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6 हिंदी मसीही फिल्में सच्ची कहानियों पर आधारित - जीवन की दिशा खोजने में आपकी मदद करती हैं

जैसा कि हम जीवन के माध्यम से यात्रा करते हैं, हमने कभी चिंतित, असहाय या पीड़ा महसूस की है। क्या आप मनुष्य के दर्द का स्रोत जानते हैं? जीवन का सही मूल्य और अर्थ क्या है? सच्ची कहानियों पर आधारित 6 हिंदी मसीह फिल्में देखें और आपको सही जीवन लक्ष्य और दिशा मिलेगी।

त्वरित नेविगेशन मेन्यू
1. इंतज़ार था जिन ख़ुशियों का
2. माँ की ममता
3. कहाँ है घर मेरा?
4. ईमान से समझौता नहीं
5. अग्नि द्वारा बप्तिस्मा
6. स्वर्गिक राज्य की प्रजा

1. Hindi Christian Movie | इंतज़ार था जिन ख़ुशियों का | A True Christian Story (Hindi Dubbed)

डिंग रुइलिन और उसका पति एक कारोबार शुरू करने और उसे चलाने के लिये दिन-रात मेहनत करते हैं ताकि पैसा कमाकर, एक अच्छी ज़िंदगी जी सकें। लेकिन सीसीपी सरकार के शोषण और बुरे बर्ताव के चलते, वे कर्ज़ में बुरी तरह डूब जाते हैं। विदेश जाकर काम करने के अलावा, उनके पास और कोई विकल्प नहीं बचता। अधिक पैसा कमाने की गरज़ से, डिंग रुइलिन दो-दो काम पकड़ लेती है। काम के भारी बोझ और आस-पास के लोगों की बेरुख़ी से, उसे पीड़ा और पैसा कमाने की बेबसी का एहसास होता है। अपनी पीड़ा और उलझन के मध्य, डिंग रुइलिन की मुलाकात अपनी हाई स्कूल की एक सहपाठी लिन झिशिन से हो जाती है। बातचीत के दौरान डिंग रुइलिन को पता चलता है कि परमेश्वर में आस्था रखने की वजह से लिन झिशिन में बहुत-सी बातों की समझ आ गई है। परमेश्वर की उपस्थिति में, उसे आध्यात्मिक शांति और आनंद प्राप्त हो रहा है। वह सुकून और सहजता का जीवन जी रही है। इससे डिंग रुइलिन के मन में भी परमेश्वर में विश्वास रखने की भावना प्रबल होती है। जल्दी-जल्दी और अधिक पैसा कमाने के विचार से, डिंग रुइलिन और उसका पति एक रेस्टॉरेंट का अधिग्रहण कर लेते हैं। लेकिन लगातार काम और थकान की वजह से, डिंग रुइलिन एक गंभीर बीमारी का शिकार हो जाती है। उसे लकवा होने का ख़तरा बढ़ जाता है। बीमारी की यंत्रणा के दौरान डिंग रुइलिन को आत्म-चिंतन का अवसर मिलता है। लोग किसलिये जीते हैं? क्या महज़ धन-दौलत और शोहरत के लिये जीवन गँवा देना सही है? क्या धन से इंसान अपने ख़ालीपन और दुखों से छुटकारा पा सकता है? क्या धन इंसान को मौत के मुँह में जाने से बचा सकता है? परमेश्वर के वचनों पर बहन लिन झिशिन की सहभागिता से, डिंग रुइलिन को जीवन के बारे में इन प्रश्नों के उत्तर साफ़ तौर पर मिलने लगते हैं। उसमें यह भी समझ आती है कि वह कौन-सी सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है जिसका इंसान को अनुसरण करना चाहिये। अंतत:, उसे आध्यात्मिक मुक्ति मिल जाती है। परमेश्वर के वचनों के मार्गदर्शन से, आख़िरकार डिंग रुइलिन जीवन में आनंद की खोज कर लेती है...

