ऑनलाइन बैठक

मेन्‍यू

पैसे के बंधनों को तोड़कर मैंने सबसे सार्थक जीवन पाया

मैंने पैसे कमाने के लिए अत्यधिक काम किया ताकि मैं एक सम्पन्न जीवन जी सकूँ

जब मैंने शादी की थी तब मैं और मेरे पति, बहुत गरीब थे जिस कारण अक्सर दूसरे लोग हमसे बेरूखी से पेश आते थे। तबसे मैंने अधिक पैसे कमाने का मन बना लिया ताकि हम जल्द ही एक अपार्टमेंट बिल्डिंग में रहने के लिए जा सकें और उन लोगों पर प्रभाव जमा सकें जिन्होंने हमें नीचा दिखाया था। इसलिए मैं शहर के बाहर एक ऊन प्रसंस्करण कारखाने में काम करने लगी। मैं ड्रम से ऊन निकालकर उनको साफ करने का काम किया करती थी। चूँकि मशीनें बहुत तेज़ चलती थीं, इसलिए मेरा तेज़ी से हाथ चलाना ज़रुरी था नहीं तो मैं मशीन में खींची जा सकती थी और मर सकती थी। अधिक पैसा कमाने के लिए, मैंने इस जान के खतरे का जोखिम लिया और अतिरिक्त शिफ्ट में काम करना जारी रखा। आम तौर पर, समय बचाने के लिए और अधिक काम करने के लिए, मैं काम करते-करते ही खाना खा लेती थी, मैं रात में भी केवल तीन या चार घंटे सोती थी। एक शाम जब मैं एक अतिरिक्त शिफ्ट में काम कर रही थी, तब मुझे नींद आ गयी, जबकि मशीन अभी भी चल रही थी। सौभाग्य से, मेरे पति ने मुझे तब देख लिया जब वे अपनी शिफ्ट को समाप्त कर रहे थे और इस तरह दुर्घटना टल गयी।

ईसाई अपने घर के रास्ते पर हैं

हालाँकि मुझे कभी-कभी थकावट महसूस होती थी, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत से कमाए पैसों को देखते ही मेरे दिल को आराम मिल जाता था। मैंने हमेशा सोचा था: "पैसा सब कुछ नहीं है, लेकिन इसके बिना, आप कुछ नहीं कर सकते," और "दुनिया पैसों से चलती है।" पैसा कमाने से अधिक कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं था। जब तक मेरे पास पैसा था, तब तक मैं दूसरों से आदर पा सकती थी और वैसे जी सकती थी जैसे मैं चाहती थी; मैं यह हासिल करने के लिए कितना भी कष्ट सहने को तैयार थी। इस तरह, सात साल पलक झपकते बीत गये और हम कई हजार युआन बचाने में सफल रहे। हमारे बेटे ने भी शादी कर ली, उसका अपना एक बेटा था, और हमारे दिन खुशनुमा थे। हालांकि, कई बार, मन में अब भी एक टीस महसूस होती थी। जब मैं अन्य लोगों को बड़े शहर में मकान और लक्जरी कार खरीदते देखती थी, तो मैं अधिक पैसा कमाने के लिए कड़ी मेहनत करते रहना चाहती थी, ताकि एक बड़ा घर और लक्जरी कार ले सकूँ।

