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परमेश्वर का राज्‍य कहाँ हैं? इसका उत्‍तर प्रभु की प्रार्थना में है

बहुत से ईसाई मानते हैं कि स्वर्ग का राज्य स्वर्ग में है, लेकिन प्रभु की प्रार्थना कहती है, "तेरा राज्य आए। तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो" (मत्ती 6: 10)। "प्रकाशितवाक्य की पुस्तक भी यह कहती है, "जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया" (प्रकाशितवाक्य 11:15)। तो, स्वर्ग का राज्य स्वर्ग में है या पृथ्वी पर? इस लेख में, हम आपके सामने जवाब पेश करते हैं।

प्रभु की प्रार्थना में छिपे परमेश्वर के राज्य का रहस्य

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परमेश्वर का राज्य स्वर्ग में है या पृथ्वी पर?
परमेश्वर के राज्य का रहस्योद्घाटन

परमेश्वर का राज्य स्वर्ग में है या पृथ्वी पर?

बैठकों में, मैं अक्सर अपने पादरी को यह कहते हुए सुनता हूँ, "मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते तो मैं तुम से कह देता; क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूँ। और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो" (यूहन्ना 14:2-3)। "तब वह मुझे आत्मा में एक बड़े और ऊँचे पहाड़ पर ले गया, और पवित्र नगर यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्‍वर के पास से उतरते दिखाया… बारहों फाटक बारह मोतियों के थे; एक एक फाटक एक एक मोती का बना था। नगर की सड़क स्वच्छ काँच के समान शुद्ध सोने की थी" (प्रकाशितवाक्य 21:10, 21) वो हमें पवित्रशास्त्र से इसी तरह के अंश सुनाते हैं ताकि हमें ये बता सकें कि प्रभु हमारे लिए एक जगह तैयार करने गये हैं, और जब वो वापस लौटेंगे, तो हम सभी सीधे स्वर्ग में मोतियों और सोने का आनंद लेने के लिए आरोहित किये जाएंगे। वे हमसे कहते हैं कि हमें शांति से इंतजार करना चाहिए और अक्सर प्रार्थना करनी चाहिए कि जब प्रभु लौट कर आएं तो हम पीछे न रह जायें…

अपने पादरी के शब्दों को सुनने के बाद, मैं स्वर्ग के राज्य के लिए तड़प से भर जाता था। मुझे सोचता था कि, इस संसार में रहते हुए, मैंने कभी भी सोना या मोती नहीं देखा, इसलिए मैं वास्तव में यह देखना चाहता था कि स्वर्ग का राज्य कैसा दिखता है। कभी-कभी मैं खुद के वहाँ होने की भी कल्पना करता था कि मैं स्वर्ग के राज्य में खड़ा, अपने चारों ओर सोने और भव्यता को देख रहा हूँ, मेरी आँखों में चमकती हुई सोने की जगमगाहट, मेरे कदमों के नीचे, सुनहरे फुटपाथ पर मेरे जूते टकराने से होती स्पष्ट ध्वनि, हवा में धूल का एक कण भी नहीं.… यह सच में एक स्वर्गिक जीवन होगा! जितना मैं इसके बारे में सोचता, उतना ही मैं प्रभु के वापस लौटने और हमारे स्वर्ग में आरोहित होने की आशा करता था, ताकि मैं इसकी सुंदरता का आनंद ले सकूं। यह प्रभु से मेरी अधिकांश प्रार्थनाओं का केंद्र हो गया था।

एक दिन, मैंने प्रभु की प्रार्थना पढ़ी, "तेरा राज्य आए। तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो" (मत्ती 6: 10)। मैंने प्रभु के वचनों पर विचार करना शुरू किया, मैं उलझन में पड़ गया: परमेश्वर का इरादा है कि हम परमेश्वर के राज्य के धरती पर आने के लिए प्रार्थना करें, तो पादरी यह क्यों कहते हैं कि प्रभु वापस लौटने पर हमें सीधे स्वर्ग में आरोहित करेंगे? पादरी के उपदेश स्पष्ट रूप से प्रभु के वचनों का विरोध करते हैं। आखिर ऐसा क्यों है?

