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परमेश्वर कहाँ है? महान आपदाओं में हम परमेश्वर के प्रकटन को कैसे खोज सकते है?

हाल के वर्षों में भूकंप, अकाल और विपत्तियाँ जैसी आपदाएँ अधिक से अधिक बार हुई हैं। प्रभु के आने के विषय में बाइबल में दी गई भविष्यवाणियाँ मूल रूप से अब पूरी हो चुकी हैं, और कई भाई-बहन जो ईमानदारी से प्रभु के प्रकटन के लिए लंबे समय से इंतज़ार में हैं, उन्हें यह महसुस हो गया है कि उनकी वापसी पहले हो चुकी है। तो हमने अभी तक उसका अभिवादन क्यों नहीं किया? वह कहाँ है? हमें उसके प्रकटन को कैसे खोजना चाहीये? इस विषय पर, कुछ लोग सोचते हैं कि प्रभु अभी तक नहीं लौटे हैं, और उनका मानना है कि उन्हें उनकी तलाश में बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह बाइबिल में कहा गया है, "तब मनुष्य के पुत्र का चिन्ह आकाश में दिखाई देगा, और तब पृथ्वी के सब कुलों के लोग छाती पीटेंगे; और मनुष्य के पुत्र को बड़ी सामर्थ्य और ऐश्वर्य के साथ आकाश के बादलों पर आते देखेंगे" (मत्ती 24:30)। वे मानते हैं कि जब प्रभु वापस लौटेंगे, तो वह बहुत ही ऐश्वर्य और सामर्थ के साथ एक बादल पर आएंगे, और क्योंकि ये घटनाएं अभी तक नहीं देखी गई हैं, इससे यह साबित होता है कि प्रभु वापस नहीं आए हैं।

इस विषय पर अब दो अलग-अलग विचार हैं, तो क्या वास्तव में प्रभु लौट आए हैं या नहीं? जब वह वापस लौटेगे तो प्रभु मनुष्य को कैसे दिखाई देगे? क्या प्रभु को बादलोपर उतरते हुए देखने की प्रतीक्षा करना हमे प्रभु को देखने और उनका स्वागत करने का आश्वासन देता है? इन प्रश्नों पर एक साथ संगति करें।

प्रभु के बादलोपर आने की प्रतीक्षा कर के क्या हम परमेश्वर के प्रकटन के साक्षी हो सकते है?

आपदाएँ आ रही हैं। हम परमेश्वर की उपस्थिति का स्वागत कैसे कर सकते हैं और परमेश्वर द्वारा संरक्षित होने का मौका पा सकते हैं? उनसे चर्चा करने के लिए हमसे संपर्क करें।

