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क्या हमारे पापों के क्षमा हो जाने का मतलब यह है कि हम स्वर्गीय राज्य में आरोहित किये जा सकते हैं?

हममें से जो प्रभु में विश्वास करते हैं उनके लिए स्वर्गीय राज्य में प्रवेश करना, सबसे बड़ी लालसा है। इसलिए हम अक्सर कल्पना करते हैं कि वह राज्य कितना सुंदर होगा। बेशक, हम स्वर्ग में अपने प्रवेश के बारे में भी आश्वस्त हैं, क्योंकि बाइबल में कहा गया है: "जिस में हमें छुटकारा अर्थात् पापों की क्षमा प्राप्‍त होती है" (कुलुस्सियों 1:14)। इसलिए हम मानते हैं कि जब हम प्रभु में विश्वास रखते हैं, तो हमारे पापों को क्षमा कर दिया जाता है और उसके बाद हम पापी नहीं रह जाते हैं। हम यह भी मानते हैं कि, जब प्रभु आयेंगे, तो हम तुरंत स्वर्गीय राज्य में आरोहित किये जाएंगे। इन बातों को सोचकर हम बहुत उत्साहित हो जाते हैं, और हम लालसा करते हैं कि प्रभु जल्द से जल्द हमारे पास आयें। मैंने भी पहले इसी की लालसा की थी। लेकिन बाद में, अपने भाई-बहनों के साथ इस मामले पर संगति करने और चर्चा करने के बाद, मैंने एक नई खोज को पाया, और यहाँ मैं आप सभी के साथ उस पर संगति करना चाहूँगा जो मैंने प्राप्त किया है ...

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हमारे पापों के क्षमा किये जाने का सच्चा अर्थ
क्या हमारे पापों के क्षमा किये जाने का अर्थ यह है कि हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं?
तो हम परमेश्वर के राज्य में कैसे प्रवेश कर सकते हैं?

हमारे पापों के क्षमा किये जाने का सच्चा अर्थ

सबसे पहले, हमें कुछ समझने की जरूरत है: हमारे पाप क्षमा किये जाने का वास्तव में क्या अर्थ है? जब इसकी बात आती है, तो हम सभी जानते हैं कि परमेश्वर ने व्यवस्था के युग में मूसा के माध्यम से अपने व्यवस्थाओं और आज्ञाओं की घोषणा की थी। व्यवस्थाओं के माध्यम से, उन्होंने लोगों को पाप के बारे में जागरूक बनाया, और उन्होंने उस समय के लोगों को यह जानने की अनुमति दी कि पृथ्वी पर कैसे रहना है, दूसरों के साथ कैसे रहना है और यदि वे पाप करते हैं, तो वे परमेश्वर की सजा भुगतेंगे। केवल यहोवा परमेश्वर को बलिदान चढ़ाने से ही उनके पापों को माफ किया जा सकता था। जैसा बाइबल में लिखा है, "इस्राएलियों से यह कह कि यदि कोई मनुष्य उन कामों में से जिनको यहोवा ने मना किया है, किसी काम को भूल से करके पापी हो जाए; और यदि अभिषिक्‍त याजक ऐसा पाप करे जिससे प्रजा दोषी ठहरे, तो अपने पाप के कारण वह एक निर्दोष बछड़ा यहोवा को पापबलि करके चढ़ाए" (लैव्यव्यवस्था 4:2-3)। हालाँकि, मानवजाति को पापबलि की भेंट चढ़ाकर क्षमा किया जा सकता था, लेकिन व्यवस्था के युग के अंत में, मानवजाति शैतान के द्वारा अधिकाधिक भ्रष्ट हो रही थी, इसलिए वे परमेश्वर के नियमों का पालन करने में असमर्थ थे। अब कोई पापबलि ऐसी नहीं थी जिसका चढ़ावा उन्हें छुटकारा दिला सके, और उन सब पर व्यवस्थाओं द्वारा मौत के घाट उतारे जाने का खतरा था।