परमेश्वर के राज्य का रहस्योद्घाटन

एक दिन, मेरे एक सहकर्मी मुझे एक छोटे समूह में शामिल होने के लिए साथ लाये, वहाँ एक बहन बाइबल पर बहुत स्पष्ट रूप से संगति कर रही थी, जो मेरे लिए बहुत ही रोशन करने वाला था। मैंने सोचा, "यह एक दुर्लभ अवसर है, तो क्यों न इस बहन से मैं अपनी उलझन का जवाब माँगूं?" इसलिए मैंने उनसे पूछा, "हर दिन हमारे पादरी हमसे धैर्य के साथ प्रतीक्षा करने को कहते हैं। वे बताते हैं कि जब प्रभु आयेंगे तो हमें स्वर्ग में आरोहित करेंगे। लेकिन प्रभु की प्रार्थना में, प्रभु स्पष्ट रूप से हमें परमेश्वर के राज्य के पृथ्वी पर आने लिए प्रार्थना करने को कहते हैं, जो कि पादरी के इस कथन के साथ विरोधाभास में है कि हमें प्रभु के आने पर स्वर्ग में आरोहित किये जाने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। तो, परमेश्वर का राज्य स्वर्ग में है या पृथ्वी पर?"

उसने मुस्कुराते हुए कहा, "भाई, आपने बहुत अच्छा सवाल उठाया है, और हम एक साथ जवाब तलाश सकते हैं। प्रभु की प्रार्थना में, प्रभु यीशु यकीनन स्पष्ट रूप से कहते हैं कि हमें परमेश्वर के राज्य के पृथ्वी पर आने के लिए प्रार्थना करनी चाहिए, और यह कि ईश्वर की इच्छा धरती पर पूरी हो। कहीं यह नहीं कहा गया है कि स्वर्ग में परमेश्वर का राज्य स्थापित किया जाएगा। वास्तव में, प्रभु ने कहा है, 'कोई स्वर्ग पर नहीं चढ़ा, केवल वही जो स्वर्ग से उतरा, अर्थात् मनुष्य का पुत्र जो स्वर्ग में है' (युहन्ना 3:13)। प्रभु स्पष्ट रूप से हमें बताते हैं कि परमेश्वर से अलावा, कोई भी आदमी स्वर्ग में नहीं जा सकता है। स्वर्ग ईश्वर का निवास स्थान है, और प्रभु हमसे परमेश्वर के राज्य के पृथ्वी पर आने के लिए प्रार्थना करने को कहते हैं। फिर भी हम स्वर्ग में चढ़ना चाहते हैं। क्या यह एक अति करने वाली इच्छा नहीं है? तो, परमेश्वर का राज्य अंततः पृथ्वी पर प्रकट होगा, न कि स्वर्ग में। हम बाइबल से कई पदों को भी देख सकते हैं, 'जब सातवें दूत ने तुरही फूँकी, तो स्वर्ग में इस विषय के बड़े बड़े शब्द होने लगे: जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया, और वह युगानुयुग राज्य करेगा' (प्रकाशितवाक्य 11:15)। 'फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्‍वर के पास से उतरते देखा। वह उस दुल्हिन के समान थी जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊँचे शब्द से यह कहते हुए सुना, देख, परमेश्‍वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है। वह उनके साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्‍वर आप उनके साथ रहेगा और उनका परमेश्‍वर होगा। वह उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं' (प्रकाशितवाक्य 21:2–4)। ये सभी पद इन तथ्यों को संदर्भित करते हैं 'जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया,' 'फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्‍वर के पास से उतरते देखा,' 'परमेश्‍वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है।' ये सभी संकेत करते हैं कि परमेश्वर का राज्य पृथ्वी पर अवरोहित होगा। यदि हम अपनी कल्पनाओं के अनुसार चलते हैं, यह मानते हुए कि परमेश्वर का राज्य स्वर्ग में है और जब प्रभु आयेंगे तो वह हमें स्वर्ग में रहने के लिए आरोहित करेंगे, तो क्या इसका मतलब यह नहीं है कि इन भविष्यवाणियों को पूरा नहीं किया जाएगा? हम सभी जानते हैं कि शुरुआत में, परमेश्वर ने मिट्टी से मानवजाति का निर्माण किया था और उन्हें पृथ्वी पर सभी चीजों को देखने के लिए अदन की वाटिका में रखा था, साथ ही साथ पृथ्वी पर परमेश्वर की आज्ञा का पालन करने, उनकी आराधना और महिमा करने के लिए रखा था, इसलिए हम देख सकते हैं कि मानवजाति के लिए परमेश्वर की इच्छा है कि वो पृथ्वी पर रहे। बाद में, शैतान ने मानवजाति को भ्रष्ट कर दिया, और मानवजाति को बचाने के लिए परमेश्वर का सारा कार्य पृथ्वी पर किया गया है। परमेश्वर ने मूसा द्वारा इस्राएलियों को मिस्र से बाहर निकाला, और यह पृथ्वी पर किया गया था। प्रभु यीशु व्यक्तिगत रूप से मानवजाति को छुड़ाने के लिए देहधारी शरीर के रूप में आए, और यह भी पृथ्वी पर था। इसलिए, मानवजाति की मंज़िल पृथ्वी पर है, न कि स्वर्ग में, और यह बहुत पहले परमेश्वर द्वारा पूर्व निर्धारित किया गया था।"