"हे गलीली पुरुषों, तुम क्यों खड़े स्वर्ग की ओर देख रहे हो? यही यीशु, जो तुम्हारे पास से स्वर्ग पर उठा लिया गया है, जिस रीति से तुम ने उसे स्वर्ग को जाते देखा है उसी रीति से वह फिर आएगा" (प्रेरितों के काम 1:11)। पवित्रशास्त्र के इस अंश के आधार पर, ऐसे कई भाई-बहन हैं जो मानते हैं कि, जब प्रभु का पुनरूत्थान हुआ तो वह एक श्वेत बादल पर होकर स्वर्ग में चढ़ गए, और जब वह लौटेंगे तो वे ऐसा ही करेंगे, जैसा कि उनके पुनरुत्थान हुए आध्यात्मिक शरीर की सवारी एक सफेद बादल होगी। उनका मानना है कि, जब तक उन्होंने इस घटना के समान प्रभु को एक बादल पर उतरते नहीं देखते, तब तक यह दर्शाता है कि प्रभु अभी तक नहीं आए हैं। लेकिन क्या हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि यह समझ पूरी तरह से परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप है? बाइबल कहती है, "क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है" (यशायाह 55:8-9)। परमेश्वर की बुद्धि स्वर्ग से भी ऊँची पहुँचती है, इसलिए हम सृजित मानव जाति परमेश्वर के कार्य की थाह कैसे ले सकते हैं? अंतिम दिनों में प्रभु कैसे दिखाई देंगे और काम करेंगे, यह कुछ ऐसा है जिसे हम मनुष्य कभी निर्धारित नहीं कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, शुरुआत में बाइबल ने मसीहा के आने की भविष्यवाणी की थी, लेकिन तब प्रभु यीशु आए थे—क्या यह कुछ ऐसा था जिसकी हम मनुष्य कल्पना कर सकते थे? क्योंकि उस समय फरीसी बहुत हठी और अभिमानी थे, और क्योंकि वे अपनी ही धारणाओं और कल्पनाओं से चिपके रहते थे, इसलिए उन्होंने परमेश्वर की अवहेलना की। कोई फर्क नहीं पड़ता कि प्रभु यीशु के वचन और कार्य कितने प्रामाणिक या सामर्थशाली थे, फिर भी वे परमेश्वर के कार्य को चित्रित करने के लिए अपनी स्वयं की धारणाओं और कल्पनाओं द्वारा गए। वे मानते थे कि मसीहा राजनीतिक शक्ति को मिटा देगा, कि वह निश्चित रूप से एक महल में पैदा होगा, और यह कि वह उसके रूप में विस्मयकारी होगा। जब उन्होंने प्रभु यीशु पर आँखें डालीं, और उन्होंने देखा कि वह सिर्फ एक साधारण यहूदी था, कि उसका नाम मसीहा नहीं था और वह एक महल में पैदा नहीं हुआ था, तो उन्होंने प्रभु के कार्य को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, और यहाँ तक चले गए प्रभु यीशु को रोमन अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर के क्रूस पर चढ़ा दिया और इसलिए उन्हें परमेश्वर द्वारा दंडित किया गया। कोई फर्क नहीं पड़ता कि कैसे फरीसियों ने प्रभु की निंदा या विरोध किया, हालांकि, प्रभु का दिखाई देना और कार्य तथ्य हैं, और उन्होंने पूरी मानव जाति को छुटकारे का कार्य पूरा किया। इसलिए, चाहे परमेश्वर प्रकट हुए हों और कार्य कर रहे हों, यह इस आधार पर निर्धारित नहीं किया जा सकता है कि लोग इसे स्वीकार करते हैं या नहीं, लेकिन यह परमेश्वर के कार्य के तथ्यों पर आधारित है। आपदाएँ अब एक लगातार घटना है, इसराइल राज्य फिर से स्तापित हो गया है, और चार रक्त चंद्रमा देखे गए हैं—ये सभी चीजें प्रभु के आने की भविष्यवाणियों की पूर्ति हैं। यदि प्रभु वापस आ गए है और फिर भी हम अभी भी एक बादल पर उतरने के लिए उनका बेसब्री से इंतजार करते हैं, तो क्या हम फरीसियों की समान गलतियों को दोहराने के जोखिम में नहीं होंगे जब उन्होंने प्रभु यीशु का विरोध किया था? जैसे परमेश्वर का वचन कहता हैं: "मैं तुम लोगों से आगे पूछता हूँ : क्या तुम लोगों के लिए वो ग़लतियां करना बेहद आसान नहीं, जो बिल्कुल आरंभ के फरीसियों ने की थीं, क्योंकि तुम लोगों के पास यीशु की थोड़ी-भी समझ नहीं है? क्या तुम सत्य का मार्ग जानने योग्य हो? क्या तुम सचमुच विश्वास दिला सकते हो कि तुम मसीह का विरोध नहीं करोगे? क्या तुम पवित्र आत्मा के कार्य का अनुसरण करने योग्य हो? यदि तुम नहीं जानते कि तुम मसीह का विरोध करोगे या नहीं, तो मेरा कहना है कि तुम पहले ही मौत की कगार पर जी रहे हो। जो लोग मसीहा को नहीं जानते थे, वे सभी यीशु का विरोध करने, यीशु को अस्वीकार करने, उसे बदनाम करने में सक्षम थे। जो लोग यीशु को नहीं समझते, वे सब उसे अस्वीकार करने एवं उसे बुरा-भला कहने में सक्षम हैं। इसके अलावा, वे यीशु के लौटने को शैतान द्वारा किए गए धोखे की तरह देखने में सक्षम हैं और अधिकांश लोग देह में लौटे यीशु की निंदा करेंगे। क्या इस सबसे तुम लोगों को डर नहीं लगता?"

वास्तव में, जैसे कि वास्तव में प्रभु अंतिम दिनों में कैसे आएंगे, एक बादल पर उतरते हुए प्रभु के बारे में बाइबिल में भविष्यवाणियों के अलावा, अन्य भविष्यवाणियां हैं जो प्रभु के गुप्त रूप से आने के बारे में बताती हैं: "आधी रात को धूम मची, कि देखो, दूल्हा आ रहा है, उससे भेंट करने के लिये चलो" (मत्ती 25:6)। "यदि तू जागृत न रहेगा तो मैं चोर के समान आ जाऊँगा और तू कदापि न जान सकेगा, कि मैं किस घड़ी तुझ पर आ पड़ूँगा" (प्रकाशितवाक्य 3:3)। "देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा, और वह मेरे साथ" (प्रकाशितवाक्य 3:20)। पवित्रशास्त्र के इन वचनो में शब्द, "आधी रात को धूम मची" और "मैं चोर के समान आ जाऊँगा" यह दिखाते है कि जब प्रभु वापस आएगे, तो वह शांत तरीके से आएगे, कि वह मानव जाति के बीच गुप्त रूप से उतरेगे, और उनके वचनो के साथ हमारे दरवाजे पर दस्तक देगे। अंतिम दिनों में यदि प्रभु एक बादल पर उतर कर हमारे सामने प्रकट होते है तोह फिर, ये भविष्यवाणियाँ कैसे पूरी होंगी? यदि प्रभु बादल पर आए, तो क्या उन्हें हमारे दरवाजा खटखटाने की कोई आवश्यकता होगी? यदि प्रभु बादलोपर उतरकर आते है और सभी को प्रकट है, तो कोई भी उनका विरोध करने की हिम्मत नहीं करेगा, और सभी उसके चरणों में गिरेंगे। अगर ऐसा हुआ, तो फिर कैसे बाइबिल की भविष्यवाणियाँ जो प्रभु के कार्य की है जब वह वापस आते है तब गेहू को भूसे से, बकरियों को भेड़ से, और मूर्ख कुंवारी से बुद्धिमान कुंवारियों को अलग करने के कार्य के बारे में है यह कैसे पूरी होंगी? इसलिए हम भविष्यवाणी के कुछ वचनो को नहीं ले सकते हैं और उनका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए नही कर सकते हैं कि जब प्रभु वापस लौटते है, तो एक सफेद बादल पर उतरते हुए हमें दिखाई देंगे, ऐसा करने से हम परमेश्वर की इच्छा को गलत समझने के लिए उपयुक्त होंगे।

परमेश्वर कहाँ है? हम परमेश्वर के प्रकटन की तलाश कैसे कर सकते हैं?

