्वर के विचारशील इरादों का अवलोकन करना एवं समझना जिन्हें उसने बनाया है, उनके माध्यम से सत्य को समझना, जो मनुष्यों को पूरा करना होगा उसे और उन मार्गों को समझना जिनका उन्हें पालन करना होगा, इस बात को समझना कि परमेश्वर मनुष्यों में किन परिणामों को हासिल करने की इच्छा करता है और वह उनमें किन उपलब्धियों को देखने की इच्छा करता है। "समर्पण", वास्तव में, उन लोगों, घटनाओं, एवं चीज़ों को स्वीकार करने की ओर संकेत करता है जिन्हें परमेश्वर ने आयोजित किया है, उसकी संप्रभुता को स्वीकार करने की ओर संकेत करता है और, इसके माध्यम से, यह जानना है कि किस प्रकार सृष्टिकर्ता मानव की नियति को नियन्त्रित करता है, कि वह किस प्रकार अपने जीवन से मनुष्य की आपूर्ति करता है, कि वह किस प्रकार मनुष्यों के भीतर सच्चाई का काम करता है। सभी चीज़ें परमेश्वर के इंतज़ामों एवं संप्रभुता के अधीन प्राकृतिक नियमों का पालन करती हैं, और यदि तुमने ठान लिया है कि तुम परमेश्वर को अपने लिए हर एक चीज़ का इंतज़ाम करने एवं नियन्त्रण करने की अनुमति देते हो, तो तुम्हें इंतज़ार करना सीखना होगा, तुम्हें खोजना सीखना होगा, और तुम्हें अधीन होना सीखना होगा। यह वही मनोवृत्ति है जिसे प्रत्येक व्यक्ति को अपनाना होगा जो परमेश्वर में अधिकार के अधीन होना चाहता है, और यह वही मूल योग्यता है जिसे प्रत्येक व्यक्ति को धारण करना होगा जो परमेश्वर की संप्रभुता एवं इंत ज़ामों को स्वीकार करना चाहता है। इस प्रकार की मनोवृत्ति रखने के लिए, इस प्रकार की योग्यता धारण करने के लिए, तुम लोगों को और भी अधिक कठिन परिश्रम करना होगा; और केवल इस प्रकार से ही तुम लोग सच्ची वास्तविकता में प्रवेश कर सकते हो।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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