लम्बे समय की थकान मुझे बीमार कर देती है

जब अपने आदर्श जीवन को पाने के लिए मैं कड़ी मेहनत और संघर्ष कर रही थी, तब मैं विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हो गयी। इतने लंबे समय तक काम करने से मुझे कई बीमारियां हो गयीं, जैसे कि मेरी पीठ की मांसपेशियों में गंभीर खिंचाव, कंधे के जोड़ों में जकड़न और दर्द (पेरीआर्थराइटिस), गर्दन की हड्डी की समस्या (सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस) और दिमाग में खून पहुँचने की समस्या (सेरेब्रल वैसोस्पास्म)। अगर मैं बहुत देर तक बैठ जाती थी, तो मेरी पीठ में असहनीय रूप से दर्द होता था, दर्द को कम करने के लिए काम के वक्त खड़े रहने के अलावा मेरे पास कोई चारा नहीं था; स्पोंडिलोसिस के कारण मेरी गर्दन इतनी जकड़ गई थी कि सिर झुकाना भी बहुत कष्टकारी हो गया था, और मैं अक्सर चक्कर और कान में आवाज़ (टिनिटस) होने से पीड़ित रहती थी। हर रात अतिरिक्त शिफ्ट में काम करने से मुझे एक प्रकार की मौसमी बीमारी विकसित हो गयी थी जिसे सेरेब्रल वैसोस्पास्म कहा जाता है। जब भी यह बढ़ जाता था, तो दर्द के कारण मेरे लिए सोना मुश्किल हो जाता था, मैं बस अपना सिर पकड़ कर सारी रात रोती रहती थी, अपने बालों में कंघी करने की भी हिम्मत नहीं करती थी। जब और दर्द सहना मुश्किल हो गया, तो मैं अस्पताल गयी और कुछ दर्द निवारक दवाएँ लीं। डॉक्टर ने मुझे आगाह करते हुए कहा, "यह बीमारी रात में अतिरिक्त शिफ्ट में काम करने से आयी है। आपको अधिक आराम करना चाहिए।" लेकिन मैंने डॉक्टर की सलाह सुनने से इनकार कर दिया ताकि यह पैसे कमाने की मेरी क्षमता में बाधा न बने, मैं अपना काम करती रही और अपनी सारी बीमारियां सहती रही। अंत में, मेरे कंधे का पेरिआर्थ्राइटिस इतना खराब हो गया कि मैं अपना दाहिना हाथ चलाने में अशक्त हो गयी और मुझे अपनी नौकरी छोड़ने के लिए मुझे मजबूर होना पड़ा। फिर भी मैंने मन में सोचा: मैं बहुत सारे पैसे नहीं कमा सकती तो क्या, कम से कम मैं कुछ पैसे तो कमा ही सकती हूँ। इसलिए, मैंने अपने लिए अधिक आरादायकम काम खोजा और काम करना जारी रखा। जैसे-जैसे समय बीतता गया, मेरी बीमारी और बदतर होती गई। अस्पताल में एक परीक्षा के बाद, डॉक्टर ने कहा, "आपको यह बीमारी इतने लंबे समय से है कि इसका इलाज करने का उचित समय बीत चुका है। अगर हम अभी इसका इलाज करते भी हैं, तो भी स्वास्थ्यलाभ आपके लिए आसान नहीं होगा। हम केवल आपका इलाज कर सकते हैं, देखते हैं कि यह कैसा रहता है। आपको हर दूसरे दिन फिजियोथेरेपी के लिए अस्पताल आना होगा।"

लगभग 20 दिनों के उपचार के बाद, मेरे बेटे ने गंभीर चेहरे के साथ, रूखे स्वर में कहा, "आपको इतनी सारी बीमारियाँ हैं कि, आप हमारे सारे पैसे खर्च कर दे रही हैं।" मेरे पति ने भी शिकायत की और कहा, "तुम पैसे कमा तो सकती नहीं, पर खर्च किये जा रही हो।" उनकी रूखी फटकार सुनकर मुझे बड़ी ठेस लगी, मैं आहत होकर फूट-फूटकर रोने लगी, मुझे इतना बुरा लगा कि जैसे मेरा दिल टूट गया हो। उस शाम, मैं बिस्तर पर बैठ कर सोच रही थी कि कैसे मैंने अपना अधिकांश जीवन पैसा कमाने के लिए मेहनत करने में बिताया है। मैंने सोचा था कि अगर मेरे पास पैसा होगा तो मैं एक खुशहाल जीवन जी सकूंगी, लेकिन अंत में, भले ही मैंने कुछ पैसे कमाए थे, लेकिन मैंने अपने शरीर को बर्बाद कर दिया था और अपनी बीमारियों के कारण हर दिन असहनीय पीड़ा से परेशान हो रही थी। न केवल मैं पैसों से पाए सुखी जीवन का आनंद नहीं ले पा रही थी, बल्कि मुझे अपनी बीमारियों के इलाज के लिए अपने ही परिवार द्वारा नफरत और अस्वीकृति भी मिल रही थी। अपने दर्द और निराशा में, मैंने एक गहरी आह भरी और सोचा: आखिर मैं किस लिए जी रही हूँ? ऐसे जीवन का क्या मतलब है?