हम परमेश्वर के प्रकटन की तलाश कैसे कर सकते हैं?

बाइबल की भविष्यवाणियों पर हमारी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए, हमने सिर्फ इस बारे में बात की कि कैसे प्रभु दूसरे तरीके से लौटेंगे, जो कि गुप्त रूप से आता है। तो हमें परमेश्वर के स्वरूप की तलाश कैसे करनी चाहिए? प्रभु यीशु ने कहा: "मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे-पीछे चलती हैं" (यूहन्ना 10:27)। प्रकाशित वाकय में कई बार भविष्यवाणी की गई है की "जिसके कान हों, वह सुन ले कि पवित्र आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है" (प्रकाशितवाक्य 2, 3)। हम प्रभु के वचनो और प्रकाशितवाक्य में भविष्यवाणियों से देख सकते हैं कि, प्रभु के दर्शन के लिए, हम केवल प्रभु के बादल में उतरने के लिए निष्क्रिय प्रतीक्षा नहीं कर सकते। इसके बजाय, हमें परमेश्‍वर की आवाज़ को सुनना सीखना चाहिए और पवित्र आत्मा कलीसिया से क्या कहना चाहता है खोजना चाइये। आइए एक नज़र डालते हैं कि परमेश्वर के वचन क्या कहते हैं: "परमेश्वर कहाँ प्रकट होता है? परमेश्वर के पदचिह्न कहाँ हैं? क्या तुम लोगों को उत्तर मिल गया है? बहुत-से लोग इस तरह उत्तर देंगे : 'परमेश्वर उन सभी के बीच प्रकट होता है, जो उसका अनुसरण करते हैं और उसके पदचिह्न हमारे बीच में हैं; यह इतना आसान है!' कोई भी फार्मूलाबद्ध उत्तर दे सकता है, किंतु क्या तुम लोग समझते हो कि परमेश्वर के प्रकटन या उसके पदचिह्नों का क्या अर्थ है? परमेश्वर का प्रकटन व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य करने के लिए उसके पृथ्वी पर आगमन को संदर्भित करता है। अपनी स्वयं की पहचान और स्वभाव के साथ, और अपने जन्मजात तरीके से वह एक युग का आरंभ करने और एक युग का अंत करने के कार्य का संचालन करने के लिए मनुष्यजाति के बीच उतरता है। इस तरह का प्रकटन किसी समारोह का रूप नहीं है। यह कोई संकेत, कोई तसवीर, कोई चमत्कार या किसी प्रकार का भव्य दर्शन नहीं है, और यह किसी प्रकार की धार्मिक प्रक्रिया तो बिलकुल भी नहीं है। यह एक असली और वास्तविक तथ्य है, जिसे किसी के भी द्वारा छुआ और देखा जा सकता है। इस तरह का प्रकटन बेमन से किसी कार्य को करने के लिए, या किसी अल्पकालिक उपक्रम के लिए नहीं है; बल्कि यह उसकी प्रबंधन योजना में कार्य के एक चरण के वास्ते है।

"चूँकि हम परमेश्वर के पदचिह्नों की खोज कर रहे हैं, इसलिए हमारा कर्तव्य बनता है कि हम परमेश्वर की इच्छा, उसके वचन और कथनों की खोज करें—क्योंकि जहाँ कहीं भी परमेश्वर द्वारा बोले गए नए वचन हैं, वहाँ परमेश्वर की वाणी है, और जहाँ कहीं भी परमेश्वर के पदचिह्न हैं, वहाँ परमेश्वर के कर्म हैं। जहाँ कहीं भी परमेश्वर की अभिव्यक्ति है, वहाँ परमेश्वर प्रकट होता है, और जहाँ कहीं भी परमेश्वर प्रकट होता है, वहाँ सत्य, मार्ग और जीवन विद्यमान होता है। परमेश्वर के पदचिह्नों की तलाश में तुम लोगों ने इन वचनों की उपेक्षा कर दी है कि 'परमेश्वर सत्य, मार्ग और जीवन है।' और इसलिए, बहुत-से लोग सत्य को प्राप्त करके भी यह नहीं मानते कि उन्हें परमेश्वर के पदचिह्न मिल गए हैं, और वे परमेश्वर के प्रकटन को तो बिलकुल भी स्वीकार नहीं करते। कितनी गंभीर ग़लती है! परमेश्वर के प्रकटन का समाधान मनुष्य की धारणाओं से नहीं किया जा सकता, और परमेश्वर मनुष्य के आदेश पर तो बिलकुल भी प्रकट नहीं हो सकता। परमेश्वर जब अपना कार्य करता है, तो वह अपनी पसंद और अपनी योजनाएँ बनाता है; इसके अलावा, उसके अपने उद्देश्य और अपने तरीके हैं। वह जो भी कार्य करता है, उसके बारे में उसे मनुष्य से चर्चा करने या उसकी सलाह लेने की आवश्यकता नहीं है, और अपने कार्य के बारे में हर-एक व्यक्ति को सूचित करने की आवश्यकता तो उसे बिलकुल भी नहीं है। यह परमेश्वर का स्वभाव है, जिसे हर व्यक्ति को पहचानना चाहिए।"

