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मेन्‍यू

क्या आप सच्चे मार्ग की जाँच के सबसे बड़े विचलन के बारे में जानते हैं?

एक अवसर पर मैंने एक बातचीत सुनी जो कुछ इस तरह चल रही थी:

अ: "सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया गवाही देती है कि प्रभु यीशु लौट आया है, कि वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर है, और यह कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर सत्यों को व्यक्त करता है और न्याय का कार्य करता है। हमें यह देखने के लिए कि क्या यह वास्तव में प्रभु की वापसी है, सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करनी चाहिए?"

ब: "नहीं, हम इसकी जाँच-पड़ताल नहीं कर सकते। हमें पहले पादरियों और एल्डर्स से पूछना होगा कि वे इस बारे में क्या सोचते हैं। यदि वे हमें जाँच-पड़ताल की अनुमति देते हैं, तो ही हम जाँच करेंगे। यदि वे हमें इसकी जाँच की अनुमति नहीं देते, तो हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। आखिरकार, पादरी और एल्डर्स हमसे श्रेष्ठ हैं और उन्होंने कई सालों तक प्रभु की सेवा की है। वे अक्सर बाइबल का अध्ययन और व्याख्या करते हैं, तो सही तो यह है कि पहले पादरी और एल्डर्स इसकी जाँच करें और फिर हमें उनकी बात सुननी चाहिए।"

इस संक्षिप्त वार्तालाप में, क्या आपने प्रभु की वापसी का स्वागत करने के मार्ग में होने वाले किसी विचलन को नोट किया है? चलिए अब हम निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा करें: सच्चे मार्ग की जाँच करने में सबसे बड़ा विचलन क्या हो सकता है? सच्चे मार्ग की जाँच करने का सही तरीका क्या होना चाहिए? यह जानने के लिए कृपया पढ़ें।

सच्चे मार्ग की जाँच में सबसे बड़ा विचलन

हमारे लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल और प्रभु का स्वागत करना एक प्रमुख घटना है जो सीधे हमारे निर्णायक भाग्य से जुड़ी हुई है। यदि सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल में हम प्रभु की इच्छा की तलाश नहीं करते, बल्कि इसके बजाय पादरियों और एल्डर्स को यह सोचकर कि वे प्रभु की सेवा करते हैं, कि वे बाइबल का अध्ययन और व्याख्या करते हैं, और कि अगर हम उनकी बात सुनेंगे तो प्रभु का स्वागत करने में सक्षम हो पायेगें, उन्हें पहले जाँच करने दें, तो क्या यह दृष्टिकोण सही होगा? क्या प्रभु यीशु ने कहा था कि जब हम सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करते हैं तो हमें पादरियों और