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मेन्‍यू

सच्चे मार्ग की जाँच में, हर किसी को परमेश्वर की वाणी को सुनना चाहिए

आजकल, कई लोग जो प्रभु में विश्वास करते हैं, उसकी वापसी का स्वागत करने के लिए तड़प रहे हैं। हालाँकि, जब कुछ लोग सुनते हैं कि कुछ व्यक्ति गवाही दे रहे हैं कि प्रभु लौट आया है, तो वे इस खबर की खोज करने और जाँच करने को महत्त्व नहीं देते हैं, न ही वे प्रभु का स्वागत करने के लिए परमेश्वर की वाणी सुनते हैं; इसके बजाय, वे मानते हैं कि उन्हें पादरियों और एल्डर्स से पूछना होगा, और कुछ का तो यह भी मानना है कि उन्हें उस विशेष कलीसिया के लिए चीनी साम्यवादी पार्टी (सीसीपी) के आंकलन को देखना होगा। कार्यों को करने का यह तरीका क्या वास्तव में परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप है? अगर हम परमेश्वर की वाणी नहीं सुनते और सिर्फ सीसीपी सरकार या उन पादरियों और एल्डर्स की सुनते हैं, तो क्या हम प्रभु का स्वागत करने में सक्षम होंगे? सच्चे मार्ग की जाँच करने का सही तरीका क्या है? चलिए इस पर मिलकर संगति करते हैं।

प्रभु यीशु ने हमें बहुत पहले बताया था कि सच्चे मार्ग की यथोचित जाँच कैसे करें। प्रभु यीशु ने कहा था, "आधी रात को धूम मची, कि देखो, दूल्हा आ रहा है, उससे भेंट करने के लिये चलो" (मत्ती 25:6)। "मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे-पीछे चलती हैं" (यूहन्ना 10:27)। प्रकाशितवाक्य 3:20 कहता है, "देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा, और वह मेरे साथ।" प्रकाशितवाक्य 2 और 3 में कई बार उल्लेख किया गया है, "जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है" इससे यह देखा जा सकता है कि प्रभु अंत के दिनों में लौटेगा और कलीसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचन व्यक्त करेगा। वह अपने कथनों के माध्यम से हमारे दरवाजों पर दस्तक देगा। जो कोई भी परमेश्वर की वाणी सुनता है, और इस तरह प्रभु का स्वागत करने में सक्षम है, वो एक बुद्धिमान कुँवारी है और प्रभु के साथ दावत में भाग ले सकता है। चूँकि सिर्फ परमेश्वर ही सत्य को व्यक्त कर सकता है और कलीसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचनों को व्यक्त कर सकता है, और हम परमेश्वर की वाणी को सुनकर ही प्रभु को जान पाते हैं। यह बिल्कुल गलत नहीं हो सकता। इसलिए, जब हम किसी को "दूल्हा यहाँ है," कहते हुए सुनते हैं, जब हम किसी को यह गवाही देते हुए सुनते हैं कि प्रभु लौट आया है, तो हमें सक्रिय रूप से प्रभु को खोजना चाहिए और उसका स्वागत करना चाहिए, और पता लगाने के लिए कि जो व्यक्त किया गया है, क्या वह सत्य है, उसे सुनना चाहिए। जब तक हम परमेश्वर की वाणी को पहचानते हैं, तब तक हमारा कर्तव्य है कि हम बिना पीछे मुड़े उसे स्वीकार करें और उसका अनुसरण करें। सिर्फ यही तरीका है जिससे हम प्रभु का स्वागत करने में सक्षम होंगे। जैसे कि, जब प्रभु यीशु अपना कार्य करने के लिए आया, पतरस, यूहन्ना और अन्य अनुयायियों ने सच्चे मार्ग की खोज में, न तो फरीसियों और अन्य धार्मिक अगुआओं द्वारा प्रभु यीशु के कार्य के लिए किये गये मूल्यांकन पर ध्यान दिया और न ही वे रोमन सरकार द्वारा प्रतिबंधित/विवश थे। इसके बजाय, उन्होंने केवल प्रभु यीशु की शिक्षाओं को सुनने पर ध्यान केंद्रित किया। जब उन्होंने प्रभु यीशु के प्रभावशाली, आधिकारिक वचनों को सुना, जो मानवजाति को कभी भी, कहीं भी पोषण प्रदान कर सकते थे, उन्होंने निर्धारित किया कि प्रभु यीशु का वचन वास्तव में परमेश्वर की वाणी थी। वे जानते थे कि प्रभु यीशु वो मसीहा था जो आने वाला था और इसलिए उन्होंने उसका अनुसरण करने का संकल्प लिया। तो जैसे प्रभु ने हमें दिखाया था, हमें भी अंत के दिनों में परमेश्वर की वाणी सुनकर प्रभु का स्वागत करने पर ध्यान देना चाहिए। केवल इसी तरीके से हम प्रभु की इच्छा के अनुरूप होंगे।