2. Hindi Christian Family Movie | माँ की ममता | What Is True Love for Children?

माँ की ममता नामक फ़िल्म एक ईसाई परिवार की कहानी है जो बच्चों की परवरिश की पड़ताल करती है।

"ज्ञान आपकी नियति बदल सकता है" और "बेटा अजगर बनता है और बेटी अमरपक्षी" ऐसी उम्मीदें हैं जो हर माँ-बाप अपने बच्चों से रखते हैं। शी वेनहुई अपनी बेटी जियारुई को विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षाओं में उत्तीर्ण कराकर, किसी अच्छे विश्वविद्यालय में प्रवेश दिलाने के लिये बिक्री निर्देशक के पद से सेवानिवृत्त होने का फ़ैसला कर लेती है, ताकि जियारुई की फिर से परीक्षा में बैठने की तैयारी के दौरान वह अपनी बेटी के साथ रह सके। वेनहुई के अधिक दबाव वाली पढ़ाई के तरीकों और कॉलेज की प्रवेश परीक्षा के स्पर्धात्मक दबाव के चलते, जियारुई की हिम्मत जवाब देने लगती है और वह मायूसी के चरम पर पहुँच जाती है। वेनहुई को इसका बेहद पछतावा होता है: उसे लगता है कि उसने जो कुछ भी किया, अपनी बेटी की भलाई के लिये किया, लेकिन अनजाने में वह उसके दुख और पीड़ा का कारण बन गई... ऐसे में उसकी एक पुरानी सहपाठी फैंग शिनपिंग उसे परमेश्वर के सुसमाचार का उपदेश देती है। परमेश्वर के वचनों को पढ़कर, शू वेनहुई को आख़िरकार समझ में आता है कि "ज्ञान आपकी नियति बदल सकता है" जैसे विचार उसे और उसके बच्चे को आहत करने वाले हैं, उसे यह भी समझ में आ जाता है कि उसे अपनी बेटी को किस प्रकार से शिक्षा देनी चाहिये जिससे कि असली प्रेम प्रकट हो...

3. Hindi Christian Family Movie "कहाँ है घर मेरा?" | God Gave Me a Happy Family (Hindi Dubbed)

वेन्‍या जब दो साल की थी, उसके माता-पिता का तलाक हो गया और उसके बाद वह अपने पिता और सौतेली मां के साथ रही। उसकी सौतेली मां उसे स्‍वीकार नहीं कर पाई और हमेशा उसके पिता के साथ झगड़ा करती रही। उसके पिता के पास वेन्‍या को उसकी मां के घर भेजने के अलावा कोई और चारा न रहा, परंतु उसकी मां अपने कारोबार को चलाने में पूरी तरह व्‍यस्‍त थी और उसके पास वेन्‍या का ध्‍यान रखने के लिए कोई समय नहीं था, इसलिये वह अक्‍सर अपने रिश्‍तेदारों और दोस्‍तों के घर लालन-पालन के लिए धक्‍का खाती रही। दूसरों के यहां लालन-पालन के कई वर्षों के पश्‍चात् नन्‍ही सी वेन्‍या अकेली और असहाय महसूस करने लगी और एक घर के अपनेपन के लिए लालायित होने लगी। जब उसके पिता और सौतेली मां का तलाक हुआ, तभी वह अपने पिता के घर आ पाई और उसके बाद ही, अच्‍छे या बुरे के लिए, उसे एक घर मिल पाया।

जब वेन्‍या बड़ी हो गई, वह बहुत सतर्क और आज्ञाकारी थी, और उसने मेहनत से पढ़ाई की। लेकिन जिस समय वह अपने कॉलेज के दाखिले की प्रवेश परीक्षा के लिए मेहनत से पढ़ाई कर रही थी, ठीक उसी समय उस पर दुर्भाग्‍य का साया पड़ गया। उसकी मां को ब्रेन हैमरेज हो गया और वह लकवा से ग्रस्‍त होकर बिस्तर पर पड़ गई। उसके सौतेले पिता ने उसकी मां को न सिर्फ छोड़ दिया बल्कि उसकी संपत्ति पर भी कब्‍ज़ा कर लिया। उसके बाद वेन्‍या के पिता को लीवर कैंसर के कारण अस्‍पताल में भर्ती होना पड़ा। वेन्‍या स्‍वयं को घर-परिवार की जिम्‍मेदारी उठा पाने में असमर्थ महसूस करने लगी। वह अपने रिश्‍तेदारों और दोस्‍तों से मदद की गुहार करने के अलावा और कुछ न कर सकी, परंतु सभी ने उसे अस्‍वीकार कर दिया....

