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बचाए जाने और पूर्ण उद्धार प्राप्त करने के बीच अंतर

जब भी बचाये जाने और पूर्ण उद्धार प्राप्त करने के बीच अंतर का उल्लेख किया जाता है, तो शायद कुछ भाई-बहन ऐसे हों जो कहें, "क्या बचाए जाने और पूर्ण उद्धार प्राप्त करने के बीच कोई अंतर है? क्या बचाए जाने का मतलब पूर्ण उद्धार प्राप्त करना नहीं है? प्रभु यीशु में अपने विश्वास के माध्यम से हम बचाए गए हैं, तो क्या हमने पूर्ण उद्धार प्राप्त नहीं कर लिया है? जब प्रभु आयेंगे, तो हम तुरंत स्वर्ग में आरोहित कर लिए जाएंगे।" लेकिन क्या वास्तव में चीज़ें इतनी सरल हैं? इस विषय पर चर्चा करना और खोज करना हमारे लिए अच्छा रहेगा।

बचाए जाने का क्या अर्थ है

त्वरित नेविगेशन मेन्यू
1. बचाए जाने का क्या अर्थ है? क्या हम बचाए जाने के बाद पापरहित हो जाते हैं?
2. पूर्ण उद्धार प्राप्त करने का क्या अर्थ है? जो लोग पूर्ण उद्धार धारण करते हैं उनका आचरण कैसा होता है?
3. बचाए जाने और पूर्ण उद्धार प्राप्त करने के बीच अंतर
4. पूर्ण उद्धार प्राप्त करने के पथ की खोज

1. बचाए जाने का क्या अर्थ है? क्या हम बचाए जाने के बाद पापरहित हो जाते हैं?

आइये, पहले परमेश्वर के वचनों का एक अंश पढ़ें, "उस समय यीशु का कार्य समस्त मानवजाति को छुटकारा दिलाना था। उन सभी के पापों को क्षमा कर दिया गया था जो उसमें विश्वास करते थे; अगर तुम उस पर विश्वास करते हो, तो वह तुम्हें छुटकारा दिलाएगा; यदि तुम उस पर विश्वास करते, तो तुम पापी नहीं रह जाते, तुम अपने पापों से मुक्त हो जाते हो। यही बचाए जाने और विश्वास द्वारा उचित ठहराए जाने का अर्थ है। फिर विश्वासियों के अंदर परमेश्वर के प्रति विद्रोह और विरोध का भाव था, और जिसे अभी भी धीरे-धीरे हटाया जाना था। उद्धार का अर्थ यह नहीं था कि मनुष्य पूरी तरह से यीशु द्वारा प्राप्त कर लिया गया है, बल्कि यह था कि मनुष्य अब पापी नहीं रह गया है, उसे उसके पापों से मुक्त कर दिया गया है। अगर तुम विश्वास करते हो, तो तुम फिर कभी भी पापी नहीं रहोगे।" परमेश्वर के वचनों से, हम देख सकते हैं कि चूँकि प्रभु यीशु ने छुटकारे का कार्य किया था इसलिए हम प्रभु में अपनी आस्था के कारण बचाए जाते हैं। प्रभु ने स्वयं को पापबलि के रूप में दे दिया और उन्हें क्रूस पर चढ़ाया गया था और इस तरह उन्होंने हमें पाप से छुड़ाया। इसलिए, प्रभु में विश्वास करने से, हम अब पापी नहीं रह गये हैं और व्यवस्था से बंधे हुए नहीं हैं। अब जब हम पाप करते हैं, तो हम परमेश्वर से प्रार्थना करने के लिए सीधे उनके सामने आने में सक्षम हो गये हैं, और हम प्रभु से हमें क्षमा करने का आग्रह कर सकते हैं। बचाये जाने का मतलब यही है।