एल्डर्स की बात सुननी चाहिए? जो लोग पादरियों और एल्डर्स की सुनते हैं, क्या वास्तव में प्रभु का स्वागत कर सकते हैं? याद करो, 2000 साल पहले, यहूदी अगुआ धर्मशास्त्र/पवित्रशास्त्र से परिचित थे और अक्सर लोगों के लिए इसकी व्याख्या करते थे, लेकिन जब प्रभु यीशु प्रकट हुआ और उसने अपना कार्य किया, तो क्या उन्होंने पहचाना कि प्रभु यीशु मसीहा था, कि वह स्वयं परमेश्वर था? क्या उन्होंने प्रभु यीशु के स्वागत के लिए विश्वासियों का नेतृत्व किया? उन्होंने न केवल प्रभु यीशु को नकारा, बल्कि उन्होंने बेतहाशा प्रभु यीशु की निंदा और तिरस्कार भी किया, यहाँ तक कि प्रभु यीशु को सलीब पर चढ़ाने के लिए रोमन सरकार के साथ मिलकर साँठ-गाँठ भी की। यह ये दिखाने के लिए काफी है कि भले ही लोग बाइबल के अच्छे जानकार हों और अक्सर इसकी व्याख्या करते हों, इसका यह मतलब नहीं है कि वे सत्य को समझते हैं, केवल वही परमेश्वर को जानते हैं! भले ही धार्मिक हलकों/क्षेत्रों में अगुआओं की सम्मानजनक पहचान और ऊँचे ओहदे हों, चाहें उन्हें बाइबल के बारे में कितना ही ज्ञान क्यों न हो, इसका मतलब यह नहीं है कि वे परमेश्वर को जान सकते हैं और उसका आज्ञापालन कर सकते हैं। क्योंकि यहूदी लोग अपने धार्मिक अगुआओं को बहुत मानते थे और आँख मूँदकर उनकी बातें सुनते थे और उन्होंने प्रभु यीशु के वचनों और कार्यों की खोज और जाँच-पड़ताल करने पर ध्यान नहीं दिया, इस प्रकार उन्होंने प्रभु यीशु के उद्धार को ठुकरा दिया। यहाँ तक कि उन्होंने प्रभु को सलीब पर चढ़ाने में फरीसियों का अनुसरण भी किया। अंत में, उन्होंने परमेश्वर के स्वभाव को अपमानित किया और परमेश्वर द्वारा दंडित किये गये। क्या यह सब इसलिए नहीं था क्योंकि उन्होंने सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करते समय केवल इंसान/मनुष्य के शब्दों को सुनने पर ध्यान दिया और उनके खुद के कोई विचार नहीं थे, और इसके परिणास्वरूप, उन्होंने प्रभु यीशु के उद्धार को खो दिया और अंत में फरीसियों के साथ परमेश्वर के दंड के भागीदार बने? बाइबल भी यही कहती है: "श्रापित है वह पुरुष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है, और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है" (यिर्मयाह 17:5)। इसलिए सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल में अपने विवेक से काम लिए बिना धार्मिक अगुआओं की बातों पर आँख मूँद कर विश्वास करना सबसे बड़ा विचलन है, और यह परमेश्वर के उद्धार को खोने का कारण बन सकता है।

