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जकर्याह 13:8 चिंतन: आप तीसरे में से एक कैसे हो सकते हैं जो बचे रहेंगे?

"यहोवा की यह भी वाणी है, कि इस देश के सारे निवासियों की दो तिहाई मार डाली जाएँगी और बची हुई तिहाई उसमें बनी रहेगी" (जकर्याह 13:8)।

जकर्याह 13:8 चिंतन: आप तीसरे में से एक कैसे हो सकते हैं जो बचे रहेंगे?

यह पद परमेश्वर के अंतिम दिनों की भविष्यवाणी है, अर्थात, परमेश्वर ने मनुष्य को स्पष्ट रूप से कहा है कि अंत में बहुत से लोग नहीं बचेंगे। केवल एक-तिहाई मानवजाति ही बचेगी, और दो-तिहाई नष्ट हो जाएगी। दो-तिहाई नष्ट होने वाले कौन हैं? तीसरे कौन हैं जो बचे रहेंगे? बहुत से लोग सोच सकते हैं की तीसरे वे हैं जो प्रभु यीशु में विश्वास करते हैं और अपने पापों को स्वीकार कर सकते हैं और प्रभु के सामने पश्चाताप कर सकते हैं, और यह कि दो-तिहाई अन्यजातियों को संदर्भित करता है जो प्रभु में विश्वास नहीं करते हैं। लेकिन क्या वास्तव में यही मामला है? प्रकाशितवाक्य की पुस्तक भविष्यवाणी करती है, "धन्य वे हैं, जो अपने वस्त्र धो लेते हैं, क्योंकि उन्हें जीवन के पेड़ के पास आने का अधिकार मिलेगा, और वे फाटकों से होकर नगर में प्रवेश करेंगे। पर कुत्ते, टोन्हें, व्यभिचारी, हत्यारे, मूर्तिपूजक, हर एक झूठ का चाहनेवाला और गढ़नेवाला बाहर रहेगा" (प्रकाशितवाक्य 22:14-15)। इस पद से, हम देख सकते हैं कि केवल जब हम पाप से शुद्ध हो जाते हैं और पापी नहीं रह जाते, तभी हम जीवित बच सकते हैं और स्वर्गीय राज्य में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए, तीसरा उन लोगों को संदर्भित करता है जो पाप से मुक्त और शुद्ध हो गए हैं। हालांकि जब लोग प्रभु में विश्वास करते हैं तो लोगों के पाप क्षमा कर दिए जाते हैं, वे फिर भी अक्सर पाप करते हैं और अभी भी शुद्ध नहीं हुए हैं। तो वे तीसरे में से नहीं हैं, वे बहुत कम हैं जो यह नहीं मानते की एक परमेश्वर हैं और जो प्रभु का विरोध करते हैं। क्योंकि परमेश्वर धर्मी, पवित्र परमेश्वर हैं, परमेश्वर पापियों को अपने राज्य में रहने और प्रवेश करने की अनुमति कैसे दे सकते हैं?