भ्रम और पीड़ा की स्थिति में परमेश्वर मुझे सांत्वना देने आते हैं

जब मैं सबसे अधिक दर्द में थी, तो मैंने परमेश्वर के राज्य के सुसमाचार के बारे में सुना। भाई-बहनों द्वारा दी गई संगति के माध्यम से, मुझे समझ में आया कि परमेश्वर एक सच्चा परमेश्वर है जिसने सभी चीजों को बनाया है, हमारा सारा जीवन परमेश्वर से आता है, और केवल परमेश्वर ही हमें बचा सकता है, केवल परमेश्वर ही हमें सबसे अधिक प्रेम करता है। मुझे यह भी समझ में आया कि इतनी सारी बीमारियों से पीड़ित होने और इस तरह के दर्दनाक जीवन जीने का कारण यह है कि हमने परमेश्वर को दूर कर दिया है और हम शैतान द्वारा भ्रष्ट कर दिये गये हैं। केवल परमेश्वर के सुसमाचार को स्वीकार करने और उसके वचनों को सुनने से ही हम परमेश्वर की देखभाल और सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं, शांति और आनंद का अनुभव कर सकते हैं। मैंने परमेश्वर के इन वचनों को पढ़ा: "सर्वशक्तिमान ने हुरी तरह से पीड़ित इन लोगों पर दया की है; साथ ही, वह उन लोगों से तंग आ गया है, जिनमें चेतना की कमी है, क्योंकि उसे मनुष्य से जवाब पाने के लिए बहुत लंबा इंतजार करना पड़ा है। वह तुम्हारे हृदय की, तुम्हारी आत्मा की तलाश करना चाहता है, तुम्हें पानी और भोजन देना और तुम्हें जगाना चाहता है, ताकि अब तुम भूखे और प्यासे न रहो। जब तुम थक जाओ और तुम्हें इस दुनिया की बेरंग उजड़ेपन का कुछ-कुछ अहसास होने लगे, तो तुम हारना मत, रोना मत। द्रष्टा, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, किसी भी समय तुम्हारे आगमन को गले लगा लेगा।" परमेश्वर के प्रत्येक वचन ने मेरे दिल को स्नेह से भर दिया, और मैं गहरी सोच में पड़ गयी। जब मैंने सारी आशा खो दी, जीवित रहने की हिम्मत खो दी, तब परमेश्वर मेरा दर्द जानता था, उसने भाई-बहनों के माध्यम से मुझे सुसमाचार सुनाया और मेरा इंतजार किया कि मैं उसके सामने लौट आऊं; जब मेरे अपने परिवार ने मुझसे मुँह मोड़ लिया, मेरे रिश्तेदारों ने मुझे अनदेखा कर दिया, तब भी परमेश्वर ने मुझे नहीं छोड़ा, बल्कि उसने अपने वचनों से मेरे दिल के दरवाजे पर दस्तक दी, जिससे मैं अपने लिए परमेश्वर के प्रेम की गहरी सराहना करने लगी। यह सोचते ही कृतज्ञता के आँसू मेरी आँखों से फूट पड़े। मुझे एक अनाथ की तरह महसूस हुआ जो अपनी माँ के आलिंगन में लौट आया हो; मेरा दिल प्यार और स्नेह से भर गया था, और अचानक मुझे जीने की हिम्मत मिली।

बाद में, मैंने कलीसियाई जीवन में शामिल होना शुरू कर दिया। हम भाई-बहनों ने साथ-साथ, परमेश्वर के वचनों को पढ़ा, हमारे व्यक्तिगत अनुभवों के बारे में संगति की, और हमने एक दूसरे के प्रति प्यार और समर्थन दिखाया। मेरा दिल अधिक से अधिक मुक्त महसूस करने लगा, और मैं अपनी बीमारियों के बारे में सब भूल गयी।