क्या आप सच्चे मार्ग की जाँच के सबसे बड़े विचलन के बारे में जानते हैं?

तो अब, जब हम परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य जैसे अति-महत्वपूर्ण मामले की जाँच-पड़ताल कर रहे हैं, और हम खोज और जाँच करने पर ध्यान केंद्रित नहीं करते, बल्कि सिर्फ पादरियों और एल्डर्स की बातों पर आँख मूँदकर विश्वास करते हैं, क्या हमें अब भी यहूदी लोगों के पदचिन्हों पर चलना चाहिए? कुछ लोग सोचते हैं कि पादरियों और एल्डर्स को बाइबल का बहुत ज्यादा ज्ञान है, और उनके विचार/नजरिये गलत नहीं होने चाहिए। खैर, हम इस बारे में सोच सकते हैं। यह तथ्य कि पादरी और एल्डर्स बाइबल के जानकार हैं और अक्सर इसकी व्याख्या करते हैं, क्या इसका मतलब यह है कि वे परमेश्वर को जानते हैं? क्या उन्हें यकीन है कि जब प्रभु लौटेगा तो वे उसे पहचान लेंगे? पादरी अक्सर लोगों के लिए बाइबल की व्याख्या कर सकते हैं, लेकिन क्या वे परमेश्वर के इरादों/आशयों और आवश्यकताओं के संवाद पर ध्यान केंद्रित करते हैं? क्या वे परमेश्वर के स्वभाव और प्रेम के बारे में गवाही देते हैं? क्या उन्होंने इस बारे में अपनी गवाहियाँ दी हैं कि कैसे प्रभु के वचनों का अभ्यास और उसका आज्ञापालन करें? क्या वे इस बारे में बात करते हैं कि सच्चा पश्चाताप कैसे प्राप्त किया जाये, कैसे परमेश्वर का भय मानें और बुराई से दूर रहें, और प्रभु की आज्ञाओं का पालन कैसे करें? बाइबल कहती है, "मैं शीघ्र आनेवाला हूँ" (प्रकाशितवाक्य 22:12)। "आधी रात को धूम मची, कि देखो, दूल्हा आ रहा है, उससे भेंट करने के लिये चलो" (मत्ती 25:6)। "माँगो, तो तुम्हें दिया जाएगा; ढूँढ़ो, तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये खोला जाएगा" (मत्ती 7:7)। इन पदों से हम देख सकते हैं कि प्रभु यीशु ने भविष्यवाणी की थी कि वह अंत के दिनों में वापस आयेगा। जब कोई पुकार सुनता है कि "दूल्हा आ रहा है," हमें खोज करने में पहल करनी चाहिए और प्रभु की वापसी का स्वागत करना चाहिए। लेकिन क्या एल्डर्स और पादरी ऐसा करते हैं? क्या वे सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल और प्रभु के वचनों के अनुसार प्रभु का अभिवादन/स्वागत करने में लोगों का मार्गदर्शन करते हैं? इतना ही नहीं, वे इसकी जाँच भी नहीं करते और ढिंढोरा भी पीटते हैं कि "प्रभु के आने की सारी खबरें फर्जी हैं," ताकि लोग न सुनें, न देखें, न ही किसी से संपर्क करें, और विश्वासियों को सच्चे मार्ग की जाँच करने से रोकने के लिए वे कलीसियाओं को अवरुद्ध करने की भी पूरी कोशिश करते हैं। क्या यह प्रभु के वचनों के विरुद्ध जाना नहीं है? वे सत्य को नहीं समझते हैं और खुलेआम प्रभु की शिक्षाओं का उल्लंघन करते हैं। क्या ऐसे लोग प्रभु का स्वागत करने में हमारा मार्गदर्शन कर सकते हैं? प्रभु की वापसी का स्वागत करने की महत्वपूर्ण घटना का सामना करते समय, यदि हम पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता और प्रकाशन की तलाश/खोज करने के लिए प्रभु से प्रार्थना करने पर ध्यान केंद्रित नहीं करते हैं, न ही प्रभु की आवश्यकताओं के अनुसार प्रभु का स्वागत करने के लिए सक्रिय रूप से खोज और जाँच करते हैं, बल्कि इसके बजाय हम पादरियों और एल्डर्स की तरफ देखते और उन पर यकीन करते हैं और आँख मूँदकर उनकी बातों पर विश्वास करते हैं, वे जो कहते हैं वही करते हैं, कभी भेद/अंतर नहीं करते कि क्या पादरियों और एल्डर्स के वचन सत्य और प्रभु की इच्छा के अनुरूप हैं, और प्रभु का स्वागत करने के इतने महत्वपूर्ण मामले का निर्णय हम दूसरे लोगों को सौंप देते हैं, और हमारी किस्मत और भाग्य की व्यवस्था पादरियों और एल्डर्स को करने देते हैं, क्या यह बिल्कुल बेवकूफी वाली बात नहीं है? चूँकि हम परमेश्वर में विश्वास करते हैं हमें उसे सबसे महानतम मानना चाहिए और उसकी आवश्यकताओं के अनुसार कार्य करना चाहिए। हमें आँख मूँदकर लोगों का आज्ञापालन नहीं करना चाहिए। नहीं तो, हम यहूदियों की गलतियों को दोहराते रहेंगे और परिणाम सोच से परे होंगे।

