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परमेश्वर के दैनिक वचन

आज के लिए परमेश्वर का वचन

मंगलवार फ़रवरी 27, 2024

परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर का स्वभाव और स्वरूप | अंश 258

जिस क्षण से तुम रोते हुए इस दुनिया में आते हो, तभी से तुम अपना कर्तव्य पूरा करना शुरू कर देते हो। परमेश्वर की योजना और उसके विधान में अपनी भूमिका निभाते हुए तुम अपनी जीवन-यात्रा शुरू करते हो। तुम्हारी पृष्ठभूमि जो भी हो और तुम्हारी आगे की यात्रा जैसी भी हो, कोई भी स्वर्ग के आयोजनों और व्यवस्थाओं से बचकर भाग नहीं सकता, और किसी का भी अपनी नियति पर नि...

परमेश्वर के दैनिक वचन : कार्य के तीन चरण | अंश 35

परमेश्वर पृथ्वी पर मुख्य रूप से अपने वचनों को कहने के लिए आया है; और तुम जिसके साथ संलग्न होते हो, वह परमेश्वर का वचन है, वह परमेश्वर का वचन है, तुम जो देखते हैं, वह परमेश्वर का वचन है, तुम जिसे सुनते हो वह परमेश्वर का वचन है, तुम जिसका पालन करते हो वह परमेश्वर का वचन है, तुम जो अनुभव करते हो, वह परमेश्वर का वचन है, और मनुष्य को पूर्ण करने के लिए प... और देखें

परमेश्वर के दैनिक वचन : जीवन में प्रवेश | अंश 416

अपने प्रतिदिन के जीवन में तुम प्रार्थना पर बिलकुल ध्यान नहीं देते। लोगों ने प्रार्थना को सदैव नजरअंदाज किया है। प्रार्थनाएँ लापरवाही से की जाती थीं, जिसमें इंसान परमेश्वर के सामने बस खानापूर्ति करता था। किसी ने भी कभी परमेश्वर के समक्ष पूरी रीति से अपने हृदय को समर्पित नहीं किया है और न ही परमेश्वर से सच्चाई से प्रार्थना की है। लोग परमेश्वर से तभी ... और देखें

परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर को जानना | अंश 115

योना 3 तब यहोवा का यह वचन दूसरी बार योना के पास पहुँचा: "उठकर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और जो बात मैं तुझ से कहूँगा, उसका उस में प्रचार कर।" तब योना यहोवा के वचन के अनुसार नीनवे को गया। नीनवे एक बहुत बड़ा नगर था, वह तीन दिन की यात्रा का था। योना ने नगर में प्रवेश करके एक दिन की यात्रा पूरी की, और यह प्रचार करता गया, "अब से चालीस दिन के बीतने पर नीनव... और देखें

परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर का प्रकटन और कार्य | अंश 71

परमेश्वर की छह-हज़ार-वर्षीय प्रबंधन योजना समाप्त हो रही है, और राज्य का द्वार उन सभी लोगों के लिए पहले से ही खोल दिया गया है, जो उसका प्रकटन चाहते हैं। प्रिय भाइयो और बहनो, तुम लोग किस चीज़ की प्रतीक्षा कर रहे हो? वह क्या है, जो तुम खोजते हो? क्या तुम परमेश्वर के प्रकट होने की प्रतीक्षा कर रहे हो? क्या तुम उसके पदचिह्न खोज रहे हो? परमात्मा के दर्शन ... और देखें

परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर का स्वभाव और स्वरूप | अंश 263

जब सबसे पहले मनुष्य को सामाजिक विज्ञान मिला, तब से मनुष्य का मन विज्ञान और ज्ञान में व्यस्त था। फिर विज्ञान और ज्ञान मानवजाति के शासन के लिए उपकरण बन गए, और अब मनुष्य के पास परमेश्वर की आराधना करने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं था, और परमेश्वर की आराधना के लिए अब और अनुकूल परिस्थितियाँ नहीं थी। मनुष्यों के हृदय में परमेश्वर की स्थिति और भी नीचे हो गई थ... और देखें

परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर का प्रकटन और कार्य | अंश 70

कई हज़ारों सालों से, मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता के आगमन को देखने में सक्षम होने की लालसा की है। मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता यीशु को एक सफेद बादल पर देखने की इच्छा की है जब वह व्यक्तिगत रूप से उन लोगों के बीच में अवरोहण करता है जिन्होंने हज़ारों सालों से उसकी अभिलाषा की है और उसके लिए लालायित रहे हैं। मनुष्य ने उद्धारकर्त्ता की वापसी और लोगों के साथ उसके फिर... और देखें

परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर को जानना | अंश 9

परमेश्वर विभिन्न परीक्षणों से जाँच करता है कि लोग परमेश्वर का भय मानते और बुराई से दूर रहते हैं या नहीं हर युग में, जब परमेश्वर संसार में कार्य करता है तब वह मनुष्य को कुछ वचन प्रदान करता है, और उन्हें कुछ सत्य बताता है। ये सत्य ऐसे मार्ग के रूप में कार्य करते हैं जिसके मुताबिक मनुष्य को चलना चाहिए, जिस पर मनुष्य को चलना चाहिए, ऐसा मार्ग जो मनुष... और देखें

परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर को जानना | अंश 39

परमेश्वर का स्वभाव कभी मनुष्य से छिपा नहीं रहा है—मनुष्य का हृदय परमेश्वर से भटक गया है सृजन के समय से ही, परमेश्वर का स्वभाव उसके कार्य के साथ क़दम से क़दम मिलाता रहा है। यह मनुष्य से कभी भी छिपा हुआ नहीं रहा है, बल्कि मनुष्य के लिए पूरी तरह प्रचारित और स्पष्ट किया गया है। फिर भी, समय बीतने के साथ, मनुष्य का हृदय परमेश्वर से और भी अधिक दूर हो ग... और देखें

परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर का प्रकटन और कार्य | अंश 72

चाहे तुम अमेरिकी हो, ब्रिटिश या फिर किसी अन्य देश के, तुम्हें अपनी राष्ट्रीयता की सीमाओं से बाहर कदम रखना चाहिए, अपनी अस्मिता के पार जाना चाहिए, और परमेश्वर के कार्य को एक सृजित प्राणी के दृष्टिकोण से देखना चाहिए। इस तरह तुम परमेश्वर के पदचिह्नों को सीमाओं में नहीं बाँधोगे। ऐसा इसलिए है, क्योंकि आजकल बहुत-से लोग इसे असंभव समझते हैं कि परमेश्वर किसी... और देखें