परमेश्वर के वचनों के प्रकाशन से, मुझे अपनी सारी पीड़ा की जड़ मिली

ईश्वर का वचन पढ़ते हुए ईसाई

एक दिन, मैंने परमेश्वर के इन वचनों को पढ़ा: "'पैसा दुनिया को नचाता है' यह शैतान का एक फ़लसफ़ा है और यह संपूर्ण मानवजाति में, हर मानव-समाज में प्रचलित है। तुम कह सकते हो कि यह एक रुझान है, क्योंकि यह हर एक व्यक्ति के हृदय में बैठा दिया गया है। ... तो शैतान द्वारा मनुष्य को भ्रष्ट करने के लिए इस रुझान का उपयोग किए जाने के बाद, यह उनमें कैसे अभिव्यक्त होता है? क्या तुम लोगों को लगता है कि बिना पैसे के तुम लोग इस दुनिया में जीवित नहीं रह सकते, कि पैसे के बिना एक दिन जीना भी असंभव होगा? लोगों की हैसियत इस बात पर निर्भर करती है कि उनके पास कितना पैसा है, और वे उतना ही सम्मान पाते हैं। गरीबों की कमर शर्म से झुक जाती है, जबकि धनी अपनी ऊँची हैसियत का मज़ा लेते हैं। वे ऊँचे और गर्व से खड़े होते हैं, ज़ोर से बोलते हैं और अंहकार से जीते हैं। यह कहावत और रुझान लोगों के लिए क्या लाता है? क्या यह सच नहीं है कि पैसे की खोज में लोग कुछ भी बलिदान कर सकते हैं? क्या अधिक पैसे की खोज में कई लोग अपनी गरिमा और ईमान का बलिदान नहीं कर देते? ... क्या मनुष्य को इस हद तक भ्रष्ट करने के लिए इस विधि और इस कहावत का उपयोग करने के कारण शैतान कुटिल नहीं है? क्या यह दुर्भावनापूर्ण चाल नहीं है? जैसे-जैसे तुम इस लोकप्रिय कहावत का विरोध करने से लेकर अंततः इसे सत्य के रूप में स्वीकार करने तक की प्रगति करते हो, तुम्हारा हृदय पूरी तरह से शैतान के चंगुल में फँस जाता है, और इस तरह तुम अनजाने में इस कहावत के अनुसार जीने लगते हो।"