उनकी संगति सुनने पर मुझे बहुत व्यावहारिक लगी। उनकी समझ बाइबल और प्रभु के वचनों के अनुसार है। पहले, मुझे लगता था कि मेरे पादरी के शब्द और प्रभु यीशु के वचन परस्पर विरोधी हैं, लेकिन मुझे उनके भीतर का सत्य समझ नहीं आया था। इस संगति ने मुझे यह समझा दिया की, चूँकि शुरुआत में परमेश्वर ने पृथ्वी पर मानवजाति का निर्माण किया, मानवजाति को बचाने के लिए परमेश्वर के सभी कार्य पृथ्वी पर किए गए हैं, और प्रभु हमसे परमेश्वर के राज्य के पृथ्वी पर आने के लिए प्रार्थना करने को कहते हैं, तो परमेश्वर की इच्छा है कि हम धरती पर रहें, न कि हम स्वर्ग में चढ़ें।

इसके बाद, मेरे बहन ने इन वचनों को पढ़ा, "परमेश्वर अपने मूल स्थान पर लौट जाएगा और प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने स्थान पर लौट जाएगा। ये वे गंतव्य हैं, जहाँ परमेश्वर का समस्त प्रबंधन पूरा होने पर परमेश्वर और मनुष्य रहेंगे। परमेश्वर के पास परमेश्वर की मंज़िल है, और मानवता के पास मानवता की। विश्राम करते समय, परमेश्वर पृथ्वी पर सभी मनुष्यों के जीवन का मार्गदर्शन करता रहेगा, जबकि वे उसके प्रकाश में, स्वर्ग के एकमात्र सच्चे परमेश्वर की आराधना करेंगे। ... जब मनुष्य विश्राम में प्रवेश करते हैं, तो इसका अर्थ है कि वे सृष्टि की सच्ची वस्तु बन गए हैं; वे पृथ्वी से परमेश्वर की आराधना करेंगे और सामान्य मानवीय जीवन जिएंगे। लोग अब और परमेश्वर की अवज्ञा या प्रतिरोध नहीं करेंगे और वे आदम और हव्वा के मूल जीवन की ओर लौट जाएंगे। विश्राम में प्रवेश करने के बाद ये परमेश्वर और मनुष्य के अपने-अपने जीवन और गंतव्य होंगे। परमेश्वर और शैतान के बीच युद्ध में शैतान की पराजय अपरिहार्य प्रवृत्ति है। इसी तरह, अपना प्रबंधन-कार्य पूरा करने के बाद परमेश्वर का विश्राम में प्रवेश करना और मनुष्य का पूर्ण उद्धार और विश्राम में प्रवेश अपरिहार्य प्रवृत्ति बन गए हैं। मनुष्य के विश्राम का स्थान पृथ्वी है और परमेश्वर के विश्राम का स्थान स्वर्ग में है। जब मनुष्य विश्राम में परमेश्वर की आराधना करते हैं, वे पृथ्वी पर रहेंगे और जब परमेश्वर बाकी मानवता को विश्राम में ले जाएगा, वह स्वर्ग से उनका नेतृत्व करेगा न कि पृथ्वी से" ('परमेश्वर और मनुष्य साथ-साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे')।

