ऑनलाइन बैठक

मेन्‍यू

9 बाइबल के महान क्लेश वाले पद आपको परमेश्वर के मानव जाति को बचाने के अच्छे इरादों को जानने में मदद करते है

अब आपदाएं दुनिया भर में अक्सर हो रही हैं और बड़े और बड़े पैमाने पर बढ़ रही हैं। बाइबिल में की महानक्लेश की भविष्यवाणी जल्द ही आ पड़ेगी | हमें आपदाओं के पीछे की परमेश्वर की इच्छा को कैसे समझे ताकि हमारे पास आगे बढ़ने का एक सही रास्ता हो? निम्नलिखित सामग्री आपकी मदद करेगी।

"क्योंकि उस समय ऐसा भारी क्लेश होगा, जैसा जगत के आरम्भ से न अब तक हुआ, और न कभी होगा" (मत्ती 24:21)।

"क्योंकि जाति पर जाति, और राज्य पर राज्य चढ़ाई करेगा। और हर कहीं भूकम्प होंगे, और अकाल पड़ेंगे। यह तो पीड़ाओं का आरम्भ ही होगा" (मरकुस 13:8)।

"उन दिनों के क्लेश के बाद तुरन्त सूर्य अंधियारा हो जाएगा, और चाँद का प्रकाश जाता रहेगा, और तारे आकाश से गिर पड़ेंगे और आकाश की शक्तियाँ हिलाई जाएँगी" (मत्ती 24:29)।

"फिर मैंने स्वर्ग में एक और बड़ा और अद्भुत चिन्ह देखा, अर्थात् सात स्वर्गदूत जिनके पास सातों अन्तिम विपत्तियाँ थीं, क्योंकि उनके हो जाने पर परमेश्‍वर के प्रकोप का अन्त है" (प्रकाशितवाक्य 15:1)।

"फिर मैंने मन्दिर में किसी को ऊँचे शब्द से उन सातों स्वर्गदूतों से यह कहते सुना, 'जाओ, परमेश्‍वर के प्रकोप के सातों कटोरों को पृथ्वी पर उण्डेल दो'" (प्रकाशितवाक्य 16:1)।

"तब स्वर्गदूत ने धूपदान लेकर उसमें वेदी की आग भरी, और पृथ्वी पर डाल दी, और गर्जन और शब्द और बिजलियाँ और भूकम्प होने लगे" (प्रकाशितवाक्य 8:5)।

"और परमेश्‍वर का जो मन्दिर स्वर्ग में है, वह खोला गया, और उसके मन्दिर में उसकी वाचा का सन्दूक दिखाई दिया, बिजलियाँ, शब्द, गर्जन और भूकम्प हुए, और बड़े ओले पड़े" (प्रकाशितवाक्य 11:19)।

"फिर बिजलियाँ, और शब्द, और गर्जन हुए, और एक ऐसा बड़ा भूकम्प हुआ, कि जब से मनुष्य की उत्पत्ति पृथ्वी पर हुई, तब से ऐसा बड़ा भूकम्प कभी न हुआ था" (प्रकाशितवाक्य 16:18)।

"तूने मेरे धीरज के वचन को थामा है, इसलिए मैं भी तुझे परीक्षा के उस समय बचा रखूँगा, जो पृथ्वी पर रहनेवालों के परखने के लिये सारे संसार पर आनेवाला है" (प्रकाशितवाक्य 3:10)।

9 बाइबल के महान क्लेश वाले पद

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:

"एक के बाद एक सभी तरह की आपदाएँ आ पड़ेंगी; सभी राष्ट्र और स्थान आपदाओं का सामना करेंगे : हर जगह महामारी, अकाल, बाढ़, सूखा और भूकंप आएँगे। ये आपदाएँ सिर्फ एक-दो जगहों पर ही नहीं आएँगी, न ही वे एक-दो दिनों में समाप्त होंगी, बल्कि इसके बजाय वे बड़े से बड़े क्षेत्र तक फैल जाएँगी, और अधिकाधिक गंभीर होती जाएँगी। इस दौरान, एक के बाद एक सभी प्रकार की कीट-जनित महामारियाँ उत्पन्न होंगी, और हर जगह नरभक्षण की घटनाएँ होंगी। सभी राष्ट्रों और लोगों पर यह मेरा न्याय है। मेरे पुत्रो! तुम लोगों को आपदाओं की पीड़ा या कठिनाई नहीं भुगतनी चाहिए। मैं चाहता हूँ कि तुम लोग शीघ्र वयस्क हो जाओ और जितनी जल्दी हो सके, मेरे कंधों का बोझ उठा लो। तुम लोग मेरी इच्छा क्यों नहीं समझते? आगे का काम अधिकाधिक दुरूह होता जाएगा। क्या तुम लोग इतने निष्ठुर हो कि सारा काम मेरे हाथों में रहने देकर, मुझे अकेले इतना कठिन काम करने के लिए छोड़ रहे हो? मैं स्पष्ट कहता हूँ : जिनके जीवन परिपक्व होंगे, वे शरण में लिए जाएँगे और वे पीड़ा या कठिनाई का सामना नहीं करेंगे; जिनके जीवन परिपक्व नहीं होंगे, उन्हें पीड़ा और नुकसान भुगतना पड़ेगा। मेरे वचन पर्याप्त स्पष्ट हैं, है न?"

"दुनिया के सभी राष्ट्रों और सभी स्थानों में भूकंप, अकाल, महामारियाँ और सभी प्रकार की आपदाएँ बार-बार होती हैं। जैसे-जैसे मैं सभी राष्ट्रों और सभी जगहों पर अपना महान कार्य करता हूँ, ये आपदाएँ दुनिया के निर्माण के बाद के किसी भी अन्य समय की तुलना में अधिक गंभीर रूप से उभरेंगी। यह सभी लोगों के बारे में मेरे न्याय की शुरुआत है; किंतु मेरे पुत्र आराम कर सकते हैं; तुम लोगों पर कोई आपदा नहीं पड़ेगी और मैं तुम लोगों की रक्षा करूँगा (जिसका अर्थ है कि तुम लोग बाद में शरीर में रहोगे, किंतु देह में नहीं, इसलिए तुम किसी भी आपदा की पीड़ा को नहीं भुगतोगे)। तुम लोग बस मेरे साथ राजाओं के रूप में शासन करोगे और ब्रह्मांड और पृथ्वी के अंतिम छोर तक हमेशा मेरे साथ अच्छे आशीषों का आनंद लेते हुए सभी राष्ट्रों और सभी लोगों का न्याय करोगे। ये सभी वचन पूरे होंगे और उन्हें शीघ्र ही तुम लोगों की आँखों के सामने प्राप्त कर लिया जाएगा। मैं न तो एक घंटा की देरी करता हूँ न एक दिन की, मैं चीजों को अविश्वसनीय रूप से शीघ्रता से करता हूँ। चिंतित या व्याकुल मत हो और जो आशीष मैं तुम्हें देता हूँ वह कुछ ऐसा है, जिसे कोई तुमसे दूर नहीं कर सकता है—यह मेरा प्रशासनिक आदेश है। मेरे कर्मों की वजह से सभी लोग मेरे प्रति आज्ञाकारी होंगे; वे जयजयकार ही जयजयकार करेंगे, बल्कि इससे भी अधिक खुशी से छलाँग पर छलाँग लगाएँगे।"