परमेश्वर के वचन इतने सच्चे थे और वे मेरा सच्चा चित्रण थे। हाल के वर्षों को याद कर, मुझे एहसास हुआ कि मैं, "दुनिया पैसों पर चलती है" और "पैसा सब कुछ नहीं है, लेकिन इसके बिना, आप कुछ भी नहीं कर सकते", के शैतानी दर्शनों के अनुसार जीती थी, मैंने पैसे को हर चीज़ से बढ़कर माना था, मुझे विश्वास था कि बहुत सारे पैसे कमाने के बाद, मैं फिर विलासिता भरी ज़िंदगी का आनंद ले सकती हूँ, दूसरों से सम्मान पा सकती हूँ और कोई मुझे नीचा नहीं दिखा सकता है। इस कारण से, मैंने हर दिन एक पैसा बनाने वाली मशीन की तरह काम किया, मैंने हर दिन, हर रात सख्त मेहनत की और अपने स्वास्थ्य पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया। यहाँ तक कि जब मैं विभिन्न बीमारियों से घिर गयी थी, तब भी मैं पैसा बनाने का कोई भी मौका चूकने को तैयार नहीं थी। अंत में, मेरे पास कुछ पैसे हो गये, मेरे भौतिक जीवन में सुधार हो गया, लेकिन मेरा शरीर बर्बाद हो गया। मैं बीमारियों से पीड़ित थी लेकिन मेरे परिवार को मुझसे कोई सहानुभूति नहीं थी, और मैं असहनीय दर्द में जी रही थी। मैंने देखा कि मैं "सबसे पहले पैसा", इस वाक्यांश द्वारा नियंत्रित की जा रही थी, इसने मुझे बहुत नुकसान पहुंचाया था, मैं अपने जीवन को पैसे की खातिर जोखिम में डालने के लिए तैयार थी और कोई भी कीमत चुकाने में मैंने संकोच नहीं किया था—मैं पूरी तरह से पैसों की गुलाम बन गयी थी। मैंने तब सोचा कि कितने लोग पैसे कमाने के लिए बीमार हो जाते हैं, जिन्हें साल भर दवा लेनी पड़ती है, जो अपने जीवन का आधा भाग पैसा कमाने के लिए कड़ी मेहनत में लगा देते हैं और फिर बाकी का जीवन उस पैसे को अपनी विभिन्न बिमारियों के इलाज में खर्च करते हैं; इतने सारे लोग अत्यधिक काम करते हैं और पैसा कमाने के लिए अपनी जान गंवा देते हैं...। यह सब शैतान के धोखे और मनुष्य के भ्रष्टाचार का परिणाम है। शैतान इन विचारों का उपयोग लोगों के दिलों पर नियंत्रण करने और लोगों को अपना सारा समय और ऊर्जा पैसा कमाने में लगाने को मजबूर करने के लिए कर रहा था, इस हद तक कि हम अपने स्वास्थ्य और जीवन का बलिदान करने के लिए भी तैयार हैं। बोझ ढोने वाले जानवरों की तरह, हम उसके भ्रष्टाचार के कहर के तहत जीते हैं। आखिरकार, हम सभी दर्द में जी रहे हैं। शैतान के इरादे वाकई बहुत बुरे और दुर्भावनापूर्ण थे! और इसलिए, मैंने मन में एक संकल्प लिया: अब से, मैं दृढ़ता से शैतान की इन भ्रांतियों को अस्वीकार कर दूँगी और अब से उसके द्वारा मूर्ख नहीं बनूँगी, उसके कारण नुकसान नहीं उठाऊंगी, और मैं परमेश्वर में विश्वास करूंगी और ईमानदारी से उसका अनुसरण करुँगी, और परमेश्वर की निगाहों की सुरक्षा और देखभाल में रहूंगी।

प्रलोभन के सामने, मुझे कौन सा मार्ग अपनाना चाहिए?

परमेश्वर के वचनों के मार्गदर्शन के तहत, अब मैं पैसे कमाने के लिए पहले की तरह मेहनत नहीं करती थी, बल्कि मैं परमेश्वर के वचनों को पढ़ने, अपने भाई-बहनों के साथ अधिक सभाओं में भाग लेने पर ध्यान केंद्रित करती थी। मैंने हर दिन समृद्ध महसूस करने लगी, और मेरी आत्मा ने ऐसी शांति और स्वतंत्रता पाई जो उसने पहले कभी महसूस नहीं की थी। मेरा स्वास्थ्य भी धीरे-धीरे ठीक होने लगा और मैं अपनी शारीरिक क्षमता की अनुसार सक्रिय रूप से कलीसिया में अपना कर्तव्य निभाती थी।