परमेश्वर के वचन हमें यह समझने की अनुमति देते हैं कि यदि हम परमेश्वर के प्रकटन को देखना चाहते हैं और परमेश्वर के पदचिन्हों को देखना चाहते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हम परमेश्वर की बातों को समझें। हम मानते थे कि प्रभु की उपस्थिति को देखने का मतलब है कि प्रभु के आध्यात्मिक शरीर को सफेद बादल पर सवार होना और हमारे सामने अचानक दिखाई देना। वास्तव में, मनुष्य को परमेश्वर दिखाई देना किसी भी चीज का संकेत नहीं है, और यह एक क्षणिक उपस्थिति नहीं है। इसके बजाय, परमेश्वर स्वयं मानव जाति को बचाने के लिए, पुराने युग को समाप्त करने के लिए, मनुष्य पर सच्चाई को उजागर करने और नए युग में मनुष्य का नेतृत्व करने के लिए मनुष्य के बीच उतरता है।अगर हमें परमेश्वर के नए कथन मिलते हैं, तो हम उसकी आवाज़ सुनेंगे और उसकी उपस्थिति का गवाह बनेंगे। जब प्रभु यीशु प्रकट हुए और कार्य किया, तो उन्होंने व्यवस्था के युग के कार्य को समाप्त कर दिया, नए युग की शुरुआत की, पश्चाताप का तरीका व्यक्त किया, लोगों को स्वीकार करना और पश्चाताप करना, सहिष्णु और धैर्यवान होना, और अपने दुश्मनों से प्यार करना, और बहुत कुछ सिखाया। उन्होंने स्वर्गीय राज्य के रहस्यों और स्वर्ग में प्रवेश के लिए शर्तों आदि का भी खुलासा किया। उन्होंने ऐसी बातें कही, "मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आया है" (मत्ती 4:17)। "जो मुझसे, 'हे प्रभु, हे प्रभु' कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है" (मत्ती 7:21)। ये वचन इस बात से संबंधित हैं कि हम स्वर्ग के राज्य में कैसे आते हैं, और वे अविश्वसनीय रूप से गहरा और साथ ही आधिकारिक और शक्तिशाली दोनों तरह से ध्वनि करते हैं। कोई भी इंसान इस तरह के वचन नहीं कह सकता था, बल्कि वे पृथ्वी पर अवतार लेने वाले परमेश्वर के भाव हैं। जिन लोगों ने प्रभु यीशु के उपदेश सुने, जो उन्हें परमेश्वर की आवाज़ के रूप में पहचानने और प्रभु यीशु के कार्य को स्वीकार करने में सक्षम थे, वे वही थे जिन्होंने परमेश्वर के दर्शन किए और उनके पदचिन्हों का अनुसरण किया। दूसरी ओर, वे जो सख़्ती से व्यवस्था में जकड़े हुए थे और केवल मसीहा के आने का इंतजार कर रहे थे, फिर भी उन्होंने यह मानने से इनकार कर दिया कि वे प्रभु यीशु के वचनों को सुनने के बावजूद परमेश्वर के रूप में हैं और उन्होंने देखा कि जो चमत्कार उन्होंने किया वोह मनुष्य द्वारा नही किया जा सकता है। लेकिन इसके बजाय उन्होंने प्रभु यीशु की निंदा की और न्याय किया, उन्होंने कहा कि वह ईशनिंदा करते हैं और उन्होंने कहा कि बालजबुल की शक्ति से शैतानों को बाहर निकालते हैं। ये लोग परमेश्वर की आवाज़ को पहचानने में असमर्थ थे और मूर्ख कुंवारी थे, और वे वे थे जिन्हें परमेश्वर ने उजागर किया और समाप्त कर दिया। प्रभु के स्वरूप को अभिवादन करने के लिए, यह आवश्यक है कि हम परमेश्वर की वाणी को ध्यान रखें। प्रभु यीशु ने बहुत पहले भविष्यवाणी की थी कि जब वह लौटेगे तो अधिक सच्चाई व्यक्त करेगे, उदाहरण के लिए: "मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (यूहन्ना 16:12-13)। "जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैंने कहा है, वह अन्तिम दिन में उसे दोषी ठहराएगा" (यूहन्ना 12:48)। यूहन्ना 17:17, में उसने कहा "सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर: तेरा वचन सत्य है।" और 1 पतरस 4:17 कहता है "क्योंकि वह समय आ पहुँचा है, कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए।" इन वचनो से हमें पता चलता है कि जब प्रभु लौटेंगे, तो वे हमारे समझ के अनुसार, अनुग्रह के युग में व्यक्त किए गए सत्य की तुलना में अधिक और उच्च सत्य व्यक्त करेंगे। यानी वह इजहार करेगे "कि पवित्र आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है" और वह परमेश्वर के घर में शुरू होने वाले न्याय का कार्य करेगे। वह हमारे द्वारा हमारे भ्रष्टाचारों को साफ करने, हमें पाप के बंधनों से मुक्त करने और हमें शुद्ध करने के लिए व्यक्त की गई सच्चाइयों का उपयोग करेगे ताकि हम परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर सकें। इसलिए, प्रभु की उपस्थिति को अभिवादन करना, इसलिए, हमारा जरूरी काम है कि कलीसियाओं को पवित्र आत्मा क्या कहती है इसकी खोज करना।

परमेश्वर अब प्रकट हुए है और कार्य कर रहे है-क्या आपने उनकी आवाज पहचानी है?