सच्चे मार्ग की खोज करने और प्रभु का स्वागत करने के मामले में, क्या हमारा अभ्यास प्रभु की आवश्यकताओं का अनुसरण करता है, आइये इस बारे में विचार करें। यदि हम किसी को हमारे सामने गवाही देते हुए सुनते हैं कि प्रभु आ गया है लेकिन परमेश्वर की वाणी सुनने पर ध्यान केंद्रित नहीं करते, इसके बजाय हमेशा पादरियों और एल्डर्स की राय लेना और सीसीपी सरकार के आकलन/मूल्यांकन को देखना चाहते हैं, क्या हम प्रभु की वापसी का स्वागत करने में सक्षम होंगे? यहूदी विश्वासियों के बारे में सोचो जिन्होंने उस समय प्रभु यीशु द्वारा व्यक्त किये गये पश्चाताप के तरीके को तो सुना। लेकिन उन्होंने केवल धार्मिक अगुआओं और फरीसियों के मूल्यांकन को सुना था। जब फरीसियों ने फैसला किया कि प्रभु यीशु केवल एक बढ़ई का बेटा था, कोई मसीहा नहीं जो आने वाला था, यहूदी विश्वासियों ने आँख मूँद कर उनका विश्वास किया और उनके साथ हो लिए, और जब फरीसियों ने रोमन सरकार के साथ मिलकर प्रभु यीशु को सलीब पर चढ़ाने के लिए साजिश रची, तो यहूदी विश्वासी चिल्लाए कि उसे सलीब पर चढ़ाया जाना चाहिए। अंत में, उन्होंने धार्मिक अगुआओं और रोमन सरकार के कु-कृत्य में उनका अनुसरण किया और परमेश्वर का विरोध करने वाले लोग बन गये और हमेशा के लिए प्रभु के उद्धार को खो दिया। यह जो बाइबल में लिखा है, उसे पूर्ण करता है: "मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नाश हो गई" (होशे 4:6)। "मूर्ख लोग बुद्धिहीनता के कारण मर जाते हैं" (नीतिवचन 10:21)। तो क्या अब हम यहूदी लोगों के पद-चिन्हों का अनुसरण करना चाहते हैं? जब हम सच्चे मार्ग की जाँच करते हैं, हमें उनकी विफलता से सीखना चाहिए और जैसे प्रभु ने हमें निर्देशित किया है, उसके अनुसार परमेश्वर की वाणी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिएI इस तरह, हम प्रभु का स्वागत करते समय कभी गलत नहीं हो सकते। जब तक आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जो यह मार्ग व्यक्त करता है, वह सत्य और परमेश्वर की वाणी है, आपको इसका अनुपालन/आज्ञापालन और अनुसरण करना चाहिए। सच्चे मार्ग के बारे में जाँच किये जाने का केवल यही सही तरीका है।

