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परमेश्वर का स्वभाव और स्वरूप

परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर का स्वभाव और स्वरूप | अंश 261

संसार में सब कुछ तेज़ी से परिवर्तित हो रहा है, सर्वशक्तिमान के विचारों से, उसकी नजरों के नीचे। मानवजाति ने जिन चीज़ों के बारे में अब तक कभी सुना ही नहीं एकाएक टूट पड़ेगी। तथापि, मानवजाति ने जिन बातों...

परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर का स्वभाव और स्वरूप | अंश 263

जब सबसे पहले मनुष्य को सामाजिक विज्ञान मिला, तब से मनुष्य का मन विज्ञान और ज्ञान में व्यस्त था। फिर विज्ञान और ज्ञान मानवजाति के शासन के लिए उपकरण बन गए, और अब मनुष्य के पास परमेश्वर की आराधना करन...

परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर का स्वभाव और स्वरूप | अंश 262

मानवजाति का सदस्य और सच्चे ईसाई होने के नाते, अपने मन और शरीर को परमेश्वर के आदेश को पूरा करने के लिए समर्पित करना हम सभी की ज़िम्मेदारी और दायित्व है, क्योंकि हमारा सम्पूर्ण अस्तित्व परमेश्वर से आ...

परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर का स्वभाव और स्वरूप | अंश 258

जिस क्षण से तुम रोते हुए इस दुनिया में आते हो, तभी से तुम अपना कर्तव्य पूरा करना शुरू कर देते हो। परमेश्वर की योजना और उसके विधान में अपनी भूमिका निभाते हुए तुम अपनी जीवन-यात्रा शुरू करते हो। तुम्...