जब वेन्‍या पीड़ा में थी और उसके पास कोई सहारा नहीं था, सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर की कलीसिया की दो बहनों ने वेन्‍या, उसकी मां और बहन को सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के अंत के दिनों के कार्य की गवाही दी। वे सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर के वचनों के माध्‍यम से लोगों के जीवन के दु:ख की जड़ों को समझने में सक्षम हो पाए। वे यह समझ पाए कि जब लोग परमेश्‍वर के समक्ष आते हैं, सिर्फ तभी वे परमेश्‍वर की सुरक्षा प्राप्‍त कर प्रसन्‍नता से रह सकते हैं। सिर्फ परमेश्‍वर के वचनों के ढाढ़स से मां और बेटियां अपने दुख और बेबसी की हालत से बाहर आ सकीं। वेन्‍या ने सचमुच परमेश्‍वर के प्रेम और दया का अनुभव किया, उसने एक घर का अपनापन महसूस किया, और एक सच्‍चे घर में आ गई।

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4. Hindi Christian Movie "ईमान से समझौता नहीं": ईमानदारी की कहानी

वांग शिनयू और उसके पति की कपड़े की एक दुकान है। हालाँकि आरंभ में वे पूरी सच्चाई और ईमानदारी से अपना स्टोर चलाते हैं। लेकिन अधिक धन नहीं कमा पाते और बड़ी मुश्किल से गुज़र-बसर कर पाते हैं। लेकिन जब वे अपने साथियों को झूठ और फ़रेब से कारोबार करके गाड़ियाँ और घर ख़रीदते, ऐशो-आराम की ज़िंदगी जीते देखते हैं, तो वे निर्णय करते हैं कि अब वे भी पीछे नहीं रहेंगे, और अपने साथियों की राह पर ही चलते हुए, वे झूठ और फ़रेब से कारोबार करने लगते हैं। कुछ सालों बाद, हालाँकि उन्होंने पैसा कमा लिया, उनकी अंतरात्मा उन्हें कचोटती है, उन्हें अपने दिल में एक ख़ालीपन का एहसास होता है। तब वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के सुसमाचार को स्वीकार कर लेते हैं, परमेश्वर के वचन पढ़ते हैं। इससे उन्हें पता चलता है कि परमेश्वर को ईमानदार लोग पसंद हैं और वह कपटी लोगों से घृणा करता है। उन्हें समझ में आ जाता है कि ईमानदार लोगों को परमेश्वर की आशीष मिलती है। लेकिन, वे जगत में बुराई और अंधेरा भी देखते हैं और इस बात से चिंतित हो जाते हैं कि ईमानदारी से कारोबार करके वे धन नहीं कमा सकेंगे, बल्कि पैसा गँवाने का जोखिम बना रहेगा। इस तरह वे झूठ और कपट के सहारे ग्राहकों को धोखा देते रहते हैं। वे यह भी जानते हैं कि परमेश्वर इसी वजह से उनसे घृणा करता है... तमाम संघर्षों और नाकामियों के बाद, आख़िरकार वे परमेश्वर के वचनों के अनुसार, ईमानदार इंसान बनने का संकल्प लेते हैं। जब उन्हें परमेश्वर की आशीष मिलती है तो वे आश्चर्यचकित हो जाते हैं। उनका कारोबार तो फलता-फूलता ही है, उन्हें ईमानदार इंसान बनने का सुख और सुरक्षा भी प्राप्त होती है।

