ऑनलाइन बैठक

मेन्‍यू

अगला

परमेश्वर के दैनिक वचन : जीवन में प्रवेश | अंश 485

175 21/04/2021

पवित्र आत्मा का कार्य दिन ब दिन बदलता जाता है, हर एक कदम के साथ ऊँचा उठता जाता है; आने वाले कल का प्रकाशन आज से भी कहीं ज़्यादा ऊँचा होता है, कदम दर कदम और ऊपर चढ़ता जाता है। जिस कार्य के द्वारा परमेश्वर मनुष्य को सिद्ध करता है वह ऐसा ही है। यदि मनुष्य उस गति से चल न पाए, तो उसे किसी भी समय पीछे छोड़ा जा सकता है। यदि मनुष्य के पास आज्ञाकारी हृदय न हो, तो वह अंत तक अनुसरण नहीं कर सकता है। पूर्व का युग गुज़र गया है; यह एक नया युग है। और नए युग में, नया कार्य करना होगा। विशेषकर अंतिम युग में जिसमें मनुष्य को सिद्ध किया जाएगा, परमेश्वर पहले से ज़्यादा तेजी से नया कार्य करेगा। इसलिए, अपने हृदय में आज्ञाकारिता को धारण किए बिना, मनुष्य के लिए परमेश्वर के पदचिह्नों का अनुसरण करना कठिन होगा। परमेश्वर किसी भी नियम का पालन नहीं करता है, न ही वह अपने कार्य के किसी स्तर को अपरिवर्तनीय मानता है। बल्कि, वह जिस कार्य को करता है वह हमेशा नया और हमेशा ऊँचा होता है। उसका कार्य हर एक कदम के साथ और भी अधिक व्यावहारिक होता जाता है, और मनुष्य की वास्तविक ज़रूरतों के और भी अधिक अनुरूप होता जाता है। जब मनुष्य इस प्रकार के कार्य का अनुभव करता है केवल तभी वह अपने स्वभाव के अंतिम रूपान्तरण को हासिल कर पाता है। जीवन के बारे में मनुष्य का ज्ञान और सर्वाधिक उच्च स्तरों तक पहुँच जाता है, इसलिए इसी तरह से परमेश्वर का कार्य भी सर्वाधिक उच्च स्तरों तक पहुँच जाता है। केवल इसी तरह से मनुष्य को सिद्ध बनाया जा सकता है और परमेश्वर के उपयोग के योग्य हो सकता है। परमेश्वर एक ओर, मनुष्य की अवधारणाओं का सामना करने और उन्हें उलटने के लिए, और दूसरी ओर, उच्चतर तथा और अधिक वास्तविक स्थिति में, परमेश्वर पर विश्वास करने के उच्चतम आयाम में मनुष्य की अगुवाई करने के लिए, इस तरह से कार्य करता है, ताकि अंत में, परमेश्वर की इच्छा पूरी हो सके। वे सभी जो अवज्ञाकारी प्रकृति के हैं जो जानबूझ कर विरोध करते हैं उन्हें परमेश्वर के इस द्रुतगामी और प्रचंडता से आगे बढ़ते हुए कार्य के इस चरण द्वारा पीछे छोड़ दिया जाएगा; केवल जो स्वेच्छा से आज्ञापालन करते हैं और जो अपने आप को प्रसन्नतापूर्वक दीन बनाते हैं वे ही मार्ग के अंत तक प्रगति कर सकते हैं। इस प्रकार के कार्य में, तुम सभी लोगों को सीखना चाहिए कि समर्पण कैसे करें और अपनी अवधारणाओं को कैसे अलग रखें। तुम लोगों को उस हर कदम पर सतर्क रहना चाहिए जो तुम उठाते हो। यदि तुम लोग लापरवाह हो, तो तुम लोग निश्चित रूप से उनमें से एक बन जाओगे जिसे पवित्र आत्मा द्वारा ठुकराया जाता है, और एक ऐसे व्यक्ति बन जाओगे जो परमेश्वर के कार्य में उसे बाधित करता है। कार्य के इस स्तर से गुज़रने से पहले, मनुष्य के पुराने समय के नियम और विधियाँ संख्या में इतनी अधिक थी कि वह दूर चला गया, और परिणामस्वरूप, वह अहंकारी हो गया और स्वयं को भूल गया। ये सभी बाधाएँ हैं जो परमेश्वर के नए कार्य को स्वीकार करने से मनुष्य को रोकती हैं; ये मनुष्य को परमेश्वर का पता चल जाने की विरोधी हैं। यदि किसी मनुष्य के हृदय में न तो आज्ञाकारिता है और न ही सत्य के लिए लालसा है तो वह खतरे में होगा। यदि तुम केवल उसी कार्य और वचनों के प्रति समर्पण करते हो जो सरल हैं, और किसी गहरे प्रबलता वाले कार्य या वचन को स्वीकार करने में अक्षम हो, तो तुम उसके समान हो जो पुराने मार्गों को थामे हुए है और पवित्र आत्मा के कार्य के साथ समान गति से नहीं चल सकता है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, जो सच्चे हृदय से परमेश्वर की आज्ञा का पालन करते हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर द्वारा हासिल किए जाएँगे

उत्तर यहाँ दें