तो क्या हम बचाए जाने के बाद पापरहित हो गये हैं? हम अपने स्वयं के अनुभवों से देख सकते हैं कि भले ही हम कठिन परिश्रम करें, बाहरी तौर पर कुछ अच्छे काम करें, फिर भी हम बार-बार पाप करने में सक्षम हैं, और हम पाप के बंधन से बाहर नहीं निकले हैं। हमारे जीवन स्वभाव हमेशा के जैसे ही हैं, और जिस पल हमारा सामना किसी ऐसी चीज़ से होता है जो हमारे स्वयं के विचारों के विपरीत हो या हमारे हितों के साथ संघर्ष करे, तो हम कई भ्रष्ट स्वभावों को उजागर करते हैं और, परिणामस्वरूप, हम परमेश्वर के प्रति विद्रोह और उनका विरोध करते हैं। उदाहरण के लिए, कलीसिया के भीतर, जब भी कोई ऐसा व्यक्ति धर्मोपदेश देता है जिससे प्रतीत होता है कि वो हमसे अधिक प्रतिभाशाली है, तब हम उससे ईर्ष्या महसूस करते हैं या हम उसे चुपके से कमज़ोर करने का प्रयास करते हैं; जब कोई और हमारे हितों के विपरीत जाता है, तो हम उससे घृणा करते हैं और मामले गम्भीर हों तो हम उससे क्रोधित होकर प्रतिशोध लेने पर आ जाते हैं; जब भी हम किसी चीज़ का त्याग करते हैं या प्रभु के लिए अपने काम में स्वयं को थोड़ा खपाते हैं, तो हम अपनी उपलब्धियों का दिखावा करते हैं और परमेश्वर को शर्तों में बांधते हैं, या फिर हम अन्य लोगों का तिरस्कार और उनसे घृणा करते हैं; जब भी हमें अपने काम और धर्मोपदेशों में पवित्र आत्मा का प्रबोधन प्राप्त होता है और हम परिणाम प्राप्त करते हैं, तो हम अपने आप से बहुत प्रसन्न हो जाते हैं और हम परमेश्वर की महिमा को हड़प लेते हैं; कष्ट भोगने और मूल्य चुकाने के बदले में जब हमें कुछ नहीं मिलता और हमारे निजी हित तुष्ट नहीं होते, तो यह विश्वास करते हुए कि परमेश्वर हमारी रक्षा नहीं कर रहे हैं या हमें आशीर्वाद नहीं दे रहे हैं, हम उन्हें दोष देते हैं, उन्हें गलत समझते हैं; जब हम ऐसा कुछ करते हैं जो परमेश्वर की आज्ञाओं का उल्लंघन करता है, तो हम डरते हैं कि दूसरों को पता चल जाएगा, इसलिए हम झूठ बोलते हैं ताकि दूसरों को और परमेश्वर को धोखा दे सकें; अगर हम सोचते हैं कि कई वर्षों से परमेश्वर पर विश्वास करने पर भी परमेश्वर ने हम पर पर्याप्त कृपा नहीं की है, तो हम दुनिया के तरीकों का अनुसरण करने लगते हैं और हम परमेश्वर को धोखा देते हैं, इत्यादि। इस तरह के व्यवहार और अभिव्यक्ति यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि हम अभी भी पाप और शैतान की शक्ति के अधीन रहते हैं; वे साबित करते हैं कि हमारी प्रकृति अभी भी एक शैतानी प्रकृति है, कि हमारे विचार और दृष्टिकोण दुनिया से संबंधित हैं, कि हम मनमाने ढंग से परमेश्वर के साथ विश्वासघात करने की और अपने विचारों के विपरीत की किसी परिस्थिति के कारण अपने सांसारिक जीवन में वापस लौटने की क्षमता रखते हैं।

पूर्ण उद्धार प्राप्त करने का क्या अर्थ है

2. पूर्ण उद्धार प्राप्त करने का क्या अर्थ है? जो लोग पूर्ण उद्धार धारण करते हैं उनका आचरण कैसा होता है?

