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परमेश्वर के दैनिक वचन | "जो सच्चे हृदय से परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं वे निश्चित रूप से परमेश्वर के द्वारा ग्रहण किए जाएँगे" | अंश 486

510 21/04/2021

परमेश्वर के द्वारा किया गया कार्य अलग-अलग अवधियों में भिन्न होता है। यदि तुम एक चरण में बड़ी आज्ञाकारिता दिखाते हो, मगर अगले चरण में कम दिखाते हो या कुछ भी नहीं दिखाते हो, तो परमेश्वर तुम्हें त्याग देगा। जब परमेश्वर यह कदम उठाता है तब यदि तुम परमेश्वर के साथ समान गति से चलते हो, तो जब वह अगला कदम उठाता है तब तुम्हें समान गति से अवश्य चलते रहना चाहिए। केवल तभी तुम ऐसे एक हो जो पवित्र आत्मा के प्रति आज्ञाकारी है। चूँकि तुम परमेश्वर पर विश्वास करते हो, इसलिए तुम्हें अपनी आज्ञाकारिता में अचल अवश्य बने रहना चाहिए। तुम यूँ ही जब अच्छा लगे तभी आज्ञा नहीं मान सकते हो और जब अच्छा न लगे तब अवज्ञा नहीं कर सकते हो। इस प्रकार की अवज्ञा को परमेश्वर का अनुमोदन नहीं मिलता है। यदि तुम उस नए कार्य के साथ तालमेल नहीं बनाए रख सकते हो, जिसके बारे में मैं संगति करता हूँ, और पूर्व की बातों को लगातार धारण नहीं कर सकते हो, तो तुम्हारे जीवन में प्रगति कैसे हो सकती है? परमेश्वर का कार्य, अपने वचनों के माध्यम से तुम्हारा भरण-पोषण करना है। जब तुम उसके वचनों का पालन करते हो और उन्हें स्वीकार करते हो, तब पवित्र आत्मा निश्चित रूप से तुम में कार्य करेगा। पवित्र आत्मा बिलकुल उसी तरह कार्य करता है जिस तरह से मैं कहता हूँ। जैसा मैंने कहा है वैसा ही करो, और पवित्र आत्मा शीघ्रता से तुम में कार्य करेगा। मैं तुम लोगों के देखने के लिए और तुम लोगों को वर्तमान समय के प्रकाश में लाने के लिए एक नया प्रकाश छोड़ता हूँ। जब तुम इस प्रकाश में चलोगे, तो पवित्र आत्मा तुरन्त ही तुम में कार्य करेगा। कुछ लोग हैं जो अड़ियल हो सकते हैं और कहेंगे, "जैसा तुम कहते हो मैं मात्र वैसा नहीं करूँगा।" तब मैं तुम्हें बताता हूँ कि तुम अब सड़क के अंत तक आ गए हो। तुम पूरी तरह से सूख गए हो, और तुममें और जीवन नहीं बचा है। इसलिए, अपने स्वभाव के रूपान्तरण का अनुभव करने में, वर्तमान प्रकाश के साथ तालमेल बिठाए रखना बहुत ही ज़्यादा निर्णायक है। पवित्र आत्मा न केवल उन खास मनुष्यों में कार्य करता है जो परमेश्वर के द्वारा उपयोग किए जाते हैं, बल्कि कलीसिया में कहीं ज़्यादा कार्य करता है। वह किसी में भी कार्य कर रहा हो सकता है। वह वर्तमान में तुम में कार्य कर सकता है, और जब तुम उसका अनुभव कर लो, तो उसके बाद वह किसी और में कार्य कर सकता है। अनुसरण करने में शीघ्रता करो; जितना अधिक घनिष्ठता से तुम वर्तमान प्रकाश का अनुसरण करते हो, उतना ही अधिक तुम्हारा जीवन परिपक्व हो सकता है और उन्नति कर सकता है। इस बात की परवाह किए बिना कि वह किस ढंग का मनुष्य है, जब तक उसमें पवित्र आत्मा कार्य करता है, अनुसरण करना सुनिश्चित करो। अपने स्वयं के अनुभवों के माध्यम से उसके अनुभवों को लो, और तुम्हें और भी अधिक उच्चतर चीजें प्राप्त होंगी। ऐसा करने से तुम तेजी से प्रगति करोगे। यह मनुष्य के लिए सिद्धता का मार्ग है और ऐसा मार्ग है जिसके माध्यम से जीवन बढ़ता है। सिद्ध बनाए जाने के मार्ग तक पवित्र आत्मा के कार्य के प्रति तुम्हारी आज्ञाकारिता के माध्यम से पहुँचा जाता है। तुम नहीं जानते हो कि तुम्हें सिद्ध बनाने के लिए परमेश्वर किस प्रकार के व्यक्ति के जरिए कार्य करेगा, न ही यह जानते हो कि किस व्यक्ति, घटना, चीज़ के जरिए वह तुम्हें सम्पत्ति में प्रवेश करने और तुम्हें कुछ परिज्ञान प्राप्त करने के योग्य बनाएगा। यदि तुम इस सही पथ पर चलने में सक्षम हो, तो यह दिखता है कि परमेश्वर के द्वारा तुम्हें सिद्ध बनाए जाने की बड़ी आशा है। यदि तुम ऐसा नहीं कर पाते हो, तो यह दिखता है कि तुम्हारा भविष्य सूना और प्रकाश से रहित है। एक बार जब तुम सही पथ पर आ जाते हो, तो तुम्हें सभी चीज़ों में प्रकाशन प्राप्त होगा। इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता है कि पवित्र आत्मा दूसरों को क्या प्रकट कर सकता है, यदि तुम उनके ज्ञान के आधार पर अपने स्वयं के ऊपर चीज़ों का अनुभव करने के लिए आगे बढ़ते हो, तो यह अनुभव तुम्हारे जीवन का हिस्सा बन जाएगा, और इस अनुभव से तुम दूसरों को आपूर्ति करने में समर्थ हो जाओगे। जो वचनों को रटकर दूसरों को आपूर्ति करते हैं वे ऐसे लोग हैं जिन्होंने कोई अनुभव नहीं लिया है; तुम्हें अपने वास्तविक अनुभव और ज्ञान के बारे में बोलना शुरू करने से पहले, दूसरों की प्रबुद्धता और रोशनी के माध्यम से, अभ्यास करने के एक तरीके को ढूँढ़ना सीखना होगा। यह तुम्हारे स्वयं के जीवन के लिए अधिक लाभकारी होगा। जो कुछ भी परमेश्वर से आता है उसका पालन करते हुए, तुम्हें इस तरह से अनुभव करना चाहिए। सभी चीज़ों में तुम्हें परमेश्वर की इच्छा को खोजना चाहिए और सभी चीज़ों में सबक पढ़ना चाहिए, ताकि तुम्हारा जीवन परिपक्व हो और उन्नति कर सके। इस प्रकार का अभ्यास शीघ्रता से प्रगति प्रदान करता है।