प्रभु के लौटने पर उसका स्वागत करने का सही अभ्यास

चूँकि अब हम जानते हैं कि सच्चे मार्ग की जाँच करते समय पादरियों और एल्डर्स की बात सुनना किसी के लिए भी एक बड़ा विचलन बन सकता है, हम पूछ सकते हैं कि सही मार्ग क्या है? हम प्रभु का स्वागत कैसे कर सकते हैं? प्रकाशितवाक्य में इसका सात बार उल्लेख किया गया है: "जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है।" प्रभु यीशु ने भी हमें स्पष्ट रूप से बताया है, "मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे-पीछे चलती हैं" (यूहन्ना 10:27)। और प्रकाशितवाक्य 3:20 कहता है, "देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा, और वह मेरे साथ।" सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "चूँकि हम परमेश्वर के पदचिह्नों की खोज कर रहे हैं, इसलिए हमारा कर्तव्य बनता है कि हम परमेश्वर की इच्छा, उसके वचन और कथनों की खोज करें—क्योंकि जहाँ कहीं भी परमेश्वर द्वारा बोले गए नए वचन हैं, वहाँ परमेश्वर की वाणी है, और जहाँ कहीं भी परमेश्वर के पदचिह्न हैं, वहाँ परमेश्वर के कर्म हैं। जहाँ कहीं भी परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है, और जहाँ कहीं भी परमेश्वर प्रकट होता है, वहाँ सत्य, मार्ग और जीवन विद्यमान होता है। परमेश्वर के पदचिह्नों की तलाश में तुम लोगों ने इन वचनों की उपेक्षा कर दी है कि 'परमेश्वर सत्य, मार्ग और जीवन है।' और इसलिए, बहुत-से लोग सत्य को प्राप्त करके भी यह नहीं मानते कि उन्हें परमेश्वर के पदचिह्न मिल गए हैं, और वे परमेश्वर के प्रकटन को तो बिलकुल भी स्वीकार नहीं करते। कितनी गंभीर ग़लती है!" इससे यह देखा जा सकता है कि जब परमेश्वर अंत के दिनों में लौटेगा, वह व्यक्त करेगा कि पवित्र आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है और अपने कथनों से हमारे दरवाजों पर दस्तक देगा। जब हम परमेश्वर की वाणी पहचानते हैं, हम परमेश्वर का प्रकटन और उसका कार्य देखते हैं, और प्रभु के साथ दावत में जाते हैं और प्रभु की वापसी का अभिवादन करते हैं। इसलिए, जब हम सच्चे मार्ग की जाँच करते हैं, तो परमेश्वर की आवाज़ को सुनना महत्वपूर्ण है। यह उस समय के पतरस, यूहन्ना, नतनेल और अन्य लोगों की तरह है, जिन्होंने सच्चे मार्ग की जाँच करते समय प्रभु यीशु के कथनों को सुनने पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने किसी भी धार्मिक अगुआ से उनकी राय नहीं पूछी, और जब फरीसी प्रभु यीशु के बारे में अफवाहें फैला रहे थे और उसके कार्य की निंदा और बदनामी कर रहे थे, तो उन्होंने आँख मूँदकर उन पर विश्वास नहीं किया। जब उन्होंने प्रभु के वचन से परमेश्वर की वाणी को पहचाना और निर्धारित किया कि यह सत्य की अभिव्यक्ति है, तो उन्होंने प्रभु का अनुसरण करने का अटूट संकल्प लिया और प्रभु का उद्धार प्राप्त किया। इसलिए, सच्चे मार्ग की जाँच करने के लिए, केवल परमेश्वर की वाणी को सुनने पर और यह निर्धारित करने पर कि यह परमेश्वर द्वारा व्यक्त किया गया सत्य है या नहीं, ध्यान केंद्रित करना पर्याप्त है। हमें पतरस और अन्य लोगों के नेतृत्व का अनुसरण भी करना चाहिए। जब सच्चे मार्ग की जाँच की जाती है, हमें धार्मिक दुनिया के पादरियों और अगुआओं पर आँख मूँदकर विश्वास नहीं करना चाहिए, बल्कि वो बुद्धिमान कुंवारियाँ बनने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो परमेश्वर की वाणी सुनती हैं और उन वचनों की खोज करती हैं जो पवित्र आत्मा कलीसियाओं से कहता है। जब तक हम यह निर्धारित कर सकते हैं कि सत्य की अभिव्यक्तियाँ हैं, और यह कि सत्य, मार्ग और जीवन की उपस्थिति है, हमें इस मार्ग की खोज करनी चाहिए और प्रभु का स्वागत करने के लिए इसे स्वीकार करना चाहिए।