परमेश्वर हम सभी को व्यवस्थाओं के अनुसार मौत के मुंह में जाते देखने के इच्छुक नहीं थे, और इसलिए वे देह बन गए और उन्होंने प्रभु यीशु के रूप में मनुष्य के बीच कार्य किया। उन्होंने स्वर्गीय राज्य के सुसमाचार का प्रचार किया और लोगों से पश्चाताप करने और अपने पापों को स्वीकार करने के लिए कहा, जब तक कि अंत में उन्हें सूली पर नहीं चढ़ा दिया गया और वे पूरी मानवजाति के लिए पापबलि बन गए। जैसा कि बाइबल में लिखा है, "उसी इच्छा से हम यीशु मसीह की देह के एक ही बार बलिदान चढ़ाए जाने के द्वारा पवित्र किए गए हैं। हर एक याजक तो खड़े होकर प्रतिदिन सेवा करता है, और एक ही प्रकार के बलिदान को जो पापों को कभी भी दूर नहीं कर सकते, बार-बार चढ़ाता है" (इब्रानियों 10:10-11)। प्रभु के छुटकारे के कारण, हमारे पापों को क्षमा कर दिया गया था, और हम व्यवस्थाओं द्वारा मृत्यु पाने के खतरे से बच गए। जब भी हम इन कार्यों को याद करते हैं, तो हम अपने दिलों में एक तरह की अविश्वसनीय स्नेह की भावना महसूस करते हैं, क्योंकि यह परमेश्वर की दया और करुणा है जिसने हमें, मानवजाति को, आज के दिन तक जीवित रहने की अनुमति दी है। बाइबल कहती है, "हम को उसमें उसके लहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात् अपराधों की क्षमा, उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है" (इफिसियों 1:7)। यह स्पष्ट है कि हमारे पापों को इसलिए क्षमा कर दिया गया है क्योंकि प्रभु यीशु ने क्रूस पर चढ़ कर हमें छुटकारा दिलाया। हम परमेश्वर के व्यवस्थाओं के द्वारा अब और दोषी नहीं ठहराए जाते थे, परमेश्वर अब हमें पापी नहीं मानते थे। हम आखिरकार परमेश्वर के सामने आने, उनसे प्रार्थना करने। अपने पापों को स्वीकार करने और पश्चाताप करने के योग्य हो गए थे। हम उस अनंत अनुग्रह का आनन्द ले सकते थे जिसे परमेश्वर ने हम पर बरसाते हैं। यह हमारे पापों के क्षमा किये जाने का सच्चा अर्थ है।

क्या हमारे पापों के क्षमा किये जाने का अर्थ यह है कि हम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं?

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हमारे पापों को प्रभु द्वारा माफ कर दिया गया था और परमेश्वर अब हमें पापी नहीं मानते थे। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं था कि हम पाप और गंदगी से मुक्त हो गए थे। अगर हम इसके बारे में ध्यान से सोचें, तो भले ही हम प्रभु पर विश्वास करते हों, प्रभु के लिए कठिन परिश्रम कर सकते हों और हम बाहर से अच्छा व्यवहार करते हुए प्रतीत होते हों, लेकिन फिर भी हम ऐसा जीवन जीते हैं जिसमें हम दिन में पाप करते हैं और रात में अपने पापों को स्वीकार करते हैं—न तो हमने अपने देह की भ्रष्टता को त्यागा है, न ही स्वयं को शैतान के प्रभाव से छुड़ाया है। कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं: जब दूसरे लोग कुछ ऐसा करते हैं जो हमारे हितों के खिलाफ है, तो हम अपनी स्वार्थी और घृणास्पद प्रकृति के कारण हमेशा अपने हितों को पहले रखते हैं, जिससे अन्य लोगों के प्रति हमारे अंदर नफरत पैदा हो सकती है, हम अपने पड़ोसी को खुद के समान प्यार करने में असमर्थ हो जाते हैं; जब हम परमेश्वर के वचनों को व्यवहार में लाना चाहते हैं और ईमानदार बनना चाहते हैं, तो हम अनजाने में अपने हित के लिए दूसरों को धोखा देने और उनसे कपट करने का प्रयास करते हैं; हम अच्छी तरह से जानते हैं कि प्रभु हमसे विनम्र होने के लिए कहते हैं, और फिर भी हम अक्सर अभिमानी और दम्भी हो जाते हैं, हम किसी की बात नहीं मानते हैं; हम अच्छी तरह से जानते हैं कि प्रभु यीशु ने कहा था कि हम प्रभु और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते हैं, और फिर भी हम धन और भौतिक सुखों से युक्त होने में सक्षम हैं, कभी-कभी हम नियम से प्रार्थना नहीं करते या सभाओं में भाग नहीं लेते, कुछ भाई-बहन दुनियावी प्रवृत्ति का भी अनुसरण करते हैं और ऐसे झूठे विश्वासी बन जाते हैं जो बस नाम के ईसाई हैं ... क्या ऐसे आचरण ये साबित नहीं करते कि हम अभी भी शैतान की शक्ति के अधीन हैं और पाप और भ्रष्टता के मध्य रह रहे हैं? हम, जो पूरी तरह से गंदगी से ढंके हैं, कैसे परमेश्वर के मुख को देख सकते हैं? बाइबल में लिखा है: "मैं तुम से सच सच कहता हूँ कि जो कोई पाप करता है वह पाप का दास है। दास सदा घर में नहीं रहता; पुत्र सदा रहता है" (यूहन्ना 8:34-35)। प्रभु यहाँ बहुत स्पष्टता से कह रहे हैं। हम पाप करने और उसे स्वीकारने के क्रूर चक्र में जीते हैं, हम पाप के सेवक हैं और परमेश्वर हमें अपने राज्य में प्रवेश नहीं करने देंगे।

तो हम परमेश्वर के राज्य में कैसे प्रवेश कर सकते हैं?