पवित्र आत्मा तुम्हारे व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से तुम्हें प्रबुद्ध करता है और तुम्हारे विश्वास के माध्यम से तुम्हें सिद्ध बनाता है। क्या तुम सचमुच में सिद्ध बनाए जाना चाहते हो? यदि तुम सचमुच में परमेश्वर के द्वारा सिद्ध बनाए जाना चाहते हो, तो तुम्हारे पास अपनी देह को एक ओर रखने का साहस होगा, और तुम परमेश्वर के वचनों को पूरा करने में समर्थ होगे तथा निष्क्रिय और कमज़ोर नहीं होगे। जो कुछ भी परमेश्वर से आता है तुम उसका पालन करने में समर्थ होगे, और तुम्हारे सभी कार्यकलाप, चाहे सार्वजनिक रूप से किए गए हों या व्यक्तिगत रूप से, परमेश्वर के सामने प्रस्तुत करने योग्य होंगे। यदि तुम एक ईमानदार इंसान हो और सभी चीज़ों में सत्य का अभ्यास करते हो, और तुम सिद्ध बनाए जाओगे। ऐसे धोखेबाज लोग जो दूसरों के चेहरे के सामने एक तरह से कार्य करते हैं और उनकी पीठ के पीछे दूसरी तरह से कार्य करते हैं वे सिद्ध बनाए जाने के इच्छुक नहीं हैं। वे सब बरबादी और विनाश के पुत्र हैं; वे परमेश्वर से नहीं बल्कि शैतान से संबंधित हैं। वे उस प्रकार के लोग नहीं हैं जिन्हें परमेश्वर के द्वारा चुना गया है! यदि तुम्हारे कार्यों और व्यवहार को परमेश्वर के सामने प्रस्तुत नहीं किए जा सकता है या परमेश्वर के आत्मा के द्वारा नहीं देखा जा सकता है, तो यह इस बात का प्रमाण है कि तुम्हारे साथ कुछ गड़बड़ है। यदि तुम परमेश्वर के न्याय और ताड़ना को स्वीकार करते हो, और अपने स्वभाव के रूपान्तरण पर महत्व देते हो, केवल तभी तुम सिद्ध बनाए जाने के पथ पर आने में समर्थ होगे। यदि तुम सचमुच में परमेश्वर के द्वारा सिद्ध बनाए जाने और परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने के इच्छुक हो, तो तुम्हें, शिकायत का एक भी शब्द कहे बिना, परमेश्वर के कार्य का मूल्यांकन या आँकलन करने का ख़्याल किए बिना, परमेश्वर के सभी कार्यों का पालन करना चाहिए। परमेश्वर के द्वारा सिद्ध बनाए जाने के लिए ये अल्पतम अपेक्षाएँ हैं। जो परमेश्वर के द्वारा सिद्ध बनाए जाने की तलाश करते हैं उनके लिए आवश्यक अपेक्षा यह हैः सभी चीज़ों को ऐसे हृदय से करो जो परमेश्वर से प्यार करता हो। "चीज़ों को ऐसे हृदय से करो जो परमेश्वर से प्यार करता हो" का क्या अर्थ है? इसका अर्थ है कि तुम्हारे सारे कार्यों और आचरण को परमेश्वर के सामने प्रस्तुत किया जा सकता है। चूँकि तुम सच्चे इरादों को धारण करते हो, इसलिए चाहे तुम्हारे कार्य सही हों या गलत, तुम उन्हें परमेश्वर या अपने भाईयों या बहनों को दिखाने से नहीं डरते हो; तुम परमेश्वर के सामने शपथ खाने का साहस करते हो। ताकि तुम्हारा हर इरादा, सोच, और विचार परमेश्वर के सामने जाँच किए जाने के लिए उचित हो: यदि तुम इस प्रकार से अभ्यास और प्रवेश करते हो, तो जीवन में तुम्हारी प्रगति शीघ्र होगी।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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