उन्होंने अपनी संगति जारी रखते हुए कहा, "इस अंश से, हम देख सकते हैं कि परमेश्वर द्वारा हमें पूरी तरह से शैतान के हाथों से छुड़ा लेने के बाद, वे पृथ्वी पर मानवजाति के जीवन की अगुवाई करना जारी रखेंगे, न कि हमें स्वर्ग में आरोहित करेंगे। भले ही हम धरती पर ही रहेंगे, लेकिन उस समय शैतान की सभी ताकतें, जो परमेश्वर का विरोध करती हैं, पूरी तरह से नष्ट हो चुकी होंगी, अब शैतान पृथ्वी को परेशान और नुकसान नहीं पहुँचाएगा, लोगों के बीच कोई मनमुटाव, चालबाज़ी या धोखा नहीं होगा, लोग तब पीड़ित नहीं होंगे, न चिंता करेंगे, न बीमार होकर मरेंगे। मानवजाति आदम और हव्वा के समान अदन की वाटिका में रहेगी, परमेश्वर की आराधना करेगी, परमेश्वर के आशीष के बीच रहेगी। उस समय, परमेश्वर और मानवजाति दोनों ही विश्राम से प्रवेश करेंगे, परमेश्वर स्वर्ग से मानवजाति की अगुवाई करेंगे और मनुष्य के संसार पर स्वर्ग का आशीष बरसाएंगे, और पृथ्वी पर मानवजाति परमेश्वर के मार्गदर्शन का आनंद लेगी, एक स्वर्गिक जीवन जियेगी, और परमेश्वर और इन्सान सदा खुशी-ख़ुशी रहेंगे। यह वो खूबसूरत मंज़िल है जिसे परमेश्वर ने हमारे लिए तैयार किया है। यह पूरी तरह से प्रकाशितवाक्य के इस भविष्यवाणी को पूरा करता है, 'वह उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा; और इसके बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं' (प्रकाशितवाक्य 21: 4)।"

जब मैंने इस अंश पर अपनी बहन की संगति सुनी, तो मेरा दिल उज्ज्वल हो गया। तो आखिर इस तरह प्रकाशितवाक्य की भविष्यवाणियों को पूरा किया जाएगा। अब मैं समझ गया कि परमेश्वर द्वारा मानवजाति के लिए तैयार की गयी सुंदर मंज़िल धरती पर है, लेकिन जब यह आएगी तो इन्सान शैतान की गड़बड़ी के बिना जियेंगे और एक-दूसरे के साथ शांति से रह सकेंगे, जो वो धन्य जीवन होगा जिसे परमेश्वर ने हमें दिया है। यह सोचकर कि कैसे, पहले मैं सोचता था कि परमेश्वर द्वारा मानवजाति के लिए तैयार की गयी सुंदर मंज़िल स्वर्ग में थी, किस तरह से मैंने स्वर्ग में जीवन के बारे में कल्पना की थी, मुझे अब यह एहसास हुआ कि उस तरह से कल्पना करना हास्यास्पद था। हम देह युक्त प्राणी हैं, इसलिए हम स्वर्ग में कैसे रह सकते हैं? परमेश्वर के मार्गदर्शन के लिए उनका धन्यवाद, जिसने मुझे परमेश्वर के राज्य के रहस्य को समझने दिया।

मुझे एहसास नहीं हुआ कि अंधेरा हो रहा था, और इससे पहले कि मुझे ऐसा लगे कि मैंने काफी कुछ सुन लिया है, बैठक खत्म हो गई। लेकिन, मुझे इससे वास्तव में बहुत फायदा हुआ, और मैं अगली बैठक में अधिक सत्य समझने की आशा करता हूँ...

यदि आप स्‍वर्ग के राज्‍य के भेद के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं तो हमारे “स्वर्ग के राज्य का रहस्य” पृष्ठ पर या नीचे दी गई सामग्री का अवलोकन करें।

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