लेकिन जब बसंत उत्सव आया, तो मेरा बेटा घर लौटा और उसने मुझसे कहा, "माँ, मैंने शहर से बाहर कई परियोजनाओं का अनुबंध किया है। हमारे साथ आइये और काम में हमारी मदद कीजिये और हम अगले कुछ वर्षों में थोड़ा-बहुत पैसा कमा लेंगे। हम दक्षिण में एक घर खरीदेंगे, ताकि हम यहाँ वापस न आएं। सामान बांधना शुरू कर दीजिये क्योंकि हम दो दिनों के बाद निकल जायेंगे।" उसे यह कहते हुए सुनकर मैं गहरी सोच में पड़ गई: मुझे लगता है कि अब मैं जो काम कर रही हूँ वह काफी हद तक आरामदायक है, लेकिन मैं ज्यादा पैसा नहीं कमा पाती हूँ। अब मेरे बेटे ने कुछ परियोजनाओं का अनुबंध पाया है, और दक्षिण एक औद्योगिक क्षेत्र है इसलिए हम निश्चित रूप से पैसा कमा सकेंगे। एक बड़े शहर में एक बड़ा घर खरीदना और वहाँ बसना मेरा सपना भी है! लेकिन फिर मैंने सोचा: मैंने वर्षों तक बहुत पैसा कमाया है, लेकिन बीमार होने और अपने परिवार के रूखे व्यवहार के अलावा मैंने वास्तव में और क्या पाया है? अब जब मैंने परमेश्वर पर विश्वास करना शुरू कर दिया है, तो मेरा स्वास्थ्य बेहतर होने लगा है, लेकिन मेरा बेटा चाहता है कि मैं फिर से पैसा कमाने के लिए चल दूँ...। इन विचारों से भरकर, मैंने परमेश्वर से एक खामोश प्रार्थना की: "हे परमेश्वर, तुमने पहले से ही मुझे पर्याप्त कृपा और आशीर्वाद दिया है। मेरा बेटा अब चाहता है कि मैं पैसे कमाने के लिए दक्षिण जाऊं, लेकिन मैं शैतान के प्रलोभन में नहीं पड़ना चाहती हूँ और उसके कारण चोट खाते रहना नहीं चाहती हूँ। कृपया शैतान के प्रलोभन पर विजय पाने और अपने दिल की रक्षा करने में मेरी अगुआई करो ताकि मैं तुम्हारी उपस्थिति में जी सकूं।" प्रार्थना करने के बाद, मैंने परमेश्वर के इन वचनों के बारे में सोचा: "मनुष्य का भाग्य परमेश्वर के हाथों से नियंत्रित होता है। तुम स्वयं को नियंत्रित करने में असमर्थ हो : हमेशा अपनी ओर से भाग-दौड़ करते रहने और व्यस्त रहने के बावजूद मनुष्य स्वयं को नियंत्रित करने में अक्षम रहता है। यदि तुम अपने भविष्य की संभावनाओं को जान सकते, यदि तुम अपने भाग्य को नियंत्रित कर सकते, तो क्या तुम तब भी एक सृजित प्राणी होते?" अधिकार के परमेश्वर के वचनों ने मेरे दिल का दरवाजा खटखटाया, और मैंने सोचा: हाँ, परमेश्वर ने बहुत समय पहले यह पूर्वनिर्धारित और व्यवस्थित कर दिया है कि जीवन में मेरे पास कितना पैसा होगा, और जो भी परमेश्वर ने पूर्वनिर्धारित किया है उसे कोई नहीं बदल सकता है। चाहे मैं कितना भी संघर्ष और प्रयास क्यों न करूँ, मैं कभी भी अपनी किस्मत नहीं बदल सकती। एक कहावत कहती है, "जब समय आएगा तो वो आपके जीवन में आ जाएगा, समय न आये तो उसे मजबूर न करें।" मैंने शैतान के नुकसान के कारण काफी पीड़ा सही है, अब मुझे शैतान के अनुयायियों का हिस्सा बनने वापस नहीं जाना चाहिए।

