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Hindi Christian Movie "धन्‍य हैं वे, जो मन के दीन हैं" अंश 3 : बचाए जाने और उद्धार के बीच अंतर कैसे करें

2,816 10/10/2019

धार्मिक संसार में बहुत से लोग हैं जो मानते हैं कि प्रभु में विश्वासी हम लोग अपने पापों से दोषमुक्त होकर उनके अनुग्रह से बचाए जा चुके हैं, और हम क्रूस को धारण करते और बहुत सा अच्‍छा व्यवहार करते हुए, नम्रता और धैर्यपूर्ण व्‍यवहार करते हैं, तो क्‍या इसका मतलब यह है कि हम बदलाव पा चुके है? उनका मानना है कि, अगर हम हमेशा इस तरह से अपने विश्वास पर कायम रह सकते हैं, तो अंत में हम स्वर्गारोहित किए जाएंगे और स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर पाएंगे। क्या वास्तव में ये तथ्य ऐसे ही हैं? क्या अच्‍छे व्‍यवहार में हमारा विश्वास ही उद्धार का प्रतिनिधित्व कर सकता है? बचाए जाने और उद्धार के बीच वास्तव में क्या अंतर है?

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