5. Hindi Christian Movie | अग्नि द्वारा बप्तिस्मा | How Can Christians Enter the Heavenly Kingdom?

प्रभु यीशु ने कहा, "जो मुझ से, 'हे प्रभु! हे प्रभु!' कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है" (मत्ती 7:21)। हम लोग स्वर्गिक पिता की इच्छा को पूरा करने वाले और परमेश्वर के आज्ञाकारी कैसे बनें, ताकि परमेश्वर हमें स्वर्ग के राज्य में ले जायें? चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने ईसाई सोंग एनज़े को सिर्फ़ इसलिये गिरफ़्तार करके सात साल के लिये जेल में डाल दिया, क्योंकि वह परमेश्वर में आस्था रखता था और सुसमाचार का प्रचार करता था। जेल से रिहा होने के बाद, उसने सुसमाचार के प्रचार के ज़रिये, परमेश्वर के लिये ख़ुद को दृढ़ता से खपाना जारी रखा। उसका मानना है कि वह अपने घर और करियर को त्याग कर, मेहनत और कार्य करके, परमेश्वर की इच्छा को पूरा कर रहा है। ऐसा करके, उसे निश्चित रूप से परमेश्वर की स्वीकृति प्राप्त होगी और उसे परमेश्वर द्वारा स्वर्ग के राज्य में ले जाया जाएगा। एक दिन, सोंग एनज़े गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है। वह अपना जीवन ख़तरे में जानकर, परमेश्वर से नाराज़ हो जाता है, उनसे बहस करने की कोशिश करता है। यहाँ तक कि अपने दायित्वों को पूरा करने में भी उसकी रुचि समाप्त हो जाती है। उसके बाद के घटनाक्रम में, अपनी स्थितियों की सच्चाई जानकर और परमेश्वर के वचनों के प्रकाशन के द्वारा उसे एहसास होता है कि इतने बरसों का उसका त्याग और परमेश्वर के लिये ख़ुद को खपाना मूलत: परमेश्वर के अनुग्रह और आशीषों को पाने के लिये महज़ एक सौदेबाज़ी की कोशिश थी। वह परमेश्वर का आज्ञाकारी नहीं है। आख़िरकार, खोज के ज़रिये, वह जान पाता है कि कैसे उसे अपने भ्रष्ट स्वभावों से मुक्ति पानी है, कैसे परमेश्वर का सच्चा आज्ञाकारी बनना है ताकि उसे परमेश्वर द्वारा उसे बचाया जाये।

6. Hindi Christian Movie | स्वर्गिक राज्य की प्रजा | Be an Honest Man and Testify to God

प्रभु यीशु ने कहा, "मैं तुम से सच कहता हूँ कि जब तक तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो , तुम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने नहीं पाओगे" (मत्ती 18:3)। प्रभु यीशु ने हमें बताया कि केवल ईमानदार लोग ही स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकते हैं; केवल ईमानदार लोग ही राज्य की प्रजा हो सकते हैं। यह फ़िल्म ईसाई चेंग नूओ के परमेश्वर के कार्य का अनुभव करने और जीवन में एक ईमानदार इंसान बनने के संघर्ष की कहानी कहती है। चेंग नूओ कभी डॉक्टर हुआ करती थी। परमेश्वर में आस्था रखने के बावजूद, रोज़मर्रा के जीवन में जब उसका सामना ऐसी बातों से होता है जो उसके हितों पर चोट करती हैं, तो वह झूठ और कपट का सहारा ही लेती है। जब उसका सामना परीक्षणों और क्लेशों से होता है तो वह गलतफ़हमियाँ पाल लेती है। उसे परमेश्वर से भी शिकायत होने लगती है। लेकिन जैसे-जैसे वह सत्य की खोज करती है, परमेश्वर के न्याय और ताड़ना से गुज़रती है, तो उसे अपनी बेईमानी, अपने स्वार्थी और अस्थिर शैतानी प्रकृति का मूल कारण समझ में आने लगता है। वह अपने मन में छिपी झूठ और बेईमानी की प्रवृत्ति को दूर करने का संकल्प लिये सत्य की खोज पर ध्यान देने लगती है। एक बार जब चेंग नूओ जब अपना कर्तव्य निभा रही थी, तो उस दौरान चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार उसे गिरफ़्तार करके भयंकर यातना देती है। ऐसे में, चेंग नूओ झूठ बोलने के बजाय मरना बेहतर समझती है। उसे मंज़ूर नहीं कि वह परमेश्वर को नकारे। वह परमेश्वर के लिये सुंदर और ज़बर्दस्त गवाही देती है। धीरे-धीरे चेंग नूओ एक ईमानदार इंसान बन जाती है। वह परमेश्वर से सच्चा प्रेम और उसकी आज्ञा का पालन करने लगती है। तो दरअसल उसकी कहानी है क्या?

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