आइए, पहले परमेश्वर के वचनों का एक अंश पढ़ें: "जब लोग शैतान की गंदी, भ्रष्ट चीज़ों को निकाल फेंकते हैं, तब वे परमेश्वर से उद्धार प्राप्त करते हैं। परंतु यदि वे गंदगी और भ्रष्टता से स्वयं को अब भी नहीं छुड़ाते हैं, तो वे अभी भी शैतान के अधिकार क्षेत्र के अधीन रह रहे हैं। लोगों की धूर्तता, छल-कपट, और कुटिलता सब शैतान की चीज़ें हैं। परमेश्वर द्वारा तुम्हारा उद्धार तुम्हें शैतान की इन चीज़ों से छुड़ाने के लिए है। परमेश्वर का कार्य ग़लत नहीं हो सकता है; यह सब लोगों को अंधकार से बचाने के लिए किया जाता है। ... जब तुम शैतान के अधिकार क्षेत्र के अधीन रहते हो, तब तुम परमेश्वर को प्रत्यक्ष रूप से व्यक्त करने में असमर्थ होते हो, तुम कोई गंदी चीज़ होते हो, और परमेश्वर की विरासत प्राप्त नहीं कर सकते हो। एक बार जब तुम्हें स्वच्छ कर दिया और पूर्ण बना दिया गया, तो तुम पवित्र हो जाओगे, तुम सामान्य व्यक्ति हो जाओगे, और तुम परमेश्वर द्वारा धन्य किए जाओगे और परमेश्वर के प्रति आनंद से परिपूरित होओगे।"

परमेश्वर के वचनों से, हम देख सकते हैं कि पूर्ण उद्धार प्राप्त करने का अर्थ है, पाप से मुक्त होना और शुद्ध किया जाना। अर्थात, जो लोग पूर्ण उद्धार प्राप्त करते हैं, वे केवल बाहरी तौर से कुछ अच्छे कर्म नहीं करते हैं, बल्कि उनके अभिमानी, स्वार्थी, धोखेबाज और दुष्ट आंतरिक स्वभाव बदल गए हैं, और वे परमेश्वर के वचनों के अनुसार जीने में, पूरी तरह से परमेश्वर के आयोजन और व्यवस्था के अधीन होने में सक्षम हैं, यहाँ तक कि मौत के कगार पर होने के खतरे का सामना करते हुए भी वे परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने में सक्षम होते हैं। वे फिर से शैतान की शक्ति के तहत जीवित रहने के बजाय मर जाना पसंद करेंगे, वे परमेश्वर के खिलाफ विद्रोह या विरोध करना बंद कर देते हैं। केवल इस तरह के लोग ही पूरी तरह से परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए गए हैं। जो लोग परमेश्वर के पूर्ण उद्धार को प्राप्त करते हैं, वे सत्य को समझते हैं, परमेश्वर को जानते हैं और परमेश्वर का आज्ञापालन कर सकते हैं; जो लोग पूर्ण उद्धार प्राप्त करते हैं, वे शैतान के सभी प्रलोभनों के बीच गवाही दे सकते हैं, सत्य के अनुसार जी सकते हैं, और परमेश्वर का भय मानते और बुराई से दूर रहते हैं; पूर्ण उद्धार पाने वाले लोग, परमेश्वर की इच्छा के प्रति विचारशील होते हैं, ईमानदारी से और सीधी बात करते हैं, दयालु होते हैं, परमेश्वर से प्रेम कर सकते हैं, उन्हें संतुष्ट कर सकते हैं, परमेश्वर के वचनों को अपने कार्यों और आचरण के लिए नियम के रूप में मानते हैं, वे वास्तविक मानवीय सदृश्ता को जी सकते हैं, परमेश्वर की महिमा कर सकते हैं और जो कुछ वे करते हैं, उसमें उन्हें प्रकट कर सकते हैं।