इस बिंदु पर, कुछ लोग भ्रमित हो सकते हैं: "जब हम प्रभु में विश्वास करते हैं, हमारे पास क्षमा कर दिए जाते हैं, लेकिन हम अभी भी अक्सर पाप करते हैं, और हम शुद्ध नहीं हुए हैं। यह एक तथ्य है। तब हम शुद्धिकरण कैसे प्राप्त कर सकते हैं, और पापी नहीं, और इस प्रकार तीसरे में से हों जो बचे रहेंगे?" सबसे पहले आइए हम इस बारे में बात करें की हम अभी भी अक्सर पाप क्यों करते हैं जबकी हम प्रभु में विश्वास करते हैं और हमारे पास क्षमा कर दिए जाते हैं। शैतान द्वारा भ्रष्ट किए जाने के बाद, हमारे अंदर पापी स्वभाव है। प्रभु में हमारे विश्वास में, हमारे पाप क्षमा किए जाते हैं, हम परमेश्वर से प्रार्थना करने परमेश्वर के समक्ष आ सकते हैं, हम अब और व्यवस्था द्वारा दंडित नहीं होते हैं, और हम परमेश्वर के अनुग्रह और आशीष का आनंद ले सकते हैं। हालाँकि, हमारा पापी स्वभाव अभी भी भीतर मौजूद है। हमारे पापी स्वभाव से बंधे हुए, हम अभी भी पाप करते और अनजाने में परमेश्वर का विरोध करते हैं। हम पाप के बंधन से मुक्त नहीं हुए और पवित्रता प्राप्त नहीं की है, और हम परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने के योग्य नहीं हैं। इसलिए, प्रभु यीशु ने कई बार भविष्यवाणी की थी कि वे अंत के दिनों में लौटेंगे, अर्थात्, वे अंत के दिनों में सत्य को व्यक्त करने और परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य को करने के लिए वापस आएंगे। जैसा कि प्रभु यीशु ने कहा, "मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा" (यूहन्ना 16:12-13)। "सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर: तेरा वचन सत्य है" (यूहन्ना 17:17)। 1 पतरस 4:17 "क्योंकि वह समय आ पहुँचा है, कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए" भी है: यह देखा जा सकता है की लौटे हुए प्रभु द्वारा किया जाने वाला न्याय कार्य मनुष्य के पापी स्वभाव को पूरी तरह से हल करना है, ताकि मनुष्य को पाप से मुक्त किया जा सके, शुद्ध किया जाए, परमेश्वर द्वारा बचाया जाए, और परमेश्वर के राज्य में लाया जा सकें। ऐसे लोग तीसरे हैं जो बचे रहेंगे। जब अंतिम दिनों में परमेश्वर का उद्धार का कार्य समाप्त होता है, तो परमेश्वर महान आपदाएं लाते हैं और अच्छाई को पुरस्कृत करने और बुराई को दंडित करने का कार्य करते हैं। उस समय, वे लोग जिन्होंने अभी भी अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय और शुद्धिकरण के कार्य को स्वीकार नहीं किया है, और जो अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य का विरोध भी करते हैं, आपदाओं में पड़ेंगे, उन दो-तिहाई लोगों में शामिल हो जाएंगे, जिन्हें हटा दिया जाएगा। इस प्रकार, परमेश्वर का छह: हजार-वर्षीय प्रबंधन कार्य पूर्ण रूप से से पूरा हो जाएगा। जैसा कि परमेश्वर के वचन कहते हैं, "मेरा कार्य केवल छह हज़ार वर्ष तक चलता है और मैंने वादा किया कि समस्त मानवजाति पर उस दुष्ट का नियंत्रण भी छह हजार वर्षों से अधिक तक नहीं रहेगा। इसलिए, अब समय पूरा हुआ। मैं अब और न तो जारी रखूँगा और न ही विलंब करूँगा : अंत के दिनों के दौरान मैं शैतान को परास्त कर दूँगा, मैं अपनी संपूर्ण महिमा वापस ले लूँगा और मैं पृथ्वी पर उन सभी आत्माओं को वापस प्राप्त करूँगा जो मुझसे संबंधित हैं, ताकि ये व्यथित आत्माएँ दुःख के सागर से बच सकें और इस प्रकार पृथ्वी पर मेरे समस्त कार्य का समापन होगा। इस दिन के बाद, मैं पृथ्वी पर फिर कभी भी देहधारी नहीं बनूँगा और फिर कभी भी पूर्ण-नियंत्रण करने वाला मेरा आत्मा पृथ्वी पर कार्य नहीं करेगा। मैं पृथ्वी पर केवल एक कार्य करूँगा : मैं मानवजाति को पुनः बनाऊँगा, ऐसी मानवजाति जो पवित्र हो और जो पृथ्वी पर मेरा विश्वसनीय शहर हो। पर जान लो कि मैं संपूर्ण संसार को जड़ से नहीं मिटाऊँगा, न ही मैं समस्त मानवजाति को जड़ से मिटाऊँगा। मैं उस शेष तृतीयांश को रखूँगा—वह तृतीयांश जो मुझसे प्रेम करता है और मेरे द्वारा पूरी तरह से जीत लिया गया है और मैं इस तीसरे तृतीयांश को फलदायी बनाऊँगा और पृथ्वी पर कई गुना बढ़ाऊँगा, ठीक वैसे जैसे इस्राएली व्यवस्था के तहत फले-फूले थे, उन्हें ख़ूब सारी भेड़ों और मवेशियों और पृथ्वी की सारी समृद्धि के साथ पोषित करूँगा। यह मानवजाति हमेशा मेरे साथ रहेगी, मगर यह आज की बुरी तरह से गंदी मानवजाति की तरह नहीं होगी, बल्कि ऐसी मानवजाति होगी, जो उन सभी लोगों का जनसमूह होगी जो मेरे द्वारा प्राप्त कर लिए गए हैं। इस प्रकार की मानवजाति को शैतान के द्वारा नष्ट, बिगाड़ा या घेरा नहीं जाएगा और ऐसी एकमात्र मानवजाति होगी जो मेरे द्वारा शैतान पर विजय प्राप्त करने के बाद पृथ्वी पर विद्यमान रहेगी। यही वह मानवजाति है, जो आज मेरे द्वारा जीत ली गई है और जिसे मेरी प्रतिज्ञा हासिल है। और इसलिए, अंत के दिनों के दौरान मेरे द्वारा जीती गई मानवजाति वह मानवजाति भी होगी, जिसे बख़्श दिया जाएगा और जिसे मेरे अनंत आशीष प्राप्त होंगे। शैतान पर मेरी विजय का यही एकमात्र सुबूत होगा और शैतान के साथ मेरे युद्ध का एकमात्र विजयोपहार होगा। युद्ध के ये विजयोपहार मेरे द्वारा शैतान के अधिकार क्षेत्र से बचाए गए हैं और ये ही मेरी छह-हज़ार-वर्षीय प्रबंधन योजना के ठोस-रूप और परिणाम हैं। ये विश्वभर के हर राष्ट्र और संप्रदाय, हर स्थान और देश से हैं। ये भिन्न-भिन्न जातियों के हैं, भिन्न-भिन्न भाषाओं, रीति-रिवाज़ों और त्वचा के रंगों वाले हैं और ये विश्व के हर देश और संप्रदाय में और यहाँ तक कि संसार के हर कोने में भी फैले हैं। अंततः वे पूर्ण मानवजाति बनाने के लिए साथ आएंगे, मनुष्यों का ऐसा जनसमूह, जिस तक शैतान की ताकतें नहीं पहुँच सकतीं। मानवजाति के बीच जिन लोगों को मेरे द्वारा बचाया और जीता नहीं गया है, वे ख़ामोशी से समुद्र की गहराइयों में डूब जाएँगे, और मेरी भस्म करने वाली लपटों द्वारा हमेशा के लिए जला दिए जाएँगे" ('कोई भी जो देह में है, कोप के दिन से नहीं बच सकता')।

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