पवित्र आत्मा कलीसिया से क्या कहना चाहता है इस की खोज हम कहा करे? सच्चाई यह है कि प्रभु बहुत पहले सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में लौट आए है, जो आखिरी दिनों के मसीह है। 1991 में, उन्होंने मनुष्य के पुत्र के रूप में अवतार लिया और अपना काम करने के लिए चीन में दिखाई दिए। उन्होंने मानव जाति को शुद्ध करने और बचाने के लिए सभी सत्य व्यक्त किए हैं, उन्होंने परमेश्वर के घर में शुरू होने वाले न्याय का काम किया है, और उन्होंने अनुग्रह के युग को समाप्त कर दिया है और राज्य का युग शुरू की है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर का राज्य सुसमाचार अब पश्चिम में पहुंच गया है, और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनो का २० से अधिक भाषाओं में अनुवाद किया गया है जो सभी मानव जाति की तलाश और जांच के लिए ऑनलाइन प्रकाशित होते हैं। इसने बाइबल में भविष्यवाणी को पूरा किया है जो कहता है, "क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्चिम तक चमकती जाती है, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा" (मत्ती 24:27)। अंतिम दिनों में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने परमेश्वर के छह हज़ार साल के प्रबंधन कार्य के रहस्य का खुलासा किया है, जिसने परमेश्वर के प्रति मनुष्यों के प्रतिरोध की पापपूर्ण जड़ को उजागर किया, और हमें शुद्ध और बचाया जाने का मार्ग दिखाया। ये सत्य ही सच्ची रोशनी है जो पूरब से निकलती है और पश्चिम तक भी चमकती है। आइए अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनो के कुछ अंश पढ़ें, और हम स्वयं देखेंगे कि क्या वे सत्य हैं, और क्या वे परमेश्वर की वाणी हैं।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "मेरे कार्य के कई वर्षों के दौरान, मनुष्य ने बहुत अधिक प्राप्त किया और बहुत त्याग किया है, फिर भी मैं कहता हूँ कि लोग मुझ पर वास्तव में विश्वास नहीं करते। क्योंकि लोग केवल यह मानते हैं कि मैं परमेश्वर हूँ जबकि मेरे द्वारा बोले गए सत्य से वे असहमत होते हैं, और वे उन सत्‍यों का भी अभ्‍यास नहीं करते, जिनकी अपेक्षा मैं उनसे करता हूँ। कहने का अर्थ है कि मनुष्य केवल परमेश्वर के अस्तित्व को ही स्वीकार करता है, लेकिन सत्य के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता; मनुष्य केवल परमेश्वर के अस्तित्व को ही स्वीकार करता है परन्तु जीवन के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता, मनुष्य केवल परमेश्वर के नाम को स्वीकार करता है परन्तु उसके सार को स्वीकार नहीं करता। अपने उत्साह के कारण, मनुष्य मेरे लिए घृणित बन गया है। क्योंकि वह केवल मुझे धोखा देने के लिए कानों को अच्छे लगने वाले शब्द बोलता है; कोई भी सच्चे हृदय से मेरी आराधना नहीं करता। तुम लोगों के शब्‍दों में दुष्ट व्यक्ति का प्रलोभन है; इसके अलावा, इंसान बेहद अहंकारी है, प्रधान स्वर्गदूत की यह पक्की उद्घोषणा है। इतना ही नहीं, तुम्हारे कर्म हद दर्जे तक तार-तार हो चुके हैं; तुम लोगों की असंयमित अभिलाषाएँ और लोलुप अभिप्राय सुनने में अपमानजनक हैं। तुम सब लोग मेरे घर में कीड़े और घृणित त्याज्य वस्तु बन गए हो। क्योंकि तुम लोगों में से कोई भी सत्य का प्रेमी नहीं है, बल्कि तुम इंसान हो जो आशीष चाहता है, स्वर्ग में जाना चाहता है, और पृथ्वी पर अपने सामर्थ्य का उपयोग करते हुए मसीह के दर्शन करना चाहता है। क्या तुम लोगों ने कभी सोचा है कि कोई तुम लोगों के समान व्यक्ति, जो इतनी गहराई तक भ्रष्ट हो चुका है, और जो नहीं जानता कि परमेश्वर क्या है, वह परमेश्वर का अनुसरण करने योग्य कैसे हो सकता है? तुम लोग स्वर्ग में कैसे आरोहण कर सकते हो? तुम लोग उस महिमा को देखने योग्य कैसे बन सकते हो, जो अपने वैभव में अभूतपूर्व है।"

"परमेश्वर पर तुम लोगों के विश्वास का प्रयोजन तुम्हारे अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए परमेश्वर का उपयोग करना है। क्या यह तुम्हारे द्वारा परमेश्वर के स्वभाव के अपमान का एक और तथ्य नहीं है? तुम लोग स्वर्ग के परमेश्वर के अस्तित्व में विश्वास करते हो, परंतु पृथ्वी के परमेश्वर के अस्तित्व से इनकार करते हो; लेकिन मैं तुम लोगों के विचार स्वीकार नहीं करता; मैं केवल उन लोगों की सराहना करता हूँ, जो अपने पैरों को ज़मीन पर रखते हैं और पृथ्वी के परमेश्वर की सेवा करते हैं, किंतु उनकी सराहना कभी नहीं करता, जो पृथ्वी के मसीह को स्वीकार नहीं करते। ऐसे लोग स्वर्ग के परमेश्वर के प्रति कितने भी वफादार क्यों न हों, अंत में वे दुष्टों को दंड देने वाले मेरे हाथ से बचकर नहीं निकल सकते। ये लोग दुष्ट हैं; ये वे बुरे लोग हैं, जो परमेश्वर का विरोध करते हैं और जिन्होंने कभी खुशी से मसीह का आज्ञापालन नहीं किया है। निस्संदेह, उनकी संख्या में वे सब सम्मिलित हैं जो मसीह को नहीं जानते, और इसके अलावा, उसे स्वीकार नहीं करते।"