परमेश्वर कहते हैं "पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ" (1 पतरस 1:16)। प्रकाशितवाक्य 14:5 में लिखा है: "उनके मुँह से कभी झूठ न निकला था, वे निर्दोष हैं।" और प्रकाशितवाक्य 3:18 में लिखा है: "इसी लिये मैं तुझे सम्मति देता हूँ कि आग में ताया हुआ सोना मुझ से मोल ले कि तू धनी हो जाए, और श्‍वेत वस्त्र ले ले कि पहिनकर तुझे अपने नंगेपन की लज्जा न हो, और अपनी आँखों में लगाने के लिये सुर्मा ले कि तू देखने लगे।" हम परमेश्वर के वचनों और प्रकाशितवाक्य की भविष्यवाणियों से देख सकते हैं कि परमेश्वर पवित्र हैं, और केवल वे ही जो परमेश्वर द्वारा शुद्ध किये गये हैं और जिन्होंने पूरी गन्दगी और भ्रष्टाचार को समाप्त कर दिया है, परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं। इसी तरह, हम जानते हैं कि यह भी एक तथ्य है कि केवल खुद के बलबूते पाप के बंधन को तोड़ पाना हमारे लिए असंभव है। क्या मैं पूछ सकता हूँ कि हम भाई-बहनों में से कौन पाप में जीना चाहता है? हमारी निजी इच्छाओं को देखते हुए, हममें से कोई भी ऐसा नहीं है जो पाप में जीना चाहता है। और फिर भी हम हमेशा अनजाने में पाप करते हैं, फिर उन्हें कबूल करते हैं और बहुत दर्द और बेहद असहाय महसूस करते हैं। इसलिए, यदि हम खुद को पाप के बंधनों और बाधाओं से मुक्त करना चाहते हैं और शुद्ध होना चाहते हैं, तो हमें परमेश्वर के आगे के उद्धार की आवश्यकता है।

बाइबल की ध्यान से की गयी जाँच के माध्यम से, हम देख सकते हैं कि कई जगहों पर यह भविष्यवाणी की गई है कि प्रभु मानवजाति को बचाने के लिए अंतिम दिनों में न्याय का कार्य करेंगे, जैसे कि पतरस की पहली पत्री के 4:17 में लिखा है: "क्योंकि वह समय आ पहुँचा है कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए।" युहन्ना 12:47-48 में लिखा है: "यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता; क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूँ। जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा।" युहन्ना 16:8, में लिखा है: "वह आकर संसार को पाप और धार्मिकता और न्याय के विषय में निरुत्तर करेगा।" इन धर्मग्रंथों से, हम देख सकते हैं कि अंत के दिनों में परमेश्वर के घर से आरंभ होने वाले न्याय के कार्य को लौट कर आये हुए प्रभु यीशु द्वारा किया जाएगा, और पाप और पापी प्रकृति की जड़ें जो हम अपने भीतर लिए फिरते हैं, उन्हें परमेश्वर के न्याय और ताड़ना से होकर गुजरना होगा इससे पहले कि उन्हें पूरी तरह से निष्कासित किया जा सके।

लेकिन परमेश्वर न्याय और ताड़ना के अपने कार्य को कैसे करेंगे, और हमें इसका अनुभव कैसे करना चाहिए? बाइबल इन सवालों के जवाबों को स्पष्ट रूप से नहीं बताती है, लेकिन प्रभु ने बहुत पहले भविष्यवाणी की थी: "जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा" (यूहन्ना 12:48)। "मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (यूहन्ना 16:12-13)। "जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है" (प्रकाशितवाक्य 2:11)। हम इन भविष्यवाणियों से देख सकते हैं कि प्रभु के पास अभी भी हमें बताने के लिए बहुत सी चीजें हैं, और सत्य का आत्मा हमें पूरा सत्य और रहस्य बताने के लिए, हमारे पापों का न्याय करने के लिए, पापों से मुक्त होने का रास्ता दिखाने के लिए अंत के दिनों में आएगा। इस महत्वपूर्ण समय में हमें परमेश्वर के द्वारा बोले गए वचनों को सुनने और अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य का अध्ययन करने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि केवल ऐसा करने से ही हम बुद्धिमान कुंवारियों के समान बन सकते हैं, प्रभु के आगमन का स्वागत कर सकते हैं, प्रभु के साथ भोज कर सकते हैं, परमेश्वर द्वारा शुद्ध किये एवं परमेश्वर के राज्य में ले जाए जा सकते हैं।

प्यारे भाइयों और बहनों, आइये हम सब प्रभु से ये प्रार्थना करें:

"हे प्रभु! मैं अनुनय करता हूँ कि आप हमारा मार्गदर्शन करें, हमें आप के कहे वचनों को सुनने में और अंत के दिनों में आपकी वापसी का स्वागत करने में समर्थ बनाएं …"

यदि आप स्‍वर्ग के राज्‍य के भेद के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं तो हमारे “स्वर्ग के राज्य का रहस्य” पृष्ठ पर या नीचे दी गई सामग्री का अवलोकन करें।

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