मैं स्वयं को पैसों के अनिष्ट से छुड़ाकर सुखी जीवन जीती हूँ

मैंने बाद में परमेश्वर के इन वचनों को पढ़ा: "जब तुम जीवन के उन विभिन्न लक्ष्यों की, जिनकी लोग खोज करते हैं और जीवन जीने के उनके अनेक अलग-अलग तरीकों की बार-बार जाँच-पड़ताल करोगे और सावधानीपूर्वक उनका विश्लेषण करोगे, तो तुम यह पाओगे कि उनमें से एक भी सृजनकर्ता के उस मूल इरादे के अनुरूप नहीं है जिसके साथ उसने मानवजाति का सृजन किया था। वे सभी, लोगों को सृजनकर्ता की संप्रभुता और उसकी देखभाल से दूर करते हैं; ये सभी ऐसे जाल हैं जो लोगों को भ्रष्ट बनने पर मजबूर करते हैं, और जो उन्हें नरक की ओर ले जाते हैं। जब तुम इस बात को समझ लेते हो, उसके पश्चात्, तुम्हारा काम है जीवन के अपने पुराने दृष्टिकोण को अपने से अलग करना, अलग-अलग तरह के जालों से दूर रहना, परमेश्वर को तुम्हारे जीवन को अपने हाथ में लेने देना और तुम्हारे लिए व्यवस्थाएं करने देना; तुम्हारा काम है केवल परमेश्वर के आयोजनों और मार्गदर्शन के प्रति समर्पण करने का प्रयास करना, अपनी कोई निजी पसंद मत रखना, और एक ऐसा इंसान बनना जो परमेश्वर की आराधना करता है।" परमेश्वर के वचनों ने मुझे अभ्यास का मार्ग दिखाया और मुझे एहसास हुआ कि मुझे अपना जीवन परमेश्वर को सौंपना चाहिए और उसकी संप्रभुता और व्यवस्थाओं को समर्पित हो जाना चाहिए। मेरा जीवन पहले भी अत्यधिक दर्द से भरा था, मैंने अपना अधिकांश जीवन पैसा कमाने में व्यतीत किया था, इस तरह मैंने अपने शरीर को बर्बाद कर दिया; किसी हाल में भी मैं उस पुराने मार्ग पर चलना जारी रख सकती थी। अब, मुझे जीवन में बुनियादी आवश्यकताओं की कोई चिंता नहीं थी और मेरी आरामदायक नौकरी से इतने पैसे मिल जाते थे कि सारा काम चल जाये। और तो और, मैं सभाओं में भाग ले सकती हूँ, अपने भाई-बहनों के साथ परमेश्वर के वचनों को पढ़ सकती हूँ, इससे मुझे अपना जीवन बहुत खुशहाल लगता है। यह सोचकर, मैंने पैसे के प्रति तर्कसंगत दृष्टिकोण लेने और मैंने कभी भी पैसों का गुलाम न बनने का फैसला किया। मुझे अपने जीवन के लक्ष्यों को फिर से स्थापित करना था, परमेश्वर से प्रेम का प्रयास करना था, एक सार्थक जीवन जीना था, एक सृजित जीव के रूप में अपना कर्तव्य निभाना और शैतान के कारण हुए अनिष्ट को दूर करना था। इसलिए मैंने अपने बेटे के अनुरोध को विनम्रता से अस्वीकार कर दिया। इस तरह से अभ्यास करने के बाद, मुझे असीम आनंद महसूस हुआ और मुझे वास्तव में उस खुशी और शांति की भावना का अनुभव हुआ जो परमेश्वर की सुरक्षा और परमेश्वर के साथ होने से आता है।

बाद में, मैंने धीरे-धीरे अपने जीने के ढंग के साथ-साथ उन गलत उद्देश्यों को ठीक किया जिसका मैं पीछा करती थी। मैं अब पैसे के लिए संघर्ष और मेहनत नहीं करूँगी, बल्कि सत्य का अनुसरण करने के लिए जीऊंगी; मैं सृष्टिकर्ता की संप्रभुता और व्यवस्थाओं के अधीन होने की कोशिश करूँगी, एक नियमित जीवन जियूंगी, एक सामान्य नौकरी करूंगी, अपने भाई-बहनों के साथ परमेश्वर के वचनों को पढ़ूंगी, परमेश्वर की प्रशंसा में गाऊंगी और एक सृजित जीव रूप में अपना कर्तव्य निभाऊंगी। धीरे-धीरे, मुझे बहुत से सत्य समझ आ गये और मैं शैतान की कई कपटपूर्ण योजनाओं को समझने में सक्षम हो गयी, जिससे शैतान के बहुत से नुकसान और चालबाजी से बच गयी, और एक ऐसा जीवन जीने लगी जो समय के साथ और अधिक चिंता मुक्त होता गया। विभिन्न व्याधियाँ, जैसे कि मेरी पीठ में मांसपेशियों का खिंचाव, सेरेब्रल वैसोस्पास्म और मेरे कंधे का पेरिआर्थ्राइटिस, जो मुझे सालों से अपनी चपेट में लिए हुए थे, सभी चले गए। मुझ पर दया और कृपा दिखाने के लिए, मुझे शैतान के अनिष्ट से खुद को दूर करने और एक सार्थक जीवन जीने में सक्षम बनाने के लिए परमेश्वर का धन्यवाद।

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