"मैं तुम लोगों को बता दूँ कि जो परमेश्वर में संकेतों की वजह से विश्वास करते हैं, वे निश्चित रूप से वह श्रेणी होगी, जो नष्ट की जाएगी। जो देह में लौटे यीशु के वचनों को स्वीकार करने में अक्षम हैं, वे निश्चित ही नरक के वंशज, महादूत के वंशज हैं, उस श्रेणी में हैं, जो अनंत विनाश झेलेगी। बहुत से लोगों को शायद इसकी परवाह न हो कि मैं क्या कहता हूँ, किंतु मैं ऐसे हर तथाकथित संत को, जो यीशु का अनुसरण करते हैं, बताना चाहता हूँ कि जब तुम लोग यीशु को एक श्वेत बादल पर स्वर्ग से उतरते अपनी आँखों से देखोगे, तो यह धार्मिकता के सूर्य का सार्वजनिक प्रकटन होगा। शायद वह तुम्हारे लिए एक बड़ी उत्तेजना का समय होगा, मगर तुम्हें पता होना चाहिए कि जिस समय तुम यीशु को स्वर्ग से उतरते देखोगे, यही वह समय भी होगा जब तुम दंडित किए जाने के लिए नीचे नरक में जाओगे। वह परमेश्वर की प्रबंधन योजना की समाप्ति का समय होगा, और वह समय होगा, जब परमेश्वर सज्जन को पुरस्कार और दुष्ट को दंड देगा। क्योंकि परमेश्वर का न्याय मनुष्य के देखने से पहले ही समाप्त हो चुका होगा, जब सिर्फ़ सत्य की अभिव्यक्ति होगी। वे जो सत्य को स्वीकार करते हैं और संकेतों की खोज नहीं करते और इस प्रकार शुद्ध कर दिए गए हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौट चुके होंगे और सृष्टिकर्ता के आलिंगन में प्रवेश कर चुके होंगे। सिर्फ़ वे जो इस विश्वास में बने रहते हैं कि 'ऐसा यीशु जो श्वेत बादल पर सवारी नहीं करता, एक झूठा मसीह है' अनंत दंड के अधीन कर दिए जाएँगे, क्योंकि वे सिर्फ़ उस यीशु में विश्वास करते हैं जो संकेत प्रदर्शित करता है, पर उस यीशु को स्वीकार नहीं करते, जो कड़े न्याय की घोषणा करता है और जीवन का सच्चा मार्ग बताता है। इसलिए केवल यही हो सकता है कि जब यीशु खुलेआम श्वेत बादल पर वापस लौटे, तो वह उनके साथ निपटे। वे बहुत हठधर्मी, अपने आप में बहुत आश्वस्त, बहुत अभिमानी हैं। ऐसे अधम लोग यीशु द्वारा कैसे पुरस्कृत किए जा सकते हैं?"