"दुनिया के विशाल विस्तार में अनगिनत परिवर्तन हो चुके हैं, बार-बार गाद भरने से महासागर मैदानों में बदल रहे हैं, खेत बाढ़ से महासागरों में बदल रहे हैं। सिवाय उसके जो ब्रह्मांड में सभी चीज़ों पर शासन करता है, कोई भी इस मानव-जाति की अगुआई और मार्गदर्शन करने में समर्थ नहीं है। कोई ऐसा पराक्रमी नहीं है, जो इस मानव-जाति के लिए श्रम या तैयारी कर सकता हो, और ऐसा तो कोई भी नहीं है, जो इस मानव-जाति को प्रकाश की मंजिल की ओर ले जा सके और इसे सांसारिक अन्यायों से मुक्त कर सके। परमेश्वर मनुष्य-जाति के भविष्य पर विलाप करता है, वह मनुष्य-जाति के पतन पर शोक करता है, और उसे पीड़ा होती है कि मनुष्य-जाति, कदम-दर-कदम, क्षय और ऐसे मार्ग की ओर बढ़ रही है, जहाँ से वापसी संभव नहीं है। ऐसी मनुष्य-जाति, जिसने परमेश्वर का हृदय तोड़ दिया है और दुष्ट की तलाश करने के लिए उसका त्याग कर दिया है : क्या किसी ने कभी उस दिशा पर विचार किया है, जिस ओर ऐसी मनुष्य-जाति जा रही है? ठीक इसी कारण से कोई परमेश्वर के कोप को महसूस नहीं करता, कोई परमेश्वर को खुश करने का तरीका नहीं खोजता या परमेश्वर के करीब आने की कोशिश नहीं करता, और इससे भी अधिक, कोई परमेश्वर के दुःख और दर्द को समझने की कोशिश नहीं करता। परमेश्वर की वाणी सुनने के बाद भी मनुष्य अपने रास्ते पर चलता रहता है, परमेश्वर से दूर जाने, परमेश्वर के अनुग्रह और देखभाल से बचने, उसके सत्य से कतराने में लगा रहता है, अपने आप को परमेश्वर के दुश्मन, शैतान को बेचना पसंद करता है। और किसने इस बात पर कोई विचार किया है—क्या मनुष्य को अपनी जिदपर अड़े रहना चाहिए—कि परमेश्वर इस मानव-जाति के साथ कैसा व्यवहार करेगा, जिसने उसे मुड़कर एक नज़र देखे बिना ही खारिज कर दिया? कोई नहीं जानता कि परमेश्वर के बार-बार के अनुस्मारकों और आग्रहों का कारण यह है कि उसने अपने हाथों में एक अभूतपूर्व आपदा तैयार की है, एक ऐसी आपदा, जो मनुष्य की देह और आत्मा के लिए असहनीय होगी। यह आपदा केवल देह का ही नहीं, बल्कि आत्मा का भी दंड है। तुम्हें यह जानने की आवश्यकता है : जब परमेश्वर की योजना निष्फल होती है और जब उसके अनुस्मारकों और आग्रहों का कोई उत्तर नहीं मिलता, तो वह किस प्रकार का क्रोध प्रकट करेगा? यह ऐसा होगा, जिसे पहले किसी सृजित प्राणी ने कभी अनुभव किया या सुना नहीं होगा। और इसलिए मैं कहता हूँ, यह आपदा बेमिसाल है और कभी दोहराई नहीं जाएगी। क्योंकि परमेश्वर की योजना मनुष्य-जाति का केवल एक बार सृजन करने और उसे केवल एक बार बचाने की है। यह पहली बार है, और यही अंतिम बार भी है। इसलिए, जिन श्रमसाध्य इरादों और उत्साहपूर्ण प्रत्याशा से परमेश्वर इस बार इंसान को बचाता है, उसे कोई नहीं समझ सकता।"

विषय के अनुसार बाइबल के पद” और “बाइबल अध्ययन” खंडों में दैनिक भक्ति संसाधनों का उपयोग करने के लिए आपका स्वागत है, ये आपके आध्यात्मिक जीवन को समृद्ध कर सकते हैं।

उत्तर यहाँ दें