अब तक, पूरी दुनिया में, केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया ही है जो खुले तौर पर इस बात की गवाही देती है कि प्रभु यीशु लौट आया है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने सत्य के लाखों वचन व्यक्त किये हैं और प्रभु यीशु के छुटकारे के कार्य के आधार पर परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले न्याय के कार्य का एक चरण कर रहा है और लोगों को उनके पापों का शुद्धिकरण करने के मार्ग पर निर्देशित किया है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने कार्य के उन सभी रहस्यों को उजागर किया है जो परमेश्वर ने संसार की रचना के बाद से मानवजाति के लिए किये हैं। वह परमेश्वर के 6,000-साल की प्रबंधन योजना के रहस्य, देहधारणों के रहस्य, परमेश्वर के नामों के रहस्य और उसके तीन चरणों के कार्य की अंदरूनी कहानी, अंत के दिनों में परमेश्वर न्याय का कार्य कैसे करता है, उसके न्याय-कार्य का महत्व और परिणाम जो प्राप्त किये जायेंगे, परमेश्वर विजेता कैसे बनायेगा, और परमेश्वर का राज्य धरती पर कैसे साकार होगा, को उजागर करता है। उसने सहस्त्राब्दी साम्राज्य की सुंदरता की भी भविष्यवाणी की है और मानवजाति को स्वभाव-परिवर्तन को प्राप्त करने और अपने/उनके विश्वास में शुद्धिकरण का मार्ग भी दिया है। इसके अलावा, सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने हमारे पाप और परमेश्वर के प्रति हमारे विरोध की जड़ें प्रकट की हैं, और बड़ी बर्बरता/प्रबलता से हमारे अंदर के शैतानी स्वभावों जैसे, अहंकार, स्वार्थ, और नीचता/दुष्टता को उजागर किया है। यह लोगों को यह पहचानने और देखने की अनुमति देता है कि उनकी अपनी प्रकृति शैतान की प्रकृति है और जिस तरह वे जीते हैं वह शैतान का दुष्ट तरीका है। यह सच्चे पश्चाताप और परमेश्वर के न्याय और ताड़ना को स्वीकार करने की इच्छा, परमेश्वर के वचन के अनुसार जीने, और धीरे-धीरे एक भ्रष्ट, शैतानी स्वभाव के बंधन और दबावों/बाधाओं को दूर करने का कारण बनता है। इस तरह से मानवजाति की पापी प्रकृति की समस्या को बुनियादी रूप से हल किया जा सकता है। परमेश्वर के कार्य और परमेश्वर के राज्य से संबंधित, उद्धार और शुद्धिकरण से संबंधित ये सभी सत्य हम तक सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा लाये गये हैं। ये वे सत्य हैं जो प्रभु यीशु ने अनुग्रह के युग में बोले थे, जो तब हमें नहीं दिए गये थे। यह पूर्णत: प्रभु यीशु की भविष्यवाणियों को पूरा करता है: "मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (यूहन्ना 16:12-13)। "यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता, क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूँ। जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैंने कहा है, वह अन्तिम दिन में उसे दोषी ठहराएगा" (यूहन्ना 12:47-48)। "सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर: तेरा वचन सत्य है" (यूहन्ना 17:17)।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा बोले गये अधिकांश वचन/शब्द वचन देह में प्रकट होता है किताब में दर्ज किये गये हैं। इस किताब का 20 से भी अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया है और इसे ऑनलाइन भी प्रकाशित किया गया है ताकि दुनिया भर के लोग खोज और जाँच कर सकें। कई लोग जो लम्बे समय से प्रभु के प्रकटन के लिए तरस रहे हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम पर लौट आये हैं। जो लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर की तरफ लौटते हैं, ठीक वैसे जैसे प्रभु यीशु का अनुसरण करने वाले लोग, वे सभी परमेश्वर की वाणी को सुनने पर ध्यान देते हैं, न कि धार्मिक दुनिया के पादरियों और एल्डर्स के मूल्यांकन पर या सीसीपी सरकार के उन आंकलनो पर। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़कर, उन्होंने माना है कि यह परमेश्वर की वाणी है और यह सत्य है। इसमें शक्ति और अधिकार है, यह सच्चाई के रहस्यों को उजागर कर सकते हैं, और यह लोगों को शुद्ध करके बदल सकते हैं। उन्हें अपने दिलों में यकीन है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही प्रभु की वापसी है और उन्होंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार कर लिया है। इसलिए, सच्चे मार्ग के बारे में निश्चित होने के बाद, चाहें बाहरी दुनिया में कितनी भी अफवाहें फैली हों, उन्हें चाहें किसी भी उत्पीड़न या अवरोधों/बाधाओं का सामना करना पड़े, वे अंत तक अडिग होकर परमेश्वर का अनुसरण करते हैं, और अंततः परमेश्वर के लिए यशस्वी गवाही देते हैं। कुछ लोग पहले ही परमेश्वर द्वारा विजेता बना दिए गये हैं। वे बुद्धिमान कुंवारियाँ हैं जिन्होंने आपदाओं से पहले प्रभु का स्वागत किया है। अब जब सर्वशक्तिमान परमेश्वर का अंत के दिनों का कार्य समाप्ति पर है, हमारा तात्कालिक कार्य परमेश्वर की वाणी को सुनकर प्रभु का स्वागत करना है—केवल यही बुद्धिमान कुँवारी होना है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर हमें चेतावनी देते हैं: "मैं सभी राष्ट्रों, सभी देशों, और यहाँ तक कि सभी उद्योगों के लोगों से विनती करता हूँ कि परमेश्वर की वाणी को सुनें, परमेश्वर के कार्य को देखें, और मानवजाति के भाग्य पर ध्यान दें, परमेश्वर को सर्वाधिक पवित्र, सर्वाधिक सम्माननीय, मानवजाति के बीच आराधना का सर्वोच्च और एकमात्र लक्ष्य बनाएँ, और संपूर्ण मानवजाति को परमेश्वर के आशीष के अधीन जीने की अनुमति दें, ठीक उसी तरह से, जैसे अब्राहम के वंशज यहोवा की प्रतिज्ञाओं के अधीन रहे थे और ठीक उसी तरह से, जैसे आदम और हव्वा, जिन्हें परमेश्वर ने सबसे पहले बनाया था, अदन के बगीचे में रहे थे।" "परमेश्वर का कार्य एक ज़बरदस्त लहर के समान उमड़ता है। उसे कोई नहीं रोक सकता, और कोई भी उसके प्रयाण को बाधित नहीं कर सकता। केवल वे लोग ही उसके पदचिह्नों का अनुसरण कर सकते हैं और उसकी प्रतिज्ञा प्राप्त कर सकते हैं, जो उसके वचन सावधानीपूर्वक सुनते हैं, और उसकी खोज करते हैं और उसके लिए प्यासे हैं। जो ऐसा नहीं करते, वे ज़बरदस्त आपदा और उचित दंड के भागी होंगे।"