अब जब हमने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के इन वचनो को पढ़ा है जो मनुष्य का न्याय और निष्कासन करते हैं, मुझे विश्वास है कि जो भाई और बहन दोनों हृदय और आत्मा से युक्त हैं वे परमेश्वर के वचनो में अधिकार और शक्ति का अनुभव कर सकेंगे और परमेश्वर का धर्मी स्वभाव का रूप देख सकेंगे। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनो ने हमारे सत्य से दूर होने, लालची होने, धोखेबाज होने, अभिमानी और घमंडी होने, और अधिक, साथ ही साथ हम परमेश्वर में अपनी गलत आस्था रखते हैं इन सब गलत स्वभाव को उजागर किया है। हम मानते थे कि मेहनत करके और परिश्रम करके, सब कुछ त्याग कर, और दुख झेलकर और कीमत चुकाकर हम परमेश्वर से सबसे ज्यादा प्यार करते थे। केवल परमेश्वर के वचनों के न्याय को स्वीकार करने से हम देखते हैं कि हमारे स्वभाव बहुत ही घमंडी हैं, और जब परमेश्वर का रूप और कार्य हमारी अपनी धारणाओं के अनुरूप होने में विफल होते हैं, तो हम अपने स्वयं के विचारों और कल्पनाओं के साथ परमेश्वर के कार्य को परिसीमन करने के लिए इतनी दूर जाते हैं। हम यह भी देख सकते हैं कि परमेश्वर में हमारी आस्था बहुत ही कम है; हम परमेश्वर में विश्वास नहीं करते हैं ताकि हम सत्य को प्राप्त कर सकें और उसका प्यार चुका सकें, बल्कि इसलिए कि हम आशीष प्राप्त कर सकें, आपदाओं से बच सकें और स्वर्ग के राज्य में पहुँच सकें। यद्यपि हम परमेश्वर के लिए स्वयं को खर्च करने में सक्षम हो सकते हैं, फिर भी हम वास्तव में परमेश्वर का पालन नहीं करते हैं या परमेश्वर से प्रेम करते हैं। जब परमेश्वर हमें आशीष देता है, तो हम उसके लिए खुद को खर्च करना चाहते हैं, लेकिन जब प्रतिकूलता और परीक्षण हमें प्रभावित करते हैं, तो हम खुद को शिकायत करने और परमेश्वर को दोष देने से रोक नहीं पाते हैं, और हम परमेश्वर पर संदेह करते हैं और उसे नकारते हैं। इन वचनो के न्याय के बिना, हमारे पास कोई आत्म-ज्ञान नहीं होगा, और हम अभी भी अपनी प्रशंसा खुद गाएंगे, खुद को ऐसे लोग मानते हैं जो परमेश्वर को प्यार और आज्ञा मानते हैं, और जिन्हें स्वर्ग के राज्य में उठाया जाएगा जब प्रभु लौटते है। जब हम परमेश्वर के वचनों को स्वीकार कर लेते हैं, तब हमें यह पता चलता है कि परमेश्वर कितना पवित्र और धर्मी है। हम जानते हैं कि सत्य का पीछा नहीं करना या परमेश्वर में हमारे विश्वास में अपने आप को पाप से मुक्त करना नहीं है, बल्कि यह मानना है कि केवल आशीष प्राप्त करना और अनुग्रह प्राप्त करना, परमेश्वर का उपयोग करना और उसके स्वभाव को ठेस पहुंचाना है। हम अब यह कहने की हिम्मत नहीं करते कि हम परमेश्वर के आज्ञाकारी हैं, और हमें लगता है कि हम बहुत गहराई से भ्रष्ट हो चुके हैं, और हमें सच्चाई का पीछा करने, अपने देह को त्यागने और अपने भ्रष्ट विचारों को दूर करने की जल्दी करनी चाहिए। उसी समय, हम महान देखभाल को समझते हैं और सोचते है कि आखिरी दिनों का मसीह सच्चाई को व्यक्त करने और मानव जाति का न्याय करने में लगाता है। हमें यह समझ में आता है कि, भले ही मनुष्य के लिए परमेश्वर के न्याय के वचन कठोर हों, वे सभी बोले जाते हैं ताकि हम स्वयं को प्रतिबिंबित कर सकें और सच्चा पश्चाताप और परिवर्तन प्राप्त कर सकें। परमेश्वर के धर्मी स्वभाव के भीतर हमारे लिए परमेश्वर की दया मिल सकती है। यदि हम परमेश्वर के न्याय और ताड़ना का अनुभव नहीं करते हैं, तो हम कभी यह नहीं देख पाएंगे कि शैतान ने हमें कितनी गहराई से भ्रष्ट किया है, हम कभी भी परमेश्वर के धर्मी, राजसी स्वभाव को नहीं जान पाएंगे, जो कोई अपराध नहीं करता है,हमारे भीतर परमेश्वर से डरने वाला दिल नहीं उभरेगा, और हम कभी भी अपने आप को पाप के बंधनों से मुक्त नहीं कर पाएंगे और लोग वास्तव में परमेश्वर के आज्ञाकारी बन जाएंगे। क्या यह उनके वचनो को व्यक्त करने वाले परमेश्वर के अवतार के लिए नहीं थे, जिनके वचन परमेश्वर के पवित्र और धार्मिक स्वभाव को प्रकट कर सकते हैं जो कोई अपराध नहीं करता है? और कौन उनके वचनो के साथ हमारे भ्रष्ट सार का न्याय और खुलासा कर सकता है? सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सभी सत्य अंतिम दिनों में व्यक्त होते हैं जो मनुष्य को परमेश्वर की पहचान और स्थिति को पूरी तरह से न्याय और शुद्ध करते हैं; उनकी सच्चाई मनुष्य के लिए न्याय और निंदा है, लेकिन वे शुद्धि और उद्धार भी हैं। अंतिम दिनों में और महान क्लेश के आने से पहले, परमेश्वर अपने वचनो का उपयोग उन लोगों की तलाश में करता है जो उनकी उपस्थिति के लिए तरसते हैं। यह नूह के समय की तरह ही है। महान बाढ़ से पहले, परमेश्वर ने लोगों को बचाने के लिए सुसमाचार को फैलाने के लिए नूह को आज्ञा दी, और जो लोग सुसमाचार को स्वीकार करने में सक्षम थे और जिन्होंने परमेश्वर के वचन पर विश्वास किया बच गए। नूह के परिवार के आठ सदस्यों ने उनकी बातें सुनीं और उनकी बात मानी। वे जहाज़ पर चढ़ गए और इसलिए बच गए, जबकि जो लोग तथ्यों को नहीं देखते थे और इसलिए विश्वास नहीं करते थे कि वे बाढ़ से नष्ट हो गए हैं। अब आखिरी दिनों में, जो लोग आखिरी दिनों के मसीह के वचनो के न्याय को स्वीकार करते हैं, उन्हें शुद्ध किया और बदल दिया जाता है। महान क्लेश आने से पहले उन्हें परमेश्वर द्वारा विजेताओं में बनाया जाता है, वे अगले युग में परमेश्वर के नेतृत्व में होते हैं और उन्हें परमेश्वर का आशीष और वादा विरासत में मिलता है। एक बार जब परमेश्वर ने विजेताओं का एक समूह बना लिया, तो परमेश्वर महान क्लेश को शुरू कर देंगे और वह अच्छे लोगों को पुरस्कृत करेगे और दुष्टों को दंड देंगे। वह एक बादल पर आएगा और खुद को मनुष्य के लिए खुले तौर पर प्रकट करेगा, और जिन्होंने अभी तक प्रभु के एक बादल पर उतरने की प्रतीक्षा की है और जिन्होंने परमेश्वर के गुप्त कार्य को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, इस समय आपदाओं में बह जाएंगे और दंडित होंगे, वहा पर दांत पीसना और रोना होगा। यह बाइबल में भविष्यवाणी की पूर्ति होगी जो कहती है, "तब मनुष्य के पुत्र का चिन्ह आकाश में दिखाई देगा, और तब पृथ्वी के सब कुलों के लोग छाती पीटेंगे; और मनुष्य के पुत्र को बड़ी सामर्थ्य और ऐश्वर्य के साथ आकाश के बादलों पर आते देखेंगे" (मत्ती 24:30)।