3. बचाए जाने और पूर्ण उद्धार प्राप्त करने के बीच अंतर

हमने अभी-अभी चर्चा की है कि बचाए जाने का क्या अर्थ है और बचाए जाने के बाद हम पापरहित होते हैं या नहीं, और हमने इस बात पर भी चर्चा की कि पूर्ण उद्धार प्राप्त करने का क्या अर्थ है और पूर्ण उद्धार प्राप्त करने वाले लोग किस प्रकार का व्यवहार व्यक्त करते हैं। मुझे विश्वास है कि सभी को बचाए जाने और पूर्ण उद्धार प्राप्त करने के बीच के अंतर के बारे में कुछ समझ मिल गयी होगी। बचाए जाने का मतलब है कि हम अब व्यवस्था द्वारा दोषी नहीं ठहराए जाते हैं, हम अब पापी नहीं हैं, हमें परमेश्वर द्वारा छुटकारा दिलाया गया है, हम परमेश्वर के सामने आने के योग्य हैं, लेकिन हम बाहरी तौर पर कुछ अच्छे काम कर भी लें, तो भी हमारी पापी प्रकृति हमारे भीतर गहराई से जमी रहती है। दूसरी ओर, पूर्ण उद्धार पाने का अर्थ है कि हमारे जीवन स्वभाव बदल गए हैं, हम सत्य को व्यवहार में लाने में सक्षम हैं, कि हम अब कोई पाप नहीं करते हैं, कि हम पूरी तरह से परमेश्वर के वचनों का पालन करने और परमेश्वर का आज्ञापालन करने में सक्षम हैं, हम परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता को जी सकते हैं, और हम शैतान के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हैं और स्वतंत्र हो गए हैं।

हम स्वर्ग के राज्य में किस प्रकार प्रवेश कर सकते हैं

इसके विपरीत, प्रभु में भाई-बहनों के रूप में हमारी वर्तमान स्थिति ऐसी है कि हम अभी भी विभिन्न प्रकार के भ्रष्ट स्वभावों के भीतर जी रहे हैं, और ऐसा जीवन जीते हैं जिसके तहत, हम दिन में पाप करते हैं और रात में अपने पापों को स्वीकार करते हैं। हम शैतान के बहकावे और प्रलोभनों को समझने में पूरी तरह से असमर्थ हैं, और हम अभी भी परमेश्वर के खिलाफ विद्रोह करने, उनका विरोध करने, उन्हें दोष देने और उन्हें गलत समझने में सक्षम हैं। हम जो जीवन जीते हैं, वह परमेश्वर की महिमा नहीं कर सकता है और न ही उन्हें किसी भी प्रकार से प्रकट कर सकता है, इसलिए ऐसा कैसे कहा जा सकता है कि हमने पूर्ण उद्धार प्राप्त किया है? परमेश्वर कहते हैं, "पवित्र बनो, क्योंकि मैं पवित्र हूँ" (1 पतरस 1:16) "जब तुम शैतान के अधिकार क्षेत्र के अधीन रहते हो, तब तुम परमेश्वर को प्रत्यक्ष रूप से व्यक्त करने में असमर्थ होते हो, तुम कोई गंदी चीज़ होते हो, और परमेश्वर की विरासत प्राप्त नहीं कर सकते हो। एक बार जब तुम्हें स्वच्छ कर दिया और पूर्ण बना दिया गया, तो तुम पवित्र हो जाओगे, तुम सामान्य व्यक्ति हो जाओगे, और तुम परमेश्वर द्वारा धन्य किए जाओगे और परमेश्वर के प्रति आनंद से परिपूरित होओगे।" परमेश्वर का सार पवित्र और धार्मिक है। परमेश्वर हमारे भीतर सभी प्रकार के पापों से घृणा करते हैं और हमारे भीतर की विभिन्न प्रकार की गन्दगी से नफरत करते हैं; हमारे जैसे गंदे और भ्रष्ट लोग परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने के लायक नहीं हैं। प्रभु में अपने विश्वास में, इन सभी गंदी और भ्रष्ट चीज़ों को खुद से दूर करने और शुद्ध होने से ही हम परमेश्वर की प्रशंसा अर्जित कर सकते हैं और सुंदर गंतव्य में उनकी अगुआई द्वारा पहुंच सकते हैं। इसलिए, बचाए जाने का मतलब यह नहीं है कि हमने पूर्ण उद्धार प्राप्त कर लिया है, और जब प्रभु लौटेंगे, तो हमें तुरंत स्वर्ग में आरोहित नहीं किया जाएगा।