पूरी दुनिया में लगातार आपदाएँ आ रही हैं और बड़ी आपदाएँ आने को हैं। अगर हम प्रभु के स्वागत के लिए परमेश्वर की वाणी सुनने पर ध्यान नहीं देते हैं, और इसके बजाय परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को नकारते और निंदा करते हैं, तो हम बड़ी आपदाओं में रोते हुए अपने दांत पीसेंगे और अंततः परमेश्वर द्वारा नकारे/त्यागे और हटा दिए जायेंगे। यह परमेश्वर की वाणी सुने बिना, केवल इंसान और शैतान के शब्दों पर ध्यान केंद्रित करके सच्चे मार्ग की जाँच करने से होता है। इसे ध्यान में रखते हुए, क्या आप बुद्धिमान कुँवारी बनना चाहते हैं जो परमेश्वर की वाणी सुनती हैं, या आप अज्ञानी और अड़ियल यहूदी लोगों के पदचिन्हों पर चलना चाहते हैं? यह व्यक्तिगत पसंद/चयन का मामला है।

संपादक की टिप्पणी

अब हम सच्चे मार्ग की जाँच करते हुए परमेश्वर की वाणी को सुनने के महत्व को जानते हैं। केवल वे जो परमेश्वर की वाणी सुनते हैं और प्रभु को पहचानते हैं, बुद्धिमान कुंवारियाँ हैं जो प्रभु की वापसी का स्वागत करने में सक्षम होंगे। तो, क्या आप परमेश्वर की वाणी सुनना चाहते हैं और अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य की जाँच करना चाहते हैं? क्या आप कलीसियाओं के लिए बोले गये पवित्र आत्मा के वचन सुनना चाहते हैं? हम आपको नीचे दिए गए हमारे लाइव चैट विकल्पों के माध्यम से संपर्क करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

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