फिर हमें अंतिम दिनों में परमेश्वर के काम से कैसे संपर्क करना चाहिए ताकि हम परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हो सकें? सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "यीशु की वापसी उन लोगों के लिए एक महान उद्धार है, जो सत्य को स्वीकार करने में सक्षम हैं, पर उनके लिए जो सत्य को स्वीकार करने में असमर्थ हैं, यह दंडाज्ञा का संकेत है। तुम लोगों को अपना स्वयं का रास्ता चुनना चाहिए, और पवित्र आत्मा के ख़िलाफ़ निंदा नहीं करनी चाहिए और सत्य को अस्वीकार नहीं करना चाहिए। तुम लोगों को अज्ञानी और अभिमानी व्यक्ति नहीं बनना चाहिए, बल्कि ऐसा बनना चाहिए, जो पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन का पालन करता हो और सत्य की खोज के लिए लालायित हो; सिर्फ़ इसी तरीके से तुम लोग लाभान्वित होगे। मैं तुम लोगों को परमेश्वर में विश्वास के रास्ते पर सावधानी से चलने की सलाह देता हूँ। निष्कर्ष पर पहुँचने की जल्दी में न रहो; और परमेश्वर में अपने विश्वास में लापरवाह और विचारहीन न बनो। तुम लोगों को जानना चाहिए कि कम से कम, जो परमेश्वर में विश्वास करते हैं उन्हें विनम्र और श्रद्धावान होना चाहिए। जिन्होंने सत्य सुन लिया है और फिर भी इस पर अपनी नाक-भौं सिकोड़ते हैं, वे मूर्ख और अज्ञानी हैं। जिन्होंने सत्य सुन लिया है और फिर भी लापरवाही के साथ निष्कर्षों तक पहुँचते हैं या उसकी निंदा करते हैं, ऐसे लोग अभिमान से घिरे हैं। जो भी यीशु पर विश्वास करता है वह दूसरों को शाप देने या निंदा करने के योग्य नहीं है। तुम सब लोगों को ऐसा व्यक्ति होना चाहिए, जो समझदार है और सत्य स्वीकार करता है। शायद, सत्य के मार्ग को सुनकर और जीवन के वचन को पढ़कर, तुम विश्वास करते हो कि इन 10,000 वचनों में से सिर्फ़ एक ही वचन है, जो तुम्हारे दृढ़ विश्वास और बाइबल के अनुसार है, और फिर तुम्हें इन 10,000 वचनों में खोज करते रहना चाहिए। मैं अब भी तुम्हें सुझाव देता हूँ कि विनम्र बनो, अति-आत्मविश्वासी न बनो और अपनी बहुत बढ़ाई न करो। परमेश्वर के लिए अपने हृदय में इतना थोड़ा-सा आदर रखकर तुम बड़े प्रकाश को प्राप्त करोगे। यदि तुम इन वचनों की सावधानी से जाँच करो और इन पर बार-बार मनन करो, तब तुम समझोगे कि वे सत्य हैं या नहीं, वे जीवन हैं या नहीं।" सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों में हमारे लिए उनकी अपेक्षाएँ निहित हैं। परमेश्वर उम्मीद करते हैं कि, जब हम अंतिम दिनों के उनके काम का सामना करें, तो हम इसे अपनी धारणाओं और कल्पनाओं के साथ परिसीमित नहीं करें, बल्कि यह कि हम सत्य के विनम्र खोजने वाले बन जाएँ, कि हम उन सच्चाइयों को सुनें जिन्हें परमेश्वर व्यक्त करते हैं, और यह पता लगाने की खोज करें कि क्या ये सत्य वास्तव में परमेश्वर की वाणी हैं। केवल ऐसा करने के द्वारा ही हम प्रभु के प्रकटण का अभिवादन करने के योग्य होंगे, क्योंकि यदि हम नहीं करते, तो हमने कई वर्षों तक परमेश्वर पर विश्वास करने में समय बिताया होगा केवल प्रभु का अभिवादन करने का यह अवसर खोने के लिए, और यह अफसोस के लिए बहुत देर होगी।

यदि आप प्रभु की वापसी के और अधिक रहस्यों को जानना चाहते हैं, तो कृपया हमारे "प्रभु की वापसी का रहस्य" पेज को पढ़ें या इससे संबंधित नीचे दी गई सामग्री के बारे में अधिक जानें।

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