आज, पूरी दुनिया में, केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया ही खुलेआम गवाही देती है कि प्रभु यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंत के दिनों के मसीहा के रूप में लौट आया है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर लोगों को शुद्ध करने और बचाने के लिए सभी सत्य व्यक्त करता है, परमेश्वर के घर से शुरू करके न्याय का कार्य कर रहा है, उसने परमेश्वर की प्रबंधन योजना के सभी रहस्यों को उजागर किया है, और हमें उन सभी सत्यों से अवगत कराया है जिन्हें हमें समझने की जरूरत है, इस तरह प्रभु यीशु द्वारा हमसे किया गया वादा पूरा किया है: "मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (यूहन्ना 16:12-13)। सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त वचन हुबहू वही वचन हैं जो प्रकाशितवाक्य में पवित्र आत्मा द्वारा भविष्यवाणी के रूप में कलीसियाओं को कहे गये थे। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन का 20 से भी अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया है और इसे इन्टरनेट पर भी पोस्ट किया गया है, और ये खोज और जाँच के लिए सभी लोगों के लिए उपलब्ध हैं। राज्य के आगमन का सुसमाचार पूर्व से पश्चिम तक फ़ैल गया है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन ने विभिन्न धर्मों और सम्प्रदायों को हिला दिया है। बहुत से लोगों ने परमेश्वर की वाणी सुनी है और महसूस किया है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन आधिकारिक व प्रभावशाली हैं, और वे सभी सत्य हैं, और इसलिए एक-एक करके लोगों ने परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार कर लिया है और परमेश्वर के सिंहासन के समक्ष लौट आये हैं। इसलिए, जब हम सच्चे मार्ग की जाँच करते हैं, तो जब तक हम सर्वशक्तिमान परमेश्वर के और वचनों को पढ़ते हैं और निर्धारित करते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा बोले गये वचन सत्य हैं और परमेश्वर की वाणी हैं, क्या यह प्रभु की वापसी का स्वागत नहीं है? यदि हम इस बात पर ध्यान दिए बिना सच्चे मार्ग की जाँच करें कि क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा बोले गये वचन सत्य हैं, लेकिन इसके बजाय पादरियों और एल्डर्स की बातों पर विश्वास करें और अंत के दिनों के परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करने से इंकार करें, तो हम परमेश्वर द्वारा त्यागी जाने वाली वस्तुएँ बन जायेंगे। अगर हम सच्चे मार्ग की खोज और जाँच-पड़ताल न करने पर अड़े रहते हैं, तो बड़ी आपदाओं से सामना होने पर हम रोते हुए अपने दांत पीसेंगे, और इस तरह बाइबल के ये वचन परिपूर्ण होंगे: "मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नाश हो गई" (होशे 4:6)। "मूर्ख लोग बुद्धिहीनता के कारण मर जाते हैं" (नीतिवचन 10:21)।

संपादक की टिप्पणी

उपरोक्त संगति के माध्यम से, अब हम सच्चे मार्ग की जाँच में होने वाले सबसे बड़े विचलन के बारे में जानते हैं, और अब हम सच्चे मार्ग की सही तरीके से जाँच करने के तरीके को भी समझते हैं। यदि यह लेख आपके लिए उपयोगी रहा है, तो कृपया इसे दूसरों के साथ साझा करें ताकि वे भी सच्चे मार्ग की जाँच करने की/का राह/तरीका पा सकें। यदि आपके कोई और सवाल हैं, कृपया नीचे दिए गये ऑनलाइन चैट बटन का उपयोग करके हमसे संपर्क करने में संकोच न करें। हम दिन के चौबीस घंटे आपके सवालों के जवाब देने के लिए ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

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मेरा मानना है कि यदि हम प्रभु यीशु के नाम और प्रभु के मार्ग के प्रति निष्ठावान रहेंगे और झूठे मसीहों और पैगम्बरों के छलावों को स्वीकार नहीं करेंगे, यदि हम प्रतीक्षा करते हुए सावधान रहेंगे, तो अपने आगमन पर प्रभु अवश्य हमें प्रकटीकरण देंगे। स्वर्गारोहण के लिए हमें प्रभु की आवाज सुनने की जरूरत नहीं है। प्रभु यीशु ने कहा है, उस समय यदि कोई तुम से कहे, 'देखो, मसीह यहाँ है!' या 'वहाँ है!' तो विश्‍वास न करना। "क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यद्वक्‍ता उठ खड़े होंगे, और बड़े चिह्न, और अद्भुत काम दिखाएँगे: कि यदि हो सके तो चुने हुओं को भी भरमा दें" (मत्ती 24:23-24)। क्या आप लोग झूठे मसीहों और झूठे पैगम्बरों के छलावों को नहीं मानते? और इसलिए, हम मानते हैं कि वे सब लोग जो प्रभु के आगमन की गवाही देते हैं निश्चित रूप से झूठे हैं। हमें खोजने या परखने की कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि जब प्रभु आएँगे तो वे स्वयं को हम पर प्रकट करेंगे, और निश्चित रूप से वे हमें छोड़ नहीं देंगे। मेरा विश्वास है कि यह सही परिपालन है। आप सब क्या सोचते हैं?

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