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बाइबिल में धन्य वचन

मत्ती 5:1-12 में प्रभु यीशु की शिक्षाओं को दर्ज किया गया है—8 परम सुख। वास्तव में, उनमें से प्रत्येक हमारे लिए परमेश्वर की अपेक्षा और आवश्यकता है और हमारे लिए परमेश्वर के वादों को प्राप्त करने के लिए अभ्यास का तरीका है। क्या आपको ये आशीषें मिली हैं? निम्नलिखित बाइबिल छंदों और संबंधित वीडियो के माध्यम से, आप समझेंगे कि वास्तविक जीवन में प्रभु के वचनों का अभ्यास कैसे करें और परमेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करें।

"धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है" (मत्ती 5:3)।

"धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शान्ति पाएँगे" (मत्ती 5:4)।

"धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे" (मत्ती 5:5)।

"धन्य हैं वे, जो धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएँगे" (मत्ती 5:6)।

"धन्य हैं वे, जो दयावन्त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी" (मत्ती 5:7)।

"धन्य हैं वे, जिनके मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्‍वर को देखेंगे" (मत्ती 5:8)।

"धन्य हैं वे, जो मेल करवानेवाले हैं, क्योंकि वे परमेश्‍वर के पुत्र कहलाएँगे" (मत्ती 5:9)।

"धन्य हैं वे, जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है" (मत्ती 5:10)।

"धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें और सताएँ और झूठ बोल बोलकर तुम्हारे विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। आनन्दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा प्रतिफल है। इसलिए कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहले थे इसी रीति से सताया था " (मत्ती 5:11-12)।

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