4. पूर्ण उद्धार प्राप्त करने के पथ की खोज

तो पूर्ण उद्धार प्राप्ति का मार्ग कहाँ है? वास्तव में, प्रभु यीशु ने हमें पूर्ण उद्धार प्राप्त करने के मार्ग के बारे में बहुत पहले ही बता दिया था। आइए विभिन्न बाइबल के पदों पर नज़र डालें, "मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (यूहन्ना 16:12-13)। "जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है" (प्रकाशितवाक्य 2:17)। "ये बातें पूरी हो गई हैं। मैं अल्फा और ओमेगा, आदि और अन्त हूँ। मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊँगा" (प्रकाशितवाक्य 21:6)। "जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा" (यूहन्ना 12:48)। प्रभु ने हमें पूर्ण उद्धार प्राप्त करने और स्वर्गिक राज्य में प्रवेश करने का मार्ग दिखाया है। अर्थात, अब अंत के दिनों में, प्रभु यीशु दूसरी बार सारे सत्य व्यक्त करने के लिए वापस आएंगे, और प्रत्येक व्यक्ति जो परमेश्वर की उपस्थिति का प्यासा है, जो उसकी तलाश करता है, प्रभु स्वतंत्र रूप से जीवन जल के झरने से उन्हें जल प्रदान करेंगे, इस प्रकार हमें परमेश्वर से नए जीवन के जीवंत जल को प्राप्त करने और हमारे आध्यात्मिक जीवन को प्रावधान प्राप्त करने में सक्षम बनायेंगे। इसके उपरांत, परमेश्वर के वचनों के न्याय और ताड़ना का अनुभव करने के माध्यम से, हमारे भ्रष्ट स्वभाव शुद्ध किये जाएंगे, हम पाप के बंधनों को दूर कर देंगे, हम सारे शैतानी अंधकारमय प्रभावों से खुद को छुड़ा लेंगे, और हम परमेश्वर के वचनों के अनुसार जियेंगे। जब परमेश्वर का परीक्षण हमारे ऊपर आएगा, तो हम अपनी गवाही में मजबूती से खड़े होने में सक्षम होंगे और ऐसे लोग बन जायेंगे जो परमेश्वर का आज्ञापालन करते हैं, उनकी महिमा करते हैं, ऐसे लोग बन जायेंगे जो अपने हर काम में परमेश्वर को प्रकट करते हैं। इस तरह, हम वास्तव में पूर्ण उद्धार प्राप्त करेंगे और परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने के योग्य हो जाएँगे।

भाइयो और बहनो, प्रभु हमें प्रबुद्ध करें, ताकि हम बचाए जाने और पूर्ण उद्धार प्राप्त करने के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से देख सकें, ताकि हम बिल्कुल भी गलतफहमी और कल्पनाओं की दलदल में न फंसे और इस तरह स्वर्गिक राज्य में अपने प्रवेश की महान घटना में देरी न कर बैठें। हमें बुद्धिमान कुंवारियों जैसा होना चाहिए और खुले दिमाग के साथ सत्य की तलाश करनी चाहिए, केवल तभी हम जल्द से जल्द, दूल्हे के आगमन का स्वागत कर पाएंगे, मेम्ने के विवाह भोज में भाग ले सकेंगे और जीवन जल से सिंचित किये जाएंगे। एक बार जब हम अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय और ताड़ना के कार्य का अनुभव कर लेंगे, अपने सभी भ्रष्ट स्वभावों को दूर कर लेंगे और हम परमेश्वर के वचनों की वास्तविकता को जीने लगेंगे, तो हम अंतत: पूर्ण उद्धार प्राप्त करेंगे और स्वर्गिक राज्य में प्रवेश करेंगे।

सारी महिमा परमेश्वर की हो, आमीन!

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