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और अधिक सुसमाचार सच्चाईयाँ

बाइबल केवल परमेश्वर के दो चरणों के कार्य का अभिलेख है, जो व्यवस्था का युग और अनुग्रह का युग थे; वह परमेश्वर के संपूर्ण कार्य का अभिलेख नहीं है

संदर्भ के लिए बाइबल के पद: "और भी बहुत से काम हैं, जो यीशु ने किए; यदि वे एक एक करके लिखे जाते, तो मैं समझता हूँ कि पुस्तकें जो लिखी जातीं वे संसार में भी न समातीं" (यूहन्ना 21:25)। "मुझे तुम से औ...

बाइबल को मानने और उसकी आराधना करने वाले लोग अनंत जीवन पाने में असफल क्यों रहेंगे

संदर्भ के लिए बाइबल के पद: "तुम पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उसमें अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं...

परमेश्वर के कार्य के प्रत्येक चरण और उसके नाम के बीच संबंध

संदर्भ के लिए बाइबल के पद: "फिर परमेश्‍वर ने मूसा से यह भी कहा, 'तू इस्राएलियों से यह कहना, "तुम्हारे पितरों का परमेश्‍वर, अर्थात् अब्राहम का परमेश्‍वर, इसहाक का परमेश्‍वर, और याक़ूब का परमेश्‍वर, यह...

अनुग्रह के युग में प्रभु यीशु द्वारा दिया गया उपदेश केवल प्रायश्चित का मार्ग था

संदर्भ के लिए बाइबल के पद: "मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आया है" (मत्ती 4:17)। "तब उस ने पवित्रशास्त्र बूझने के लिये उनकी समझ खोल दी, और उनसे कहा, 'यों लिखा है कि मसीह दु:ख उठाएगा, और तीस...

मानवजाति के प्रबंधन के लिए परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों का उद्देश्य

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन: मेरी संपूर्ण प्रबंधन योजना, छह-हज़ार-वर्षीय प्रबंधन योजना, के तीन चरण या तीन युग हैं : आरंभ में व्यवस्था का युग; अनुग्रह का युग (जो छुटकारे का युग भी है); और अंत के दिनों मे...

परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों में से प्रत्येक का उद्देश्य और अर्थ

(1) व्यवस्था के युग में परमेश्वर के कार्य का उद्देश्य और अर्थ परमेश्वर के प्रासंगिक वचन: यहोवा ने जो कार्य इस्राएलियों पर किया, उसने मानव-जाति के बीच पृथ्वी पर परमेश्वर के मूल स्थान को स्थापित किया,...

परमेश्वर के कार्य के तीनों चरणों के बीच संबंध

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन: यहोवा के कार्य से लेकर यीशु के कार्य तक, और यीशु के कार्य से लेकर इस वर्तमान चरण तक, ये तीन चरण परमेश्वर के प्रबंधन के पूर्ण विस्तार को एक सतत सूत्र में पिरोते हैं, और वे स...

परमेश्वर का तीन चरणों का कार्य कैसे क्रमशः गहन होता जाता है, ताकि लोगों को बचाकर उन्हें पूर्ण किया जा सके?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन: परमेश्वर के सम्पूर्ण प्रबंधन को तीन चरणों में विभाजित किया जाता है, और प्रत्येक चरण में, मनुष्य से यथोचित अपेक्षाएँ की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, जैसे-जैसे युग बीतते और प्रगत...

परमेश्वर का नाम बदल सकता है, लेकिन उसका सार कभी नहीं बदलता

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन: हर बार जब परमेश्वर पृथ्वी पर आता है, तो वह अपना नाम, अपना लिंग, अपनी छवि और अपना कार्य बदल देता है; वह अपने कार्य को दोहराता नहीं है। वह ऐसा परमेश्वर है